header ads
टैकनोलजीराष्ट्रीय

National – आधुनिक तकनीकों के गोला-बारुद से अब दहलेगा पाकिस्तान-बिहार में कट्टा युग समाप्त अब बनेगें 105mm,130mm तोप-गोले  

संवाददाता- दीपक गोटा

आधुनिक तकनीकों के गोला-बारुद से अब दहलेगा पाकिस्तान-बिहार में कट्टा युग समाप्त अब बनेगें 105mm,130mm तोप-गोले  

 

बिहार के विधानसभा चुनाव 2025 में एक शब्द काफी चलन में था जहाँ पीएम नरेंद्र मोदी अपनी सभी जनसभाओं में बार-बार इस शब्द का जिक्र करते रहते थे की जहाँ कट्टा और देशी बंदूकें एक समय बिहार की पहचान मानी जाती थी वहां हालांकि राज्य में नीतीश कुमार और बीजेपी की सरकार आने के बाद इसपर काफी हद तक लगाम भी लगा- बिहार में अब कट्टा युग समाप्त हो गया है राज्य देसी बंदूकों की जगह मिसाइल और तोप बनाने के लिए तैयार है- अब बिहार के गोला-बारूद से अब दुश्मन देश पाकिस्तान दहलेगा

 

नीतीश सरकार ने 25 नवंबर को अपनी पहली कैबिनेट बैठक में डिफेंस कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनाने के लिए कमेटी गठित करने की मंजूरी दे दी है और चलिए जानते हैं कि डिफेंस कॉरिडोर सेमीकंडक्टर से बिहारियों की तस्वीर और तकदीर ऐसे बदलेगी

 

बंपर रोज़गार के अवसर और लाखों नई कौशल विकास -आधुनिक तकनीक का प्रवेश औद्योगिक विकास -अगले पाँच वर्षों में कुल 1 करोड़ नौकरियाँ पैदा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसमें इन परियोजनाओं का बड़ा योगदान होगा जिनमें 5-7 लाख सीधी नौकरियां मिलेंगी यह पूर्वी भारत को टेक्नोलॉजी हब बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है

 

बिहार डिफेंस कॉरिडोर प्लान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा की- इस रक्षा गलियारे में निम्नलिखित वस्तुओं का निर्माण किया जाएगा

तोप के गोले -AK-203 राइफलें ‘ड्रोन ,मिसाइल बुलेटप्रूफ जैकेट -ग्रेनेड अन्य सुरक्षात्मक उपकरण

 

इस पहल का मुख्य उद्देश्य बिहार में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है जिससे पलायन की समस्या कम होगी

यह केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी पूरी करेगा

बिहार सरकार के उद्योग विभाग ने भी इस संबंध में केंद्रीय रक्षा मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा है जिसमें मुंगेर- कैमूर- बांका- जमुई और अरवल सहित 5 जिलों में आयुध कारखानों (ऑर्डिनेंस फैक्ट्री) के लिए जमीन का सुझाव दी गई है

 

जिसमें डिफेंस कॉरिडोर एक रूट होगा और कई शहर शामिल होंगे- इन शहरों में सेना के काम में आने वाले सामान के निर्माण के लिए इंडस्ट्री लगाई जाएगी जिसमें कई कंपनियां हिस्सा लेंगी और इस कॉरिडोर में पब्लिक सेक्टर मने सरकारी- प्राइवेट सेक्टर और MSAE कंपनियां हिस्सा लेंगे

इस कॉरिडोर में वो सभी औद्योगिक संस्थान भी भाग लेंगे जो सेना के सामान बनाते हैं

कॉरिडोर बनने के बाद यहां हथियारों से लेकर वर्दी तक बनाए जाएंगे। इस कॉरिडोर के तहत लगी फैक्ट्रियों में हल्के एयरक्राफ्ट “तोप- AK-47, कार्बाइन- पिस्टल- ड्रोन और स्नाइपर राइफल जैसे हथियार बनेंगे

 

मुख्य परियोजनाएं और सुविधाएं जो बनेंगी

विस्फोटक (Explosives) उत्पादन इकाइयां -जिला स्तरीय फैक्ट्रियां और औद्योगिक पार्क-सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क एवं “ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (Global Capability Centres) -मेगा टेक सिटी और फिनटेक सिटी भी शामिलह है

 

बिहार कॉरिडोर को पूर्वी भारत का नया टेक्नोलॉजी हब बनाने का लक्ष्य रखता है- जिसमें अगले 5 वर्षों में 1 करोड़ नौकरियां पैदा करने की योजना है। केवल डिफेंस कॉरिडोर से ही 5-7 लाख सीधी नौकरियां और 20-25 लाख अप्रत्यक्ष नौकरियां आएंगी- इंजीनियर टेक्नीशियन- मजदूर सिक्योरिटी गार्ड- ड्राइवर सबको काम मिलेगी

 

पहले चरण में इध 5-8 जिलों में बड़े प्लांट बनेंगे उसके बाद में पूरे 38 जिलों में फैक्ट्रियां आएंगी

राजगीर (नालंदा) – पहले से स्वीकृत बहुत बड़ी ऑर्डनेंस फैक्ट्री (155mm के बड़े-बड़े गोले बनेंगे)

गया – विस्फोटक (बारूद) बनाने का बहुत बड़ा प्लांट

औरंगाबाद – हथियार और गोला-बारूद की फैक्ट्री

रोहतास (सासाराम-डेहरी ऑन सोन) -हथियारों का बहुत बड़ा हब

बक्सर – नया ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड का प्लांट

भोजपुर (आरा) – छोटे हथियार और पार्ट्स

वैशाली- मुजफ्फरपुर- सीतामढ़ी, शिवहर -ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स

पटना के पास बिहटा नया एयरपोर्ट और डिफेंस टाउनशिप

155mm तोप के गोले (नालंदा-राजगीर में)

105mm, 130mm तोप के गोले

AK-203 राइफल (कलाश्निकोव की नई वाली)

इंसास राइफल और कार्बाइन

बुलेट प्रूफ जैकेट, हेलमेट

हैंड ग्रेनेड, रॉकेट लॉन्चर के पार्ट्स

 

TNT-RDX जैसे बड़े विस्फोटक (गया और औरंगाबाद में) रॉकेट और मिसाइल में भरने वाला प्रोपेलेंट (ईंधन)

 

एक नया सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट बिहार में ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) और डिजिटल इंडिया (Digital India) पहल को बढ़ावा देगा- और राज्य को वैश्विक चिप निर्माण के मानचित्र पर लाएगा भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है

 

भारत अब केवल चिप्स का उपयोगकर्ता नहीं रहेगा, बल्कि एक निर्माता भी बनेगा

यह पार्क बिहार को ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख वैश्विक चिप निर्माताओं की श्रेणी में लाने का लक्ष्य रखता है ताकि सस्ती इलेक्ट्रॉनिक्स- स्थानीय उत्पादन से चिप्स की लागत कम होने की उम्मीद है और जिससे फोन लैपटॉप और कारों जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद अधिक अफोर्डेबल हो सकते हैं

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!