दंडकारण्य सेहत संदेश : हर घर की रसोई में पाए जाने वाला सुपर फूड टमाटर में है पौष्टिक तत्वों की भरमार जो है बेहतर स्वस्थ और सुंदरता के लिए फायदेमंद
टमाटर
परिचय
टमाटर एक ऐसी फसल है जो हर घर की रसोई में रोज़ इस्तेमाल होती है।
भारत में सबसे ज़्यादा टमाटर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ में उगाया जाता है।
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उपयोग –
1. टमाटर का उपयोग लगभग हर व्यंजन में होता है — सब्ज़ी, सलाद, सूप, चटनी, केचअप, सॉस, जूस आदि में।
2.खाद्य उद्योग में इसका प्रयोग टमाटर पेस्ट, प्यूरी, सॉस और टमाटर पाउडर बनाने में होता है।
3. औषधीय रूप से भी टमाटर का प्रयोग त्वचा की चमक, पाचन सुधार और वजन नियंत्रण के लिए किया जाता है।
पौष्टिक तत्व और फायदे (Nutritional Value & Benefits):
1. टमाटर में विटामिन A, C, K, पोटैशियम, फोलेट और लाइकोपीन प्रचुर मात्रा में होता है।
2. यह दिल की बीमारियों और कैंसर के खतरे को कम करता है।
3.यह त्वचा को निखारता, झुर्रियाँ घटाता और सनबर्न से बचाता है।
4.इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
5.टमाटर ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है, इसलिए डायबिटीज़ वालों के लिए भी उपयोगी है।
खेती की जानकारी (Farming Details):
1. टमाटर की खेती रबी और खरीफ दोनों सीजन में की जा सकती है।
2. इसके लिए दोमट मिट्टी जिसमें जल निकास अच्छा हो, सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
3. तापमान 20°C से 25°C के बीच आदर्श होता है।
4. बीज को 15–20 दिन नर्सरी में तैयार कर फिर खेत में रोपाई की जाती है।
5. सिंचाई हर 7–10 दिन में जरूरी होती है।
6. फसल को कीटों से बचाने के लिए नीम-आधारित जैविक दवा या ट्राइकोडर्मा का उपयोग किया जा सकता है।
7. 70 से 90 दिन में फल तुड़ाई योग्य हो जाते हैं।
मुनाफ़ा (Profit) –
1. एक एकड़ में टमाटर की लागत करीब ₹30,000 से ₹40,000 तक आती है।
2. उत्पादन लगभग 250–300 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो सकता है।
3. अगर औसतन बाजार भाव ₹10 प्रति किलो है तो एक एकड़ से ₹2.5 से ₹3 लाख की आमदनी संभव है।
4.यानी किसान को प्रति एकड़ ₹1.5 से ₹2 लाख तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है।
5. यदि इसे प्रोसेसिंग यूनिट या स्थानीय बाजार से जोड़ा जाए तो मुनाफ़ा और भी बढ़ सकता है।
सावधानी:
1. अत्यधिक टमाटर खाने से पेट में एसिडिटी हो सकती है।
2. खेती में ज्यादा नाइट्रोजन खाद डालने से फल मुलायम और जल्दी खराब हो जाते हैं।
निष्कर्ष –
टमाटर सिर्फ़ एक सब्ज़ी नहीं — बल्कि किसान के लिए “लाल सोना” है।
यह सेहत, स्वाद और आमदनी — तीनों का संगम है।
अगर सही तकनीक से खेती की जाए तो यह हर मौसम में मुनाफ़ा देने वाली फसल है।
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