
दंडकारण्य दर्पण
पेसा और वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में टास्क फोर्स की पहली बैठक, राज्य और जिला स्तर पर बनेगी मजबूत निगरानी व्यवस्था
छत्तीसगढ़ में अनुसूचित क्षेत्रों के समग्र विकास और आदिवासी समुदाय के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में महानदी मंत्रालय में वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) और पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित टास्क फोर्स की पहली बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों कानूनों के बेहतर समन्वय और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पेसा कानून ग्राम स्वशासन को मजबूत करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी आदिवासी समाज से जुड़ी है, इसलिए उनकी परंपराओं, अधिकारों और विकास को केंद्र में रखकर पेसा का आदर्श मॉडल विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के प्रावधानों को एकीकृत दृष्टिकोण से लागू किया जाए, ताकि अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं को मजबूत बनाने और स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा संतुलित विकास को नई गति मिलेगी।
बैठक में पेसा नियम 2022 के क्रियान्वयन की समीक्षा के साथ-साथ वन अधिकार अधिनियम के तहत व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों की स्थिति, सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों की प्रगति तथा वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के नियमों और प्रक्रियाओं के बेहतर समन्वय के लिए राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति गठित करने की घोषणा की। यह समिति समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करेगी और उसके प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेगी। साथ ही सभी जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को सक्रिय करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि ग्राम सभाओं को अधिक सशक्त बनाया जा सके और विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो।
बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, विधायक नीलकंठ नेताम, विभिन्न विषय विशेषज्ञों सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।




