दंडकारण्य सेहत संदेश : काली हल्दी – आयुर्वेद, तंत्र और लोक-चिकित्सा तीनों में है इसका उपयोग

काली हल्दी (Kali Haldi) –
परिचय
काली हल्दी को संस्कृत में “कृष्णा हरिद्रा” और इंग्लिश में Black Turmeric कहते हैं।
यह हल्दी की एक दुर्लभ प्रजाति है जिसकी गाँठ अंदर से काली-बैंगनी रंग की होती है।
भारत में मुख्य रूप से पूर्वी भारत, असम, ओडिशा, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के जंगलों में पाई जाती है।
आयुर्वेद, तंत्र और लोक-चिकित्सा—तीनों में इसका महत्वपूर्ण स्थान है।
उपयोग (Uses)
काली हल्दी का उपयोग मुख्य रूप से इन रूपों में होता है—
दवा बनाने में
चूर्ण (Powder)
काढ़ा (Decoction)
लेप (Paste)
तेल (Oil)
धूप/हवन सामग्री
घरेलू उपयोग
त्वचा संबंधी समस्याओं में लेप
दर्द वाले स्थान पर मालिश
पाचन सुधारने के लिए काढ़ा
बैड एनर्जी हटाने के उपायों में (लोक मान्यता)
औषधीय गुण (Medicinal Properties)
काली हल्दी के मुख्य गुण:
एंटी-इन्फ्लेमेंंटरी (सूजन कम करे)
एंटी-बैक्टीरियल
एंटी-फंगल
पेन रिलीवर (दर्द निवारक)
एंटी-ऑक्सिडेंट
इम्यूनिटी बूस्टर
पाचन सुधारे
इसमें करक्यूमिन (Curcumin) की मात्रा सामान्य हल्दी से अलग और खास होती है।
लाभ (Benefits)
1. दर्द और सूजन में लाभ
गठिया (Arthritis), जोड़ दर्द, मांसपेशियों में दर्द में इसका लेप बहुत राहत देता है।
2. त्वचा के लिए लाभदायक
कील-मुहांसे
दाग-धब्बे
फोड़े-फुंसियाँ
एलर्जी और खुजली
इनमें इसका लेप या काढ़ा बहुत कारगर है।
3. पाचन ठीक करे
गैस
अपच
कब्ज
पेट में ऐंठन
इनमें काली हल्दी के चूर्ण का उपयोग दिया जाता है।
4. श्वसन रोगों में उपयोगी
खांसी
जुकाम
सांस की तकलीफ
इसमें काली हल्दी से बना काढ़ा राहत देता है।
5. इम्यूनिटी बढ़ाए
इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं।
6. महिला स्वास्थ्य में असरदार
मासिक धर्म के दर्द
सफेद पानी
आदि में काली हल्दी का प्रयोग लोक उपचार में किया जाता है।
7. ऊर्जा और स्टैमिना बढ़ाए
कुछ आयुर्वेदिक टॉनिक में इसका प्रयोग शारीरिक शक्ति बढ़ाने के लिए किया जाता है।




