दंडकारण्य सेहत संदेश : ऊर्जा और इम्यूनिटी बढ़ाने का सबसे आसान तरीका अश्वगंधा जिसमें थकान से लेकर तनाव तक का है समाधान!

अश्वगंधा
अश्वगंधा का परिचय
अश्वगंधा (Withania somnifera) एक प्रसिद्ध औषधीय पौधा है जिसे आयुर्वेद में “इंडियन जिनसेंग” या “विंटर चेरी” भी कहा जाता है। इसके मूल (जड़) और पत्तियाँ औषधि के रूप में उपयोग होती हैं। इसका नाम “अश्वगंधा” इसलिए पड़ा क्योंकि इसकी जड़ से घोड़े जैसी गंध आती है और माना जाता है कि यह शरीर को घोड़े जैसी शक्ति देती है।
औषधीय उपयोग
1. तनाव और चिंता कम करने में
इसके सेवन से मन को शांति मिलती है और स्ट्रेस हार्मोन (Cortisol) कम होता है।
2. नींद में सुधार
अनिद्रा और बेचैनी की समस्या में लाभदायक।
3. शारीरिक शक्ति बढ़ाने में
थकान, कमजोरी और मांसपेशियों के विकास में मदद करती है।
4. प्रतिरक्षा (इम्यून सिस्टम) बढ़ाने में
शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है।
5. थायरॉयड, डायबिटीज और हृदय स्वास्थ्य में सहायक
रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित करती है।
6. महिलाओं और पुरुषों के लिए हार्मोनल संतुलन में सहायक
गुण और फायदे
मानसिक तनाव से राहत
शरीर में ऊर्जा और सहनशक्ति बढ़ाना
मांसपेशियों की वृद्धि
रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि
नींद की गुणवत्ता में सुधार
उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करना (Anti-aging प्रभाव)
किन्हें नहीं लेना चाहिए
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ
लो ब्लड प्रेशर वाले लोग
थायरॉयड या ऑटोइम्यून रोग (जैसे ल्यूपस, रुमेटाइड आर्थराइटिस) से पीड़ित लोग
जिनको पेट में अल्सर या पाचन संबंधी समस्या हो
(सेवन से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह ज़रूर लें)
कब और कितना खाना चाहिए
पाउडर (चूर्ण) – 3 से 5 ग्राम (आधा से एक चम्मच) सुबह-शाम दूध या गुनगुने पानी के साथ
कैप्सूल/टैबलेट – डॉक्टर की सलाह अनुसार (आमतौर पर दिन में 1 या 2 बार)
अश्वगंधा दूध – रात को सोने से पहले लेना सबसे अच्छा माना जाता है
ध्यान दें
नियमित सेवन से लाभ होता है, लेकिन ओवरडोज़ से पेट दर्द, उल्टी या नींद ज़्यादा आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
संतुलित मात्रा में, चिकित्सक की सलाह से ही उपयोग करें।




