header ads
अधिकारअबूझमाड़नारायणपुर

Chhattisgarh: नारायणपुर : में देवगांव जलाशय योजना का विरोध, डुबान क्षेत्र के गांव वाले पहुंचे कलेक्ट्रेट 

नारायणपुर : में देवगांव जलाशय योजना का विरोध, डुबान क्षेत्र के गांव वाले पहुंचे कलेक्ट्रेट

 

 

गांव वालों का कहना है कि उनको जमीन के बदले मुआवजा नहीं चाहिए अगर जमीन रहेगी तो उनकी कई पुश्तों के काम आएगी।

 

नारायणपुरः जिला प्रशासन का दावा है कि देवगांव जलाशय के बनने से किसानों का जीवन पहले से और बेहतर हो जाएगा. लेकिन जिन किसानों कि जमीन इस योजना से प्रभावित हो सकती हैं उन किसानों का दावा है कि एक बार जमीन हाथ से निकल गई तो उनके पास कुछ नहीं बचेगा. देवगांव जलाशय के विरोध में किसान अब लामबंद होने लगे हैं. सोमवार को डुबान क्षेत्र के दो गांवों के सैकड़ों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और साफ साफ कह दिया कि वे किसी भी स्थिति में अपनी पुश्तैनी जमीन जलाशय के लिए नहीं देंगे

 

देवगांव जलाशय योजना का विरोधः ग्रामीणों का कहना है कि पीढ़ियों से वे उसी जमीन पर खेती किसानी कर जीवन यापन करते आ रहे हैं ।लेकिन डुबान क्षेत्र के अधिकांश कृषकों के पास जमीन के दस्तावेज़ नहीं हैं, जबकि चंद किसानों के पास ही दस्तावेज मौजूद हैं. ऐसे में जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं, वे मुआवज़े से वंचित रह जाएंगे. ग्रामीणों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि जमीन केवल आजीविका ही नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही विरासत है, जिसे किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे ।डुबान क्षेत्र के ग्रामीण पहुंचे कलेक्ट्रेटः वहीं प्रशासन का कहना है कि यदि यह जलाशय बनता है तो जिले में भू-जल स्तर बढ़ेगा, बड़े पैमाने पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और नारायणपुर शहर की पेयजल व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी. साथ ही यह जलाशय जिले को पर्यटन मानचित्र पर भी एक नई पहचान देगा।

 

कलेक्टर ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और आगे की कार्रवाई के लिए एसडीएम से मिलने का सुझाव दिया. नारायणपुर जिला पांचवीं अनुसूची क्षेत्र है, इसलिए ग्राम सभा के निर्णय प्रशासनिक फैसलों पर प्रत्यक्ष असर डालते हैं. यही वजह है कि जिला प्रशासन लगातार प्रभावित ग्राम सभाओं में समझाइश का प्रयास कर रहा है.

 

हम अपने डुबान क्षेत्र को नहीं देना चाहते हैं. हमारे परिवार और हमारी रोजी रोटी के बारे में भी सरकार को विचार करना चाहिए. जब बनना था तब बनाया गया नहीं. मुआवजा से हमारा परिवार नहीं चलेगा. जमीन तो पीढ़ी दर पीढ़ी चलेगी. जो भी लड़ाई होगी हम वहां तक लड़ाई लड़ेंगे. किसी भी कीमत पर हम अपनी जमीन नहीं देंगे. जमीन एक बार हमारी चली गई तो वापस पूरी जिंदगी नहीं।

मोतीराम, प्रभावित किसान

हमारे पास जमीन, बाड़ी नहीं है. ग्राम सभा की बैठक अब बार बार ले रहे हैं. कुल पांच गांव के लोग प्रभावित हो रहे हैं. ग्राम सभा में आए लोग बोले की जलाशय बनेगा तो आपको लाभ होगा. हम नहीं चाहते हैं कि यहां पर जलाशय बनें. हमारी खेती बाड़ी चलेगी. मवेशियों को चराने तक की जगह नहीं बचेगी. हमारा उद्देश्य है कि यहां पर जो सि वो बनी रहेगीः फुलेश्वर साहू, प्रभावित किसानपेसा एक्ट होने के चलते हम ग्राम सभा के जरिए बातचीत कर रहे हैं. दावा आपत्ति होने के बाद हम अधिसूचना जारी करेंगे. पूर्व में जो भू-अर्जन की कार्रवाई की गई थी वो नहीं हो पाया है. अभी अधिग्रहण की कार्रवाई पूर्ण होगी तब नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी: वीरेंद्र बहादुर, पंचभाई, अपर कलेक्टर

 

गांव वाले चाहते हैं स्थायी समाधानः देवगांव जलाशय योजना से एक ओर जहां सिंचाई और पेयजल संकट का स्थायी समाधान संभव है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की पुश्तैनी ज़मीन और आजीविका दांव पर है. अब देखना होगा कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच इस टकराव का हल कैसे निकलता है.।।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!