
अबूझमाड़ तक पहुंचेगी स्वास्थ्य सेवा, 19 अप्रैल को नारायणपुर में लगेगा मेगा हेल्थ कैंप, तैयारी पर प्रशासन सख्त
नारायणपुर। सुदूर और दुर्गम क्षेत्र अबूझमाड़ तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में जिला प्रशासन एक बार फिर बड़ा कदम उठाने जा रहा है। 19 अप्रैल 2026 को नारायणपुर के बालक हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में निःशुल्क महा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा ग्रामीणों को जांच, परामर्श और उपचार की सुविधा दी जाएगी। इस शिविर को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला कलेक्टर नम्रता जैन ने शिविर की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी विभागों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विशेष रूप से पंजीयन व्यवस्था, पेयजल, भोजन, छाया, कूलर, बैठने की सुविधा और वालंटियर तैनाती जैसे मूलभूत इंतजाम समय पर सुनिश्चित करने पर जोर दिया। कलेक्टर ने कहा कि यह शिविर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की कमी नहीं रहनी चाहिए।
प्रशासन द्वारा शिविर को सफल बनाने के लिए पूर्व तैयारी के तहत गांव-गांव में स्वास्थ्य जांच अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से गंभीर रूप से बीमार मरीजों की पहचान कर उन्हें शिविर तक लाने की योजना बनाई गई है। अधिकारियों का मानना है कि इससे अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों को लाभ मिल सकेगा और दूरदराज के लोग भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं से जुड़ पाएंगे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ टी आर कुंवर के अनुसार इस शिविर में हड्डी रोग, मेडिसिन, जनरल सर्जरी, ईएनटी, चर्म रोग, स्त्री रोग, शिशु रोग, नेत्र, हृदय और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद रहेंगे। इसके अलावा मरीजों को आवश्यक दवाइयां भी निःशुल्क प्रदान की जाएंगी। शिविर में ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया जाएगा और आयुष पद्धति के तहत भी परामर्श दिया जाएगा, जिससे लोगों को वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी मिल सके।
नारायणपुर जैसे आदिवासी बहुल जिले में इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविरों का विशेष महत्व है। यहां के कई गांव आज भी सड़क, संचार और स्वास्थ्य सुविधाओं से पूरी तरह नहीं जुड़े हैं, जिसके कारण लोगों को सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में मेगा हेल्थ कैंप उनके लिए राहत का बड़ा माध्यम बनते हैं।
हालांकि इस तरह के शिविरों को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। कुछ लोग इन आयोजनों को जनसेवा की भावना से जोड़कर देखते हैं, तो वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इन शिविरों के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है और स्थायी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। कई बार यह भी आरोप लगाए जाते हैं कि इन शिविरों में संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं हो पाता और पारदर्शिता की कमी रहती है।
इन सवालों के बीच जिला प्रशासन का कहना है कि इस बार शिविर को पूरी तरह व्यवस्थित और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि हर मरीज का पंजीयन, जांच और उपचार व्यवस्थित ढंग से किया जाएगा और जरूरतमंदों को आगे भी इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मेगा हेल्थ कैंप तब ही सफल माने जाएंगे जब इनके माध्यम से मरीजों को दीर्घकालिक लाभ मिले। केवल एक दिन के इलाज से समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है, इसलिए ऐसे शिविरों के साथ फॉलोअप सिस्टम और स्थानीय स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना भी जरूरी है।
कुल मिलाकर नारायणपुर में आयोजित होने वाला यह महा स्वास्थ्य शिविर एक ओर जहां दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आ रहा है, वहीं दूसरी ओर यह प्रशासन की कार्यशैली और व्यवस्था की परीक्षा भी साबित होगा। अब देखना होगा कि यह पहल वास्तव में जरूरतमंदों तक राहत पहुंचा पाती है या फिर यह भी अन्य आयोजनों की तरह केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाती है।




