Chhattisgarh : हिंदू संगम का कार्यक्रम आयोजित , कार्यक्रम में हिन्दूओं का उमड़ा अभूतपूर्व जनसैलाब …

संवाददाता- दीपक गोटा
हिंदू संगम का कार्यक्रम आयोजित कार्यक्रम में हिन्दूओं का उमड़ा अभूतपूर्व जनसैलाब ….
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर – नगर में आज हिंदू संगम कार्यक्रम आयोजित किया गया- स्थान पुराना बस स्टैंड परिसर में आयोजित हिंदू संगम का दृश्य जनउपस्थिति, अनुशासन और उत्साह से भरा हुआ रहा- सुबह से ही नगर एवं आसपास के ग्रामों से लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा, जिससे पूरा परिसर जनमानस की ऊर्जा और राष्ट्रभावना से गूंज उठा- मातृशक्ति-युवा- विद्यार्थी, संत समाज-विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया
मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-बौद्धिक प्रमुख दीपक विष्पुते जी का पारंपरिक स्वागत किया गया- उनके आगमन पर परिसर जयघोष और राष्ट्रभावना से गुंजायमान हो उठा
इस दौरान अपने संबोधन में दीपक विष्पुते जी ने कहा कि भारत केवल एक राजनीतिक इकाई नहीं-बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक धरोहर से बना हुआ राष्ट्र है। उन्होंने कहा भारत की पहचान इसकी सांस्कृतिक चेतना में है- हमारे उत्सव-परंपराएं, आस्थाएं चाहे भिन्न हों, लेकिन हमारी सोच- मूल्य और जीवन दृष्टि एक है। यही -एकात्म भाव’ हिंदू समाज को एक सूत्र में बांधता है-वहीं आगे उन्होंने कहा कि समाज का संगठन ही उसकी शक्ति है- असंगठित समाज सबसे कमजोर होता है-संगठित समाज ही अपने अधिकारों, सुरक्षा और राष्ट्रहित की रक्षा कर सकता है विश्व के सभी प्रगतिशील राष्ट्र संगठित समाज की वजह से ही आगे बढ़े हैं
राष्ट्र निर्माण की शुरुआत परिवार से
हम अपने परिवारों को मजबूत बनाएं संस्कार, संवाद, प्रेम और जिम्मेदारी को परिवार में जीवित रखें। एक संस्कारित परिवार, संस्कारित समाज और मजबूत राष्ट्र का आधार है
हिंदू समाज विश्व को मानवीय मार्ग दिखाने में सक्षम
हिंदू जीवन दृष्टि किसी पर थोपने वाली नहीं, बल्कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के भाव से दुनिया को मार्ग दिखाने वाली है। भारत आज विश्व में सम्मान इसलिए पा रहा है क्योंकि हमारी सभ्यता शांति, करुणा और समरसता को सर्वोपरि मानती है
युवाओं को राष्ट्र निर्माण का संकल्प
युवाओं को दिशा देते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से ऊपर उठकर उद्देश्यपूर्ण जीवन जिए
सेवा, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक कर्तव्य अपनाएं इतिहास, संस्कृति, विज्ञान और खेल में अपना योगदान बढ़ाएंभारत का भविष्य युवाओं के हाथ में है, और युवा जागृत हुए तो भारत विश्वगुरु बनकर उभरेगा
समाज की समरसता सबसे बड़ी आवश्यकता
उन्होंने कहा जाति-वर्ग भाषा या किसी भी भेदभाव को त्यागकर समाज को एकजुट होना होगा। समरसता केवल नारे से नहीं आती इसके लिए संवेदनशीलता-परस्पर सम्मान और व्यवहारिक सहयोग जरूरी है
सेवा कार्यों को बताया भारत की शक्ति
संकट की घड़ी में समाज की सेवा ही राष्ट्र धर्म है। हजारों स्वयंसेवक बिना पहचान, बिना प्रचार के देशभर में सेवा कार्य कर रहे हैं। यही वास्तविक भारत की पहचान है
मातृशक्ति और संत समाज ने भी रखा अपना प्रभावी विचार
कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग समाज से मातृशक्ति की प्रतिनिधि श्रीमती हंती देवांगन ने महिला शक्ति की भूमिका, संस्कारों की महत्ता और परिवार को समाज की पहली पाठशाला बताते हुए प्रेरक उद्बोधन दिया
वहीं संत समाज के युवा प्रतिनिधि प्रशांत यदु ने आध्यात्मिक चेतना, समरसता और राष्ट्रधर्म पर गहन विचार रखते हुए कहा कि आध्यात्मिक रूप से जागृत समाज ही राष्ट्र की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है
प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम स्थल पर पंच परिवर्तन एवं संघ साहित्य की बिक्री सह-प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने रुचि दिखाई- प्रदर्शनी ने युवाओं और विद्यार्थियों को संघ के विचार, इतिहास और समाज सेवा की गतिविधियों से रूबरू कराया
कार्यक्रम का सफल संचालन आयोजन समिति के संरक्षक नारायण साहु ने किया
अंत में आयोजन समिति के संयोजक गुलाब बघेल ने सभी अतिथियों, नागरिकों एवं स्वयंसेवकों का हृदय से आभार व्यक्त किया और कहा कि यह जनभागीदारी दर्शाती है कि नारायणपुर सांस्कृतिक जागरण की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है
राष्ट्र की उन्नति समाज की एकता और संस्कृति की चेतना से ही संभव…..





