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धर्म

Chhattisgarh: भारत ने दुनिया को ज्ञान – विज्ञान दिया, आधुनिकता और अध्यात्म भी – संजय तिवारी 

विप्र नगर बस्ती में सम्पन्न हुआ हिन्दू सम्मेलन

 

भारत ने दुनिया को ज्ञान – विज्ञान दिया, आधुनिकता और अध्यात्म भी – संजय तिवारी

रायपुर। विप्र नगर बस्ती रायपुर में हिन्दू सम्मेलन का कार्यक्रम उत्साह पूर्वक सम्पन्न हुआ। जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रायपुरा नगर के संघचालक जयनेन्द्र जैन, मुख्य वक्ता संजय तिवारी, मुख्य अतिथि किन्नर अखाड़ा महामंडलेश्वर सुश्री सौम्या दीदी एवं हिन्दू समाज के सम्मानीय नागरिक गण उपस्थित थे।

 

इस सम्मेलन में सनातन संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना जैसे अहम विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इस सम्मेलन में उपस्थित थे।

इसके अलावा संत वेदप्रकाश महाराज विशेष तौर पर शामिल हुए

 

मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छत्तीसगढ़ प्रान्त प्रचार प्रमुख संजय तिवारी नें हिन्दू सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत नें दुनिया को ज्ञान दिया विज्ञान दिया। आधुनिकता और अध्यात्म भी प्रदान किया। जिसने दुनिया को शक्ति भी सिखाया और भक्ति की दिशा भी दी। उन्होनें कहा भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने वाले विचारों और उसकी गौरवशाली परंपरा को पुनः स्मरण करते हुए हाल ही में आयोजित हिंदू सम्मेलन में वक्ताओं ने देश की सांस्कृतिक धरोहर, आध्यात्मिक शक्ति और ऐतिहासिक संघर्षों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि भारत ने दुनिया को ज्ञान और विज्ञान ही नहीं, बल्कि अध्यात्म और आधुनिकता भी दी है। आर्यावर्त की इस भूमि ने शक्ति और भक्ति दोनों की दिशा दिखाई है, जिसने दुनिया की दशा और दिशा बदलने का कार्य किया है।

सम्मेलन में वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि जो राष्ट्र इतिहास से नहीं सीखता उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है, जबकि जो राष्ट्र इतिहास से सीखकर आगे बढ़ता है वही विश्व का मार्गदर्शन करता है। इसी संदर्भ में यह भी कहा गया कि जब-जब हिंदू समाज कमजोर हुआ है, तब-तब देश विभाजित हुआ है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, म्यांमार, भूटान, श्रीलंका और नेपाल जैसे नए राष्ट्रों का उदय इसी कारण हुआ।

वक्ताओं ने जोर दिया कि हिंदू समाज ने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया, किसी संस्कृति को नष्ट नहीं किया और न ही किसी सभ्यता को कुचला। भारत ने हमेशा वसुधैव कुटुम्बकम और सद्भाव का संदेश दिया। आठ सौ वर्षों तक मुगलों और अंग्रेजों के आक्रमण झेलने के बावजूद भारत की सभ्यता और संस्कृति आज भी चिरंजीवी है। यही कारण है कि कवि इकबाल ने भी लिखा था—“कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।”

सम्मेलन में गीता के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जहाँ सत्य है वहीं भगवान हैं और सत्य हिंदू धर्म के साथ है। “गर्व से कहो हम हिंदू हैं” केवल उद्घोष नहीं, बल्कि भारत के गौरव का मंत्र है। हिंदुत्व, मानव धर्म और सनातन परंपरा का मूल कार्य सबको जोड़ना रहा है। आज भी विश्व भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है क्योंकि भारत ही वह देश है जो एकात्मता का मार्ग दिखा सकता है।

वक्ताओं ने भारत के योगदान को याद करते हुए कहा कि जब भारत ने शून्य दिया, तब दुनिया को दशमलव मिला और विज्ञान ने प्रगति की। भारत की सभ्यता सबसे प्राचीन है और कला व संस्कृति की जन्मभूमि भी यही है। शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान जैसे महापुरुषों के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उन्होंने कभी पराधीनता स्वीकार नहीं की। पद्मिनी जौहर की बलिदान गाथा भी इसी आत्मगौरव का प्रतीक है।

आज जब भारत विश्व में परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, हिंदुत्व का आत्मगौरव भी बढ़ रहा है। वक्ताओं ने गायत्री परिवार के संदेश को दोहराते हुए कहा—“हम बदलेंगे, युग बदलेगा। हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा।” समाज में मौजूद विषमताओं और अलगाव को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

वेदों, संतों और महापुरुषों के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि समानता ही हिंदू धर्म का मूल मंत्र है। घासीदास बाबा, आंबेडकर, कबीर और रविदास जैसे महापुरुषों ने हमेशा एकता और समानता का संदेश दिया। अंग्रेजों के समय आई विषमता और अलगाव को आज भी दूर करने की आवश्यकता है।

 

पाँच बातें व्यवहार में लानी होगी। पहला भेद को खत्म करना होगा। समाज के हर वर्ग में हमारा उठना, बैठना, सुख दुःख में सहभागिता हो. सबको मैं अपना मित्र बनाऊंगा, यही सामाजिक समरसता है. पानी का साधन जो भी हो वह सबके लिए हो.

दूसरा, अपने घर में सप्ताह में एक दिन तय करके सब एक साथ भजन करें, साथ में घर पर बना भोजन करें. आपस के सुख दुःख की चर्चा करें. हम कौन हैँ, देश की स्थिति परिस्थिति पर चर्चा करें. महान आदर्शो पर चर्चा करना, उन्हें जीवन में कैसे अपनाएं इस पर चर्चा कर, प्रेरित करना.

तीसरा, आज ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती है, पर्यावरण संरक्षण के लिए मैं व्यक्तिगत स्तर पर क्या कर सकता हूँ. सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कैसे कम हो सकता है, पेड़ लगाओ, वाटर हार्वेस्टिंग कर सकते हैँ.

चौथा, स्व के मार्ग पर चलना. घर, परिवार, समाज में स्व भाषा बोलूंगा. यदि दूसरे प्रान्त में रहता हूँ तो वहाँ की भाषा भी सीख लूंगा. अपना वेश पहनना, हर दिन नहीं पहन सकता लेकिन पूजा में तो पहन सकता हूँ. अपनी वेशभूषा पहनना ही नहीं आता यह ठीक नहीं. स्वदेशी वस्तु का उपयोग अधिक करेंगे.

पांचवा, धर्म सम्मत आचरण कैसे करें, इसके लिए नागरिक कर्तव्य का पालन करना चाहिए. संविधान हमारे पुरखों ने हमें प्रदान किया है, उसमें हमारे मूल्य व संस्कृति के दर्शन की अभिव्यक्ति होती है. उन्हें पालन करना चाहिए. कुछ बातें क़ानून में नहीं हैँ, माता-पिता बड़ों के चरण स्पर्श करना, इससे विनम्रता आती है. बच्चोँ को संस्कार दें, घर में बच्चोँ से दान दिलवाने की परंपरा रही है, जिससे उनमें दायित्व का बोध आए.

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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