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देसी गाय की सबसे नई प्रजाति ‘नारी’ जिसके घी को सर्वोत्तम माना जाता हैं।

देसी गाय की सबसे नई प्रजाति ‘नारी’ जिसके घी को सर्वोत्तम माना जाता हैं।

दंडकारण्य_सेहत_संदेश

नारी गाय की उत्पत्ति राजस्थान से हुई है।देसी प्रजाति की गायों के संरक्षण के लिए एक बड़े प्रयास के तहत उत्तर गुजरात और दक्षिण राजस्थान के कुछ हिस्सों में गायों की इस नई प्रजाति की पहचान की गई है।
नारी गायों की प्रजाति राजस्थान के सिरोही और पाली जिलों के अलावा राज्य के साबरकांठा, बनासकांठा औऱ मनिसनगर जिलों में पाईं जाती है. हर साल 20 से 25 हजार नारी गाए राजस्थान से गुजरात चरने के लिए आती है. इस गाय की पहचान खास तरह के सफेद रंग से की जा सकती है.।
गाय का घी सबसे उतम माना जाता है लेकिन बात जब गायों की दर्जनों देसी प्रजातियों मैं किसका घी उत्तम माना जाए ? तो वहां साहीवाल, राठी, गीर जैसी उत्तम नस्लों को पीछे छोड़ते हुए मध्यम आकार की सफेद सफेद रंग की देसी गाय की अनोखी नस्ल नारी बाजी मार लेती है।

पर्वतराज हिमालय से भी प्राचीन अरावली पर्वतमाला का अर्ध शुष्क क्षेत्र इस गाय बहुत पसंद आता है। यह गोवंश अरावली के वासियों के लिए एक लाइफ लाइन है। भयंकर गर्मी सूखे तिनके चबाकर यह 7 से 15 लीटर दूध देती है। इस क्षमता से और अधिक दूध दे सकती है ।

इस नस्ल का नामकरण इसके भौगोलिक विचरण क्षेत्र के आधार पर किया गया है। अरावली पर्वत की चोटियों को स्थानीय भाषा में नार कहा जाता है। स्वभाव से यह घुमक्कड़ प्रकृति की होती है। अरावली की कोख में जनक जन्म लेने वाले असंख्य योद्धाओं सूरमा ने इसके दिव्य घी का पान किया है।

अरावली पर्वतमाला कि मध्यम ऊंचे क्षेत्रों में यह पाई जाती है तो इसे नारी कहा जाता है। इसे सिरोही नस्ल भी कहा जाता है। इस देसी गाय का बछड़ा पथरीली भूमि पर खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है।

नारी नस्ल के गोवंश के घुमावदार त्रिशूलआकार सिंग ही इसकी विशेष पहचान है। लोग इसके सिंगो को देख कर अनाहक भयभीत होते हैं स्वभाव से बहुत शांत होती है।

जनवरी 2020 में ही National Bureau of animal genetic resource Karnal हरियाणा में इसे भारतीय देशी गोवंश की स्वतंत्र नस्ल के तौर पर रजिस्टर्ड किया है।

@दंडकारण्य_दर्पण

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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