
लखपति दीदी: कैसे सरिता उइके ने खेती और पशुपालन से बदली अपनी आर्थिक स्थिति
National Rural Livelihoods Mission से जुड़ने के बाद Sarita Uike के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। Narayanpur जिले के ग्राम पंचायत बम्हनी की रहने वाली सरिता अब हर महीने 20 से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
पहले केवल वर्षा आधारित खेती पर निर्भर था परिवार
सरिता उइके का परिवार पहले केवल वर्षा आधारित खेती पर निर्भर था। खेती से होने वाली सीमित आय के कारण परिवार का गुजारा मुश्किल से हो पाता था। आर्थिक तंगी के चलते बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना भी चुनौती बन जाता था।
सरिता के पति Gangadhar Uike ग्राम बम्हनी में रहते हैं, जो Narayanpur शहर से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित है।
स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद बदली दिशा
वर्ष 2017 में सरिता उइके Self Help Groups in India के अंतर्गत गुलाबी महिला स्व सहायता समूह से जुड़ीं। यह समूह आरती महिला ग्राम संगठन और एकता महिला क्लस्टर संगठन के तहत संचालित होता है।
समूह से जुड़ने के बाद सरिता में नियमित बचत की आदत विकसित हुई और उन्हें विभिन्न आजीविका गतिविधियों की जानकारी मिली।
खेती के साथ शुरू किए कई छोटे व्यवसाय
इसके बाद सरिता ने खेती के साथ-साथ साग-सब्जी उत्पादन, मछली पालन, बत्तख पालन और सूअर पालन जैसे काम शुरू किए।
समूह के माध्यम से उन्हें
15 हजार रुपये चक्रीय निधि,
60 हजार रुपये सामुदायिक निवेश कोष,
और 2 लाख रुपये बैंक लिंकेज ऋण प्राप्त हुआ।
इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने अपने खेती और अन्य व्यवसायों का विस्तार किया।
हर सप्ताह 5–6 हजार रुपये तक की आमदनी
आज सरिता उइके लगभग 7 एकड़ जमीन में सब्जी की खेती कर रही हैं और साथ ही तालाब में मछली पालन भी करती हैं। इन गतिविधियों से उन्हें हर सप्ताह लगभग 5 से 6 हजार रुपये की आय हो जाती है।
इसके अलावा पशुपालन से भी उन्हें अतिरिक्त आमदनी मिलती है।
परिवार की आर्थिक स्थिति हुई मजबूत
अब सरिता उइके की कुल मासिक आय 20 से 30 हजार रुपये तक पहुंच गई है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के साथ परिवार का पालन-पोषण भी बेहतर तरीके से हो रहा है।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि ऐसे उदाहरण ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं और स्व-सहायता समूहों के जरिए कई महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।




