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National: मारे जाने के डर से सीपीआई, के वरिष्ठ तीन बडे़ नेता 20-20 लाख के इनामी 3 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण…

संवाददाता – दीपक गोटा

 

 

मारे जाने के डर से सीपीआई, के वरिष्ठ तीन बडे़ नेताओं, 20-20 लाख के इनामी 3 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण…

 

 

 

तीन वरिष्ठ सीपीआई लीडर्स ने तेलंगाना में आत्मसमर्पण किया है। इस आत्मसमर्पण को बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ पुलिस जवानों की कड़ी रणनीति की सफलता माना जा रहा है

 

 

सरेंडर करने वाले दो पुरूष नक्सली नेता, वेंकटैया और वेंकटराजू, 35-35 साल से ज़्यादा समय से भूमिगत थे, संगठनों में जबकि एक महिला नक्सली, थोडेम गंगा ने आंदोलन में 21 साल से ज़्यादा का समय बिताया है

 

 

बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ पुलिस जवानों की कड़ी रणनीति अब असर दिखाने लगी है। क्षेत्र में सक्रिय बड़े नक्सली नेताओं एवं कैडर के बीच डर और मारे जाने की आशंका बढ़ गई है।

 

हाल ही में एक शीर्ष नक्सली लीडर ने आत्मसमर्पण किया था। अब तीन और सीपीआई के वरिष्ठ नक्सली नेताओं ने बस्तर छोड़ तेलंगाना डीजीपी के सामने अपने आप को आत्मसमर्पण किया है

 

तेलंगाना पुलिस ने इस मामले में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी है कि बस्तर में वर्षों से नक्सली घटनाओं में सक्रिय रहे तीन शीर्ष माओवादी ने अब तेलंगाना में आकर आत्मसमर्पण किया

 

आत्मसमर्पण करने वालों में सीपीआई राज्य समिति के वरिष्ठ नेता कुकाटी वेंकट उर्फ विकास, मोगिलिचर्ला राजू ,उर्फ चंदू और टोंडम गंगव्वा उर्फ सोनी शामिल हैं,इनमें से गंगव्वा उर्फ सोनी किस्टाराम एरिया के कमेटी की डीवीसीएम रैंक की महिला नक्सली थी,

 

तेलंगाना में शुक्रवार को तीन बड़े नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया।

 

 

आत्मसमर्पण करने वाले इन तीनों माओवादी नक्सलियों के सिर पर 20-20 लाख रूपए का इनाम रखा था. इन तीनों में दो तीन दशक से अधिक समय से अंडरग्राउंड थे. जबकि तीसरी महिला नक्सली 21 साल से भूमिगत जीवन जी रही थी,

 

ये तीनों प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की राज्य समिति के वरिष्ठ सदस्य है, शुक्रवार को हैदराबाद के तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) बी, शिवधर रेड्डी के सामने इन्होंने सरेंडर किया,

इन तीनों का सरेंडर राज्य की माओवादी-विरोधी रणनीति में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है. आत्मसमर्पण करने वाले नेताओं में सिद्दीपेट जिले के मूल निवासी कुंकटी वेंकटैया उर्फ रमेश उर्फ विकास (52) शामिल हैं, जो 36 साल से अंडरग्राउंड था.

 

डीजीपी ने बताया कि सीपीआई (माओवादी) पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल,उर्फ सोनू ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी कर स्वीकार किया है कि पार्टी अपनी राह से भटक गई है,

 

डीजीपी ने पोलित ब्यूरो सदस्य के बयान को “महत्वपूर्ण” बताया है, क्योंकि वह संभवत माओवादी पार्टी का नेतृत्व कर सकते थे, और कहा है कि यह चरमपंथी समूह में बदली हुई सोच को भी दर्शाता है

 

 

डीजीपी रेड्डी ने कहा, माओवादी नेतृत्व मुख्यत तेलंगाना के लोगों के हाथों में है, और केंद्रीय समिति के 12 में से 8 सदस्य राज्य के मूल निवासी हैं. तेलंगाना माओवादियों की जन्मभूमि तो है, लेकिन अब उनकी कर्मभूमि समाप्त होते दिख रही है,

 

डीजीपी ने आगे बताया कि 2025 में अभी तक 412 माओवादियों ने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है,

उन्होंने बताया कि इनमें से लगभग 90% आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ के माओवादियों ने अब तक की हैं, जो दर्शाता है कि तेलंगाना नीति का राज्य की सीमाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है,

 

 

दो पुरूष नक्सली नेता, वेंकटैया एवं वेंकटराजू, 35-35 सालों से ज़्यादा समय से भूमिगत थे, जबकि एक महिला माओवादी, थोडेम गंगा ने आंदोलन में 21 साल से ज़्यादा समय बिताया. उनके आत्मसमर्पण के कारणों में बिगड़ती सेहत और वैचारिक मतभेद शामिल हैं

 

डीजीपी शिवधर रेड्डी ने उम्मीद जताई कि यह रूझान जारी रहेगा, उन्होंने विश्वास के साथ कहा है, माओवादी उग्रवाद निश्चित रूप से कम होते जा रहा है, हमें निकट भविष्य में और अधिक आत्मसमर्पण की उम्मीद है, और तेलंगाना में माओवादियों के फिर से संगठित होने की कोई संभावना नहीं दिखाई दे रही है।

 

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के हथियार छोड़ समाज की मुख्य धारा में लौटने का सिलसिला लगता जारी है आलम यही रहा तो वह दिन दूर नहीं जब वाकई में डेडलाइन 31 मार्च 2026 तक भारत नक्सलवाद मुक्त हो जाएगी नक्सलियों ने ज्यादा तर सरेंडर छत्तीसगढ़ के बीजापुर में किया है।।

 

बिजापुर में नक्सलियों के (DKSZC) समेत राज्य समिति के तीन सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया है इनमें माओवादी संगठन की राज्य समिति के तीन बड़े सदस्य कुंकती वैकट्या उर्फ रमेश उर्फ विकास, मोमिलिडला वेकटराज उर्फ राजू उर्फ चंदू और तोडेम गंगा सोनू उर्फ सोनी शामिल थे, इन सबने सीपीआई (माओवादी) पार्टी छोड़कर तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर ,तीनों ने दशकों तक नक्सल संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई रहे थे।

 

 

नीति के प्रमुख प्रावधान

1. सरकारी सेवा में नियुक्ति यदि कोई आत्मसमर्पित नक्सली नक्सलियों के खिलाफ अभियान में पुलिस को विशेष सहयोग देता है और इसके कारण उसकी जान या संपत्ति को खतरा हो तो उसे पुलिस विभाग में आरक्षक या समकक्ष पद पर नियुक्त कर किया जाएगा अन्य विभागों में नियुक्ति के लिए जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा आवश्यक होगी

 

शिक्षा और छात्रावास सुविधाएं – आत्मसमर्पित

 

नक्सलियों और उनके बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक निःशुल्क और प्राथमिकता आधारित शिक्षा शासकीय एवं आवासीय विद्यालयों में दी जाएगी. यदि वे निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ना चाहते हो, तो उन्हें शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आरक्षित सीट में प्रवेश और अनुदान राशि प्रदान भी की जाएगी. छात्रावास की सुविधा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा प्रदान किया जाएगा।

 

वित्तीय सहायता और भूमि प्रावधान: 5 लाख रूपये या उससे अधिक के इनामी नक्सली के आत्मसमर्पण पर, पात्रता रखने पर नक्सली या उसके परिवार के किसी एक सदस्य को शासकीय सेवा में नियुक्ति कि जाएगी. यदि सेवा नहीं दी जा सकती, तो ऐसे आत्मसमर्पित को एकमुश्त 10 लाख रूपये की राशि सावधि जमा के रूप में दिया जाएगा, यह राशि 3 वर्षों के अच्छे आचरण के बाद एकमुश्त हस्तांतरित…..

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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