CG News: जहां कभी लगती थी नक्सलियों की जन अदालत, वहीं गूंजी ‘मन की बात’, बदलते अबूझमाड़ ने लिखी विकास और विश्वास की नई कहानी
वन मंत्री केदार कश्यप, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी पहुंचे ईरकभट्टी, दशकों बाद लोकतंत्र और विकास की मुख्यधारा से जुड़ता दिखा अबूझमाड़

दंडकारण्य दर्पण
प्रधान-संपादक
अबूझमाड़ का नाम कभी नक्सली हिंसा, जन अदालतों और भय के माहौल के लिए जाना जाता था। दशकों तक इस क्षेत्र में नक्सलियों का प्रभाव इतना मजबूत रहा कि ग्रामीणों को उनके फरमानों के अनुसार जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ता था। विकास कार्य बाधित थे, सरकारी योजनाएं गांवों तक नहीं पहुंच पाती थीं और हजारों परिवार सुरक्षा की तलाश में अपने गांव छोड़कर नारायणपुर तथा अन्य शहरों की ओर पलायन कर गए थे।
लोगों को लगने लगा था कि शायद अबूझमाड़ कभी सामान्य जीवन की ओर नहीं लौट पाएगा। लेकिन केंद्र और राज्य सरकार ने इस चुनौती को गंभीरता से लिया। सुरक्षा बलों ने लगातार अभियान चलाए, अनेक जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी और वर्षों तक चले संघर्ष के बाद नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा। बड़ी संख्या में नक्सली मारे गए, जबकि सैकड़ों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना।
सुरक्षा के साथ-साथ सरकार ने विकास को भी प्राथमिकता दी। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, राशन, आवास और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अब दूरस्थ गांवों तक पहुंचने लगा। जिस अबूझमाड़ को कभी देश के सबसे दुर्गम और प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता था, वहां आज बदलाव की नई तस्वीर दिखाई दे रही है।
इस परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रतीक तब देखने को मिला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ का सामूहिक श्रवण अबूझमाड़ के ईरकभट्टी में आयोजित किया गया। जिस क्षेत्र में कभी नक्सलियों की जन अदालतें लगती थीं, वहीं आज लोकतंत्र के सबसे बड़े जनसंवाद कार्यक्रम की गूंज सुनाई दी।
कार्यक्रम में प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप पारंपरिक जनजातीय वेशभूषा में शामिल हुए। उनके साथ भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी भी उपस्थित रहे। शीर्ष नेतृत्व की यह मौजूदगी केवल एक कार्यक्रम में सहभागिता नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी था कि अबूझमाड़ तेजी से शांति, विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय मंच पर अबूझमाड़ और ईरकभट्टी की तस्वीर दिखाई देना पूरे बस्तर अंचल के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि आज क्षेत्र में जो बदलाव दिखाई दे रहा है, वह सुरक्षा बलों के त्याग, सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और स्थानीय लोगों के सहयोग का परिणाम है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि वर्षों बाद अबूझमाड़ में ऐसा माहौल बना है जहां लोग भय के बजाय भविष्य की बात कर रहे हैं। गांवों में विकास कार्य पहुंच रहे हैं, युवाओं के लिए नए अवसर बन रहे हैं और शासन की योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंच रहा है।
अबूझमाड़ की यह बदलती तस्वीर एक बार फिर यह संदेश देती है कि जब संकल्प, सुरक्षा और विकास साथ चलते हैं तो सबसे कठिन चुनौतियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है। जिस क्षेत्र में कभी बंदूक की आवाज गूंजती थी, वहां आज लोकतंत्र, विकास और विश्वास की नई कहानी लिखी जा रही है। यह बदलाव उन लोगों के लिए सबसे बड़ा उपहार है जिन्होंने वर्षों तक संघर्ष और असुरक्षा का दौर देखा और अब शांति तथा विकास का नया सवेरा महसूस कर रहे हैं।




