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Chhattisgarh: बस्तर की सांस्कृतिक एकता, न्याय परंपरा और जनसंवाद की अमूल्य धरोहर है मूरिया दरबार …..

बस्तर की सांस्कृतिक एकता, न्याय परंपरा और जनसंवाद की अमूल्य धरोहर है मूरिया दरबार …..

 

 

बस्तर दशहरे की अद्वितीय परंपरा में मुरिया दरबार का विशेष महत्व है यह केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज और शासन के बीच संवाद का प्राचीन मंच है माध्यम है।

माँ दंतेश्वरी की छत्रछाया में होने वाला यह दरबार, बस्तर की जनजातीय संस्कृति और लोक-गौरव का जीवंत प्रतीक है।

 

दूरस्थ गाँवों से आए जनजातीय प्रतिनिधि, पुजारी और परगनों के मुखिया इकट्ठा होकर सबसे पहले राजा के सामने अपनी बात रखते थे लेकिन अब राजा के साथ-साथ शासन-प्रशासन के समक्ष भी ये अपनी बात रखते हैं ।

 

 

 

इस दरबार में समाज के विषय रखे जाते हैं परंपराएँ साझा की जाती हैं और समस्याओं के समाधान हेतु कार्य भी किए जाते हैं ।

 

मोरिया दरबार इस बात का प्रमाण है कि लोकतांत्रिक भारत स्वतंत्रता के बाद ही नहीं बल्कि ये राजतंत्र के समय से बस्तर की संस्कृति और परंपराओं में मौजूद था ।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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