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दंडकारण्य सेहत संदेश : गिलोय – आयुर्वेद की अमृत बेल ,जाने इसके उपयोग और औषधीय गुण…

“क्या आप जानते हैं गिलोय को आयुर्वेद में अमृतबेल क्यों कहा जाता है?

क्योंकि ये एक ऐसी औषधि है जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता से लेकर शरीर की आंतरिक सफाई तक—हर जगह असर दिखाती है।

 

  परिचय

गिलोय एक बेल होती है, जिसे संस्कृत में गुडूची भी कहते हैं। इसकी तना (स्टेम) सबसे ज्यादा औषधीय होती है। आयुर्वेद में इसे त्रिदोष—वात, पित्त और कफ—को संतुलित करने वाली महान औषधि माना गया है।

 

गिलोय के प्रमुख औषधीय गुण

1. इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है

शरीर को इंफेक्शन, बुखार और वायरल रोगों से बचाने में मददगार।

2. डिटॉक्सिफिकेशन

शरीर में जमा टॉक्सिन्स को निकालकर खून को साफ करती है।

3. एंटी-इंफ्लेमेटरी

सूजन, जोड़ो के दर्द, गठिया और arthritis में राहत देती है।

 

4. ज्वर नाशक (Fever Reducer)

डेंगू, मलेरिया, वायरल फीवर में प्लैटलेट बढ़ाने व बुखार कम करने में उपयोगी।

 

5. शुगर लेवल नियंत्रित करने में मदद

डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद (लेकिन डॉक्टर की सलाह के साथ)।

 

6. पाचन ठीक रखती है

गैस, कब्ज, एसिडिटी में राहत और भूख बढ़ाने में सहायक।

 

7. तनाव कम करती है

मानसिक थकान और तनाव को कम करने वाले गुण भी पाए जाते हैं।

उपयोग कैसे करें?

1. गिलोय का रस – 10–20 ml

2. गिलोय का चूर्ण – 1 से 3 ग्राम

3. गिलोय की स्टेम उबालकर – 1 गिलास काढ़ा

4. गिलोय की गोली / टैबलेट – डॉक्टर की सलाह से

5. तुलसी के साथ गिलोय – बुखार और वायरल में ज्यादा असरदार

 

कब और कितना ले

सामान्य इम्युनिटी के लिए- 10 ml रस रोज

बुखार में- 15–20 ml सुबह-शाम

काढ़ा- 1 कप दिन में एक बार

 

किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?

गर्भवती महिलाएं

स्तनपान कराने वाली महिलाएं

जिनका शुगर बहुत कम होता है

Auto-immune रोग (जैसे RA, lupus) वाले लोग → डॉक्टर से पूछकर ही ले

 

ज्यादा लेने के नुकसान

सिरदर्द

लो ब्लड शुगर

पेट में हल्की परेशानी

शरीर में अधिक गर्मी

गिलोय सही मात्रा और सही तरीके से लिया जाए तो यह शरीर की इम्युनिटी, पाचन, जोड़ों के दर्द और बुखार जैसी समस्याओं में चमत्कारिक रूप से काम करता है। लेकिन याद रखें—औषधि तभी लाभ देती है जब मात्रा सही हो।”

 

गिलोय किन लोगों को नहीं लेना चाहिए?

1. Auto-Immune रोग वाले लोग

जैसे—रुमेटाइड आर्थराइटिस (RA),लूपस (SLE)

मल्टीपल स्क्लेरोसिस

गिलोय इम्यून सिस्टम को ज्यादा एक्टिव कर देता है, जिससे ये रोग बढ़ सकते हैं।

2. जिनका शुगर बहुत कम रहता है (Hypoglycemia)

गिलोय शुगर को और कम कर सकता है।

3. गर्भवती महिलाएँ (Pregnant Women)

हार्मोनल बदलाव पर असर पड़ सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।

4. ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाएँ

शिशु पर प्रभाव को लेकर पर्याप्त शोध नहीं है, इसलिए बिना सलाह सेवन न करें।

5. किडनी रोग वाले लोग

ज्यादा मात्रा में लेने से नुकसान हो सकता है।

6. जिन्हें बार-बार डायरिया या दस्त की समस्या रहती है

गिलोय पाचन को प्रभावित कर सकता है।

7. जिन्हें पहले से कोई हार्बल एलर्जी है

गिलोय भी एलर्जिक रिएक्शन दे

सकता है—जैसे खुजली, रैश, उलझन आदि।

 

 

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Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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