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सैकड़ों फायदे-हजारों उपयोग- जिंदगी के हर पड़ाव में काम आता हैं बांस! उम्मीद से ज्यादा फायदेमंद हैं इसकी खेती।

सैकड़ों फायदे-हजारों उपयोग- जिंदगी के हर पड़ाव में काम आता हैं बांस!
उम्मीद से ज्यादा फायदेमंद हैं इसकी खेती।

#दंडकारण्य दर्पण

आदिवासियों के बीच में एक कहावत लोकप्रिय है। जिंदगी के लिए जरूरी है बांस, रोजी रोटी के लिए जरूरी है बांस! मानव जिंदगी में बांस की कितनी अहमियत रही है उससे बयां करना बहुत आसान नहीं है। इतना जरूर कहा जा सकता है कि
बांस प्रकृति की अदभुत देन है, जिसके बहुत से उपयोग हैं। इसके करीब 1,500 उपयोग रिकॉर्ड किए जा चुके हैं जिनमें खाद्य पदार्थ के रूप में लकड़ी के विकल्प के रूप में, निर्माण और भवन सामग्री के रूप में, हस्ताशिल्प वस्तुओं के लिए कच्चे माल की तरह और लुगदी तथा कागज जैसे उपयोग बड़े आम हैं। दुनिया के 80 प्रतिशत बांस के जंगल एशिया में हैं और भारत, चीन तथा म्यांमार में कुल मिलाकर 1.98 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बांस के वन हैं। भारत दुनिया के सबसे समृद्ध बांस सम्पदा वाले देशों में से एक है।

बांस इस धरती पर यह सबसे तीव्र गति से बढ़ने वाला पौधा है। इसमें रोजगार तथा आय सृजन और गरीब ग्रामीणों के पोषण में सुधार की व्यापक संभावनाएं मौजूद है।

बाँस की खेती-

बाँस बीजों से धीरे धीरे उगता है। मिट्टी में आने के प्रथम सप्ताह में ही बीज उगना आरंभ कर देता है। कुछ बाँसों में वृक्ष पर दो छोटे छोटे अंकुर निकलते हैं। 10 से 12 वर्षों के बाद काम लायक बाँस तैयार होते हैं। भारत में दाब कलम के द्वारा इनकी उपज की जाती है। अधपके तनों का निचला भाग, तीन इंच लंबाई में, थोड़ा पर्वसंधि (node) के नीचे काटकर, वर्षा शु डिग्री होने के बाद लगा देते हैं। यदि इसमें प्रकंद का भी अंश हो तो अति उत्तम है। इसके निचले भाग से नई नई जड़ें निकलती हैं।

बाँस का जीवन 1 से 50 वर्ष तक होता है, जब तक कि फूल नहीं खिलते। फूल बहुत ही छोटे, रंगहीन, बिना डंठल के, छोटे छोटे गुच्छों में पाए जाते हैं। सबसे पहले एक फूल में तीन चार, छोटे, सूखे तुष (glume) पाए जाते हैं। साधारणत: बाँस तभी फूलता है जब सूखे के कारण खेती मारी जाती है और दुर्भिक्ष पड़ता है। शुष्क एवं गरम हवा के कारण पत्तियों के स्थान पर कलियाँ खिलती हैं। बहुत से बाँस एक वर्ष में फूलते हैं। ऐसे कुछ बाँस नीलगिरि की पहाड़ियों पर मिलते हैं। भारत में अधिकांश बाँस सामुहिक तथा सामयिक रूप से फूलते हैं। इसके बाद ही बाँस का जीवन समाप्त हो जाता है। सूखे तने गिरकर रास्ता बंद कर देते हैं। अगले साल बारीश के बाद बीजों से नई कलमें फूट पड़ती हैं और जंगल फिर हरा हो जाता है। अगर फूल सही समय खिले तो काट छाँटकर खिलना रोका जा सकता है।

उपयोग :
कागज बनाने के लिए बाँस उपयोगी साधन है। बाँस का कागज बनाना चीन एवं भारत का प्राचीन उद्योग है। चीन में बाँस के छोटे बड़े सभी भागों से कागज बनाया जाता है।

बल्ली, सिढी, टोकरी, चटाई, आदि बनाने मे काम आता है। कोमल प्ररोह खाएं जाते हैं। कागज बनाने मे भी काम आता है।
© दंडकारण्य दर्पण
सेहत संदेश

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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