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Chhattisgarh: लगातार 9 दिनों तक 4 फीट के गड्ढे में तपस्या और मौन व्रत का होगा पालन बस्तर दशहरे में निभाई जाने वाली अनोखी परंपरा जोगी बिठाई रस्म 

लगातार 9 दिनों तक 4 फीट के गड्ढे में तपस्या और मौन व्रत का होगा पालन बस्तर दशहरे में निभाई जाने वाली अनोखी परंपरा जोगी बिठाई रस्म ।

 

 

75 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे में 14 से अधिक अद्वितीय और अनोखी रस्में निभाई जाती हैं।इन्ही रस्मों में एक महत्वपूर्ण जोगी बिठाई रस्म है इस रस्म में जोगी के रूप में एक युवा का चुनाव होता है जी की हल्बा जनजाति का होता है जोगी 9 दिनों तक दंतेश्वरी मंदिर के प्रांगण में बने सिरहसार भवन में जमीन के करीब 4 फीट नीचे पालथी लगाकर बिठाते हैं ।

 

बस्तर दशहरे में निभाई गई जोगी बिठाई रस्मः दशहरा पर्व निर्विघ्न रूप से सम्पन्न हो सके इसके लिए यहां जोगी यहां बैठकर 9 दिनों तक कठिन तप करते हैं. यह रस्म मंगलवार की शाम सिरहसार भवन में विधि विधान से निभाई गई. इस रस्म को निभाने के लिए दशहरा समिति के सदस्य, मांझी चालकी, जोगी परिवार व पुजारी मौजूद रहे. मुंडाबाजा और बैंड बाजा की धुन के बाद पूजा अर्चना करके जोगी ने अपना स्थान ग्रहण किया है. तप साधना के दौरान जोगी 9 दिनों तक उपवास भी करते हैं. यह रस्म पाठजात्रा, डेरी गड़ाई और काछनगादी रस्म के बाद निभाई गई.

 

600 सालों से चली आ रही परंपरा –

जोगी बिठाई रस्म यह रस्म लगभग 600 सालों से चली आ रही है। इस साल भी जोगी की भूमिका आमाबाल गांव के रघुनाथ नाग निभा रहे हैं रघुनाथ बताते हैं कि वो ये परंपरा पिछले पांच सालों से निभाते चले आ रहे हैं।उनसे पहले उनके भाई ये परंपरा निभाते थे रस्म की शुरुआत मावली मंदिर में पुजारी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन करके किया गया इसके बाद देवी की पूजा-अर्चना और वहाँ रखी तलवार की विधिवत पूजा हुई . पूजा पश्चात यही तलवार लेकर जोगी सिरासार भवन पहुंचे और प्रार्थना के पश्चात गड्ढे में बैठकर तपस्या का संकल्प लिया।

जोगी मिठाई रसम बस्तर के दशहरे की तरह ही विश्व प्रसिद्ध है और इसलिए इडली के दो युवा उसे पर अपनी डॉक्यूमेंट्री बनाने और देखने आए हैं।

 

 

 

रियासतकाल में राजा इस रस्म की निभाते थे उनके बाद इस रस्म को निभाने की जिम्मेदारी हल्बा जाति को दे दी गई उस समय से लगातार जोगी के रूप में उनके पूर्वज बैठते आ रहे हैं. आज भी विधि विधान के साथ यहां परंपरा निभाई गई है. मावली देवी की तलवार लेकर बैठते हैं। इस रस्म को पिछले 5 सालों से निभा रहा हूं।मुझसे पहले मेरे बड़े भाई इस परंपरा को निभाते थे।उनकी मौत के बाद मुझे ये बड़ी धार्मिक जिम्मेदारी मिली है- जोगी (रघुनाथ नाग) ।

 

 

जोगी बिठाई रस्म

 

बस्तर दशहरा का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसमें एक युवक हल्बा जनजाति के प्रतिनिधि के रूप में 9 दिनों तक निर्जल उपवास रखकर सिरासर भवन में योग मुद्रा में बैठता है. इसका उद्देश्य दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण और निर्बाध रूप से संपन्न कराना है, और यह एक पौराणिक मान्यता से जुड़ा है।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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