
संवाददाता- दीपक गोटा
नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन की तैयारी सुरक्षाबलों की 10 स्पेशल टीमों का गठन ,ऑपरेशन के लिए टारगेट में 50 से ज्यादा गांव ,सुरक्षाबलों के जवानों की छुट्टियां अगले आदेश तक के लिए रद्द कर दी गई
बीजापुर- छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को और तेज किया जाएगा
नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबल के जवान आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सली संगठन के सफाए के लिए मोर्चा संभाल लिया है
ऑपरेशन के लिए 10 स्पेशल टीमें बनाई गई हैं यह एक बड़े ऑपरेशन की तैयारी है सुरक्षाबल के जवानों का टारगेट अब नक्सल प्रभावित 50 गांवों में ऑपरेशन चलाने का है- सुरक्षाबलों के जवानों की छुट्टियां अगले आदेश तक के लिए रद्द कर दी गई और जवानों से कहा गया है कि अगले आदेश तक मोर्चा संभाले रहें
इस अभियान का उद्देश्य इन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ना है
सुरक्षा बल इन गांवों में माओवादियों के ठिकानों को ध्वस्त करने और क्षेत्र को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं
यह बड़ा ऑपरेशन बस्तर के चार जिलों में सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिला – सुकमा- बीजापुर- नारायणपुर- और कांकेर में चलाया जा सकता है
मिशन की शुरुआत बीजापुर जिले से होने की संभावना है
इस ऑपरेशन के लिए 50 नक्सल प्रभावित गांवों की एक सूची तैयार कर ली गई है
DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के जवानों की 10 टीमें गठित किया गया हैं
इन्हीं 10 टीमों को नक्सल विरोधी अभियान के लिए जंगल में उतारा जाएगा
छत्तीसगढ़ में इस समय नक्सली संगठन सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई के कारण काफी बैकफुट पर हैं
सुरक्षाबलों के एक्शन में कई शीर्ष माओवादी नेता मारे गए हैं, जिनमें केंद्रीय समिति के सदस्य तक शामिल हैं
वहीं एनकाउंटर के डर और सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीति (जैसे ‘लोन वर्राटू’ अभियान) के कारण बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं
ऐसे में सुरक्षाबल के जवान पर पूरी तरह से माओवादी संगठन को खत्म करने के लिए प्लान बना रहे हैं
सरेंडर और हिंसा छोड़ने को लेकर माओवादी संगठन के भीतर गंभीर मतभेद सामने आए हैं कई निचले और मध्यम स्तर के कैडर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं जिसका खुलासा आठ से अधिक पर्चों के माध्यम से हुआ है
छत्तीसगढ़ में माओवादी संगठन इन दिनों नेतृत्व संकट से जूझ रही है- अभी हाल ही में दावा किये गए थे कि दिवाली के मौके पर नक्सलियों की सीक्रेट मीटिंग की गई थी जिसमें देवजी- हिडमा और देवा जैसे दुर्दात नक्सली शामिल हुए थे और उन्हें संगठन की कमान सौंपने का फैसला किया गया था
छत्तीसगढ़ के बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर देश के सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिलों में शामिल हैं और
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने की डेडलाइन तय की है
वर्तमान तिथि (4 नवंबर 2025) से उस समय-सीमा में लगभग 5 महीने बाकी हैं- ऐसे में फोर्स निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार है



