दंडकारण्य सेहत संदेश : मसाला नहीं औषधि गुणों से भरा मुनाफे की फसल है अदरक

परिचय
अदरक
अदरक – जिसे ज़िंजिबर ऑफ़िसिनेल (Zingiber officinale) कहा जाता है- जिसके बिना हर रसोई अधूरी है और हमारे रसोई का ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद का भी अनमोल हिस्सा है।
इसे चाय, अचार, औषधि और मसाले के रूप में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।
औषधीय उपयोग
पाचन संबंधी
अदरक पाचक रसों के स्राव को बढ़ाकर अपच, गैस और पेट दर्द में राहत देता है।
2.सर्दी-जुकाम में लाभदायक
अदरक की चाय या रस लेने से गले की खराश, खांसी और नाक बंद होने में आराम मिलता है।
3.रक्त संचार में सुधार
यह रक्त को पतला करता है और हृदय संबंधी रोगों से बचाव में मदद करता है।
4. सूजन व दर्द में राहत
इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों के दर्द, सिरदर्द और मांसपेशियों की सूजन को कम करते हैं।
5. उल्टी व मिचली में उपयोगी
गर्भावस्था या यात्रा के दौरान होने वाली उल्टी को रोकने में अदरक बहुत प्रभावी है।
6. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
अदरक में मौजूद जिंजरॉल (Gingerol) शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को मजबूत करता है।
7.ब्लड शुगर कंट्रोल
नियमित सेवन से ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
पैदावार
खेती का समय
बुवाई का सही समय – जून से जुलाई तक होता है। अदरक की बुवाई बारिश शुरू होने के तुरंत बाद करनी चाहिए।
मिट्टी
ढीली, उपजाऊ और जैविक पदार्थों से भरपूर दोमट मिट्टी सर्वोत्तम होती है।
सिंचाई
हर 10-15 दिन में हल्की सिंचाई जरूरी है। जलभराव से फसल को नुकसान होता है।
फसल अवध
लगभग 8-10 महीने में फसल तैयार हो जाती है।
उपज
एक हेक्टेयर में औसतन 15 से 20 टन अदरक की उपज होती है।
मुनाफा
1 हेक्टेयर में खेती की लागत आती है, 1.5 से 2 लाख रुपये आती है।
जबकि विक्रय मूल्य के अनुसार 4 से 6 लाख तक का आमदनी होती है
इस प्रकार 1 हेक्टेयर में 2से 3 लाख तक मुनाफा किया जा सकता है ।
टिप्स – अगर अदरक की जैविक खेती की जाए
तो अदरक और मांग दोनों ही बढ़ जाती है




