सड़क निर्माण में ग्रामीणों का श्रमदान बिना सरकारी सहायता के बना रहे सड़क सारी सड़के बाढ़ में बह गई और पुल पुलिया अधूरे टूटू पड़े है
26 अगस्त को बस्तर में आई बाढ़ ने यह के सड़को को निगल लिया था बाढ़ का पानी बह के ले गई थी सड़को जिसके बाद प्रशासन के तरफ से ग्रामीण की सुविधा के लिए किसी भी प्रकार से सड़क निर्माण नहीं किया गया है यह की सड़के बह गई और तो और क्षतिग्रस्त पुल-पुलिया को निर्माण भी अधूरा है । जिसके कारण यह के ग्रामीण का काफी परेशानी होती है
बाढ़ ने काफी तबाही मचाई थी जनधन।की हानि भी हुई थी
इस घटना को लगभग डेढ़ महीने बीत चुके हैं लेकिन बाढ़ का दर्द अभी भी बस्तर में बना हुआ है. बाढ़ की वजह से टूटे पूल-पुलिया व सड़कों को सुधार करना तो दूर की बात है कोई जायजा तक लेने नहीं आया अब तक ।
अब इससे परेशान ग्रामीणों ने खुद श्रमदान कर यह की सड़को का निर्माण करने का निर्णय लिया है और अपना अपना श्रमदान दे रहे हैं।
दो ग्राम पंचायत सालेपाल और बारूपाटा के सैकड़ों लोग सुबह 6 बजे से ही रापा, तगाड़ी, गैती और ट्रैक्टर लेकर सड़क निर्माण में जुट जाते हैं ।
ग्रामीणों ने संकल्प लिया है कि सड़क पूरा बनाकर ही घर लौटेंगे। सड़क निर्माण में करीब 5 ट्रैक्टर लगातार काम पर लगे हुए हैं और बच्चे-बुजुर्ग भी इस अभियान का हिस्सा बने हैं। पंचायत के लगभग हर घर से लोग श्रमदान में शामिल हुए
पुल के टूटने से एक ग्रामीण की जान भी चली गई
पुल बना रहे ग्रामीणों ने कहना है को जनपद सहित सभी जगह सड़क टूट चुकी है तथा इस टूटे हुए पूल में काफी लोग गिर भी गए कुछ को चोटे भी आई एक युवक की मौत भी हुई. थी इन सब खतरों को देखते हुए हम खुद अब इसे बना रहे हैं ।
बारूपाटा सरपंच मनीराम बेंजाम ने बताया कि बस्तर का प्रसिद्ध हिल स्टेशन मिचनार पर्यटन स्थल पास में ही है.
इस रास्ते से भी कई लोग आते जाते थे लेकिन पुल टूटने से लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है
1 किलोमीटर का रास्ता अब घूमकर 12 किलोमीटर हो गया है। दूसरे पारा के लोगों को भी राशन के लिए 12 किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा है अधिकारियों से मांग करने पर उन्होंने कहा कि, प्रस्ताव बनेगा फिर भेजा जाएगा टाइम भी लग सकता है।
इसलिए ग्रामीणों को खुद से फैसला लेना पड़ा- बारूपाटा सरपंच मनीराम बेंजाम
सड़कें बह भी गईं, पुल-पुलिया भी टूट गए, कई लोग बेघर हो गए, बस्तर के ग्रामीणों का दर्द अब भी बरकरार है…




