
छत्तीसगढ़ में अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप, 50 से अधिक अधिकारियों के खिलाफ जांच जारी
छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच चल रही है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक राज्य में 50 से अधिक आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों पर विभिन्न घोटालों से जुड़े आरोप लगे हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
इन मामलों की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा की जा रही है। जांच एजेंसियों ने इन मामलों में अपराध पंजीबद्ध कर लिए हैं और कई मामलों में आगे की कार्रवाई जारी है।
किन मामलों से जुड़ा है मामला
जिन घोटालों में अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें शराब घोटाला, जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), कोयला लेवी, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामले और धान लेवी जैसे मुद्दे शामिल हैं। इनमें से अधिकांश मामले पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से जुड़े बताए जा रहे हैं।
कितने अधिकारी जांच के दायरे में
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 29 आईएएस, 6 आईपीएस और 15 आईएफएस अधिकारी इन जांचों के दायरे में हैं। इनमें से कुछ अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं, जबकि कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वहीं कई अधिकारी अभी भी सेवा में हैं या प्रशासनिक मुख्यधारा से बाहर हैं।
जांच के लिए अनुमति क्यों जरूरी
भारतीय प्रशासनिक सेवा और अन्य अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में जांच के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी होती है। इसी के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 (ए) के तहत 2023 से 2024 के बीच इन मामलों में जांच की अनुमति दी है।
कुछ अधिकारियों पर कई मामले दर्ज
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ अधिकारियों के खिलाफ एक से अधिक मामले दर्ज हैं। उदाहरण के तौर पर अनिल टुटेजा के खिलाफ सात मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि रानू साहू, इफ्फत आरा और निरंजन दास के खिलाफ दो-दो मामले दर्ज हैं।
आगे की स्थिति
कुछ मामलों में जांच एजेंसियां विशेष अदालतों में चालान पेश कर चुकी हैं, जबकि अन्य मामलों में जांच अभी जारी है। आने वाले समय में इन मामलों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।




