महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) में हाल ही में बहुत बड़ा बदलाव हुआ है। दिसंबर 2025 में संसद ने एक नया कानून पारित किया है, जिसके तहत मनरेगा को पूरी तरह से बदला जा रहा है।
नया नाम और स्वरूप
अब इस योजना को ‘विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ या संक्षेप में VB-G RAM G (वीबी-जी राम जी) के नाम से जाना जाएगा।
कार्य दिवसों में वृद्धि
पुराने नियम के तहत साल में 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इससे ग्रामीण परिवारों को 25 दिन का अतिरिक्त काम मिल सकेगा।
वेतन भुगतान में तेजी
अब मजदूरों को उनके काम का भुगतान साप्ताहिक (Weekly) आधार पर किया जाएगा। पहले यह अधिकतम 15 दिनों के भीतर करने का प्रावधान था।
कृषि सीजन में ‘ब्रेक’
नए कानून के अनुसार, साल के दौरान खेती के व्यस्त समय (बुवाई और कटाई के दौरान) में योजना को 60 दिनों के लिए रोका जा सकता है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि खेती के लिए पर्याप्त मजदूर उपलब्ध रहें।
बजट और फंडिंग का नया नियम
राज्य की हिस्सेदारी: पहले मजदूरों की पूरी मजदूरी केंद्र सरकार देती थी। अब इसमें 60:40 का अनुपात होगा (60% केंद्र और 40% राज्य)। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह 90:10 होगा।
फंड की सीमा: अब केंद्र सरकार राज्यों के लिए एक निश्चित बजट (Normative Allocation) तय करेगी। यदि राज्य उससे ज्यादा खर्च करता है, तो उसे खुद वहन करना होगा।
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
टेक्नोलॉजी का उपयोग: धोखाधड़ी रोकने के लिए अब AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और बायोमेट्रिक हाजिरी का ज्यादा इस्तेमाल होगा।
महिलाओं की भागीदारी: योजना में कम से कम 33% (एक-तिहाई) काम महिलाओं को देना अनिवार्य बना दिया गया है।
जॉब कार्ड: पुराने मनरेगा जॉब कार्ड अभी भी मान्य रहेंगे, लेकिन अब धीरे-धीरे नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ जारी किए जाएंगे।
विशेष नोट: वर्तमान में यह योजना बदलाव के दौर (Transitional Phase) में है। अगर आपके पास पुराना जॉब कार्ड है और उसका e-KYC पूरा हो चुका है, तो आप अभी भी काम के लिए पात्र हैं।