दण्डकारण्य सेहत संदेश : भारतीय संस्कृति की अमर औषधि, आस्था विज्ञान और स्वास्थ्य का संगम – तुलसी

भारतीय संस्कृति की अमर औषधि, आस्था विज्ञान और स्वास्थ्य का संगम – तुलसी
परिचय
“भारत में तुलसी केवल एक पौधा नहीं, अपितु आस्था का प्रतीक है। हर घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगाना परंपरा रही है – इसे देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है।”
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व-
“प्राचीन ग्रंथों में तुलसी को ‘पवित्र’ कहा गया है। इसे भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की प्रिय मानी जाती है। तुलसी के तने से बनी माला को भी अति पवित्र माना जाता हैं तथा उसे कंठ में धारण किया जाता है ।तुलसी विवाह, कार्तिक मास, और दीपावली जैसे त्योहारों से इसका गहरा संबंध है।”
तुलसी तीन प्रकार के होते हैं
1.राम तुलसी
2.श्याम तुलसी
3.वन तुलसी
तुलसी के औषधीय गुण –
एंटीऑक्सीडेंट – तुलसी में ऐसे यौगिक होते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं।
रोगाणुरोधी – इसमें जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण होते हैं।
तुलसी सूजन से जुड़ी बीमारियों के इलाज में भी मददगार हो सकती हैं।
श्वसन संबंधी लाभ – इसके यौगिकों के कारण यह श्वसन संबंधी संक्रमणों से लड़ने में मदद करती है और ब्रोंकाइटिस
तुलसी के बीज पाचन संबंधी समस्याओं कब्ज, गैस और एसिडिटी में फायदेमंद होते हैं।
वजन घटाने में मदद करता हैं- ब्लड शुगर को नियंत्रित कर सकते हैं और सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से लड़ने में भी सहायता करते हैं ।
तुलसी के सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
सर्दी जुकाम में ,बुखार में असरदार होता है
मानसिक शांति और तनाव दूर करता है
त्वचा और बालों की समस्या को दूर करता है ।
तुलसी की पत्तियाँ चाय में डालने से स्वाद और स्वास्थ्य दोनों मिलते हैं।
“तुलसी न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि प्रकृति का एक अनमोल उपहार है जो शरीर और मन दोनों को शुद्ध करती है।”




