
धान खरीदी पर प्रशासन की व्यवस्था ढप , धान तैयार है, किसान तैयार हैं… लेकिन व्यवस्था तैयार नहीं है। खरीदी शुरू तो कर दी पर व्यवस्था आधी अधूरी ही रह गई
राज्य में धान खरीदी की तैयारियाँ भले ही प्रशासनिक स्तर पर पूरी बताई जा रही हों परंतु जमीनी हालात बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। खरीदी शुरू होने के ठीक पहले ही समितियों में कर्मचारियों की हड़ताल जारी है, ऑनलाइन टोकन जारी नहीं हो रहा है। किसानों में इस बात को लेकर गंभीर चिंता है कि धान खरीदी सुचारू रूप से प्रारंभ भी हो पाएगी या नहीं।
समितियों में किसान सुबह से पहुंच रहे हैं लेकिन कर्मचारियों की अनुपस्थिति और सूचना के अभाव में निराश लौट रहे हैं। पिछले वर्ष की समस्याओं को देखते हुए इस बार किसान अधिक सतर्क हैं और खरीदी प्रारंभ होने की तारीख को लेकर संशय की स्थिति में है।
धान खरीदी की अव्यवस्थाओं को देखते हुए भारतीय किसान संघ के द्वारा प्रदेश सभी जिलों में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। संगठन की मांग है कि खरीदी प्रारंभ होने से पहले सभी बिंदुओं पर सुनिश्चित व्यवस्था बने ताकि किसान परेशान ना हो।
भारतीय किसान संघ द्वारा जिलों में दिया जा रहा ज्ञापन चार प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित है। तौल में 40 किलो 700 ग्राम से अधिक तौल न हो। सरकार द्वारा समितियों को स्पष्ट किया जाए कि 40 किलो 700 ग्राम बारदाने सहित धान लिया जाए। इस नियम को सभी समितियों मे चस्पा किया जाए।
भूमि के आधार पर टोकन वितरण की व्यवस्था की जाए। जिसमे 2 एकड़ तक किसानो को 2 टोकन, 10 एकड़ को 3 टोकन और 10 एकड़ से ऊपर वाले किसानो को 4 टोकन दिये जाएं।
एग्री स्टैक ने बार बार आ रही समस्या के कारण अभी तक बहुत किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया है उन किसानों के लिए एग्रीस्टेक का पंजीयन 31 जनवरी तक बढ़ाया जाए।
भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी हो और बैंकों में कम राशि न दी जाए। किसानो को धान के बदले दी जाने वाली भुगतान कर लिमिट तय नहीं किया जाना चाहिए।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन मुद्दों का तत्काल समाधान नहीं किया गया तो किसानों को भारी नुकसान होगा और ऐसा होने पर भारतीय किसान संघ उग्र आंदोलन को बाध्य होगा ।
भारती किसान संघ जिलाध्यक्ष निलकंट नाग व जिला मंत्री देवलाल दुग्गा और किसान बंधु ज्ञापन के दौरान प्रमुख रुप से उपस्थिति रहे।




