
संवाददाता- दीपक गोटा
हिड़मा- देवा और एर्रा जैसे खूंखार नक्सली संगठनों की अब खैर नहीं- दो हजार जवानों और 3 जिले के एसपी सहित सर्च ऑपरेशन शुरू
दक्षिण बस्तर के जंगलों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन शुरू किया हैं जो की बीजापुर- सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों की संयुक्त कार्रवाई में 2 हजार जवान शामिल हैं।
यह ऑपरेशन नक्सलियों के शीर्ष लीडर हिड़मा और उसकी बटालियन को घेरने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है- ड्रोन से निगरानी और हेलीकॉप्टर स्टैंडबाय पर रखे गए हैं
करेंगुट्टा मुठभेड़ के बाद इसे साल का दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेशन माना जा रहा है पहले दिन तीन नक्सलियों के मारे जाने की सूचना मिली और तीनों जिलों के एसपी ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं सुरक्षा एजेंसियां मान रही हैं कि हिड़मा- देवा और एर्रा जैसे बड़े लीडर इसी इलाके में छिपे हैं
अब मुस्किल होगा हिड़मा- देवा और एर्रा जैसे खूंखार नक्सलियों के संगठनों को क्यूंकि अब 2 हजार जवान निकले हैं सर्च ऑपरेशन में बड़ी मुडभेड़ का आशंका हैं
माडवी हिड़मा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर 1 का प्रमुख है, जो भाकपा (माओवादी) का सैन्य विंग है। वह माओवादियों की केंद्रीय समिति का सदस्य भी है- जिस पर ₹1 करोड़ का इनाम घोषित है- वह 2010 के ताड़मेटला हमले और 2013 के झीरम घाटी नरसंहार सहित कई घातक हमलों का मास्टरमाइंड था
ऑपरेशन का उद्देश्य- इस बड़े पैमाने के ऑपरेशन का उद्देश्य हिड़मा और उसके सहयोगियों (जैसे देवा और एर्रा) को पकड़ना या मार गिराना है, जो सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं
सुरक्षाबल जिसमें DRG और अन्य केंद्रीय बल शामिल हैं-अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं- वे हिड़मा के संभावित छिपने के स्थानों की पहचान करने के लिए लगभग 125 गांवों की तकनीकी मैपिंग और थर्मल इमेजिंग किया जा रहा है
हिड़मा गुरिल्ला युद्ध में माहिर है और अक्सर सुरक्षा बलों को चकमा देकर भागने में सफल रहा है- इससे पहले भी वह बड़े ऑपरेशनों के दौरान बच निकला था
जनवरी 2025 में हुए इस विशेष ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने हिड़मा को लगभग घेर लिया गया था- पर वह घने जंगलों का फायदा उठाकर भाग निकला- हालांकि हाल के महीनों में कई अन्य नक्सल विरोधी अभियानों में कई शीर्ष नक्सली मारे गए हैं या पकड़े गए हैं जिससे हिड़मा सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है
सुरक्षा बल लगातार हिड़मा की तलाश में हैं और उसकी संभावित लोकेशन (अबूझमाड़ के जंगल और सीमावर्ती इलाके) पर तकनीकी निगरानी और तलाशी अभियान जारी है
माओवादी गतिविधियों से प्रभावित अबूझमाड़ के ग्राम कोंगे में नारायणपुर पुलिस और बीएसएफ 129वीं बटालियन ने नया सुरक्षा व जन-सुविधा कैंप का स्थापित किया और माड़ बचाव अभियान के तहत खुला 13वां कैंप है कैंप माओवाद उन्मूलन और ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है
सोनपुर थाना से 30 किमी अंदर स्थित है-इस कार्यक्रम में आईजी पी. सुन्दराज, डीआईजी अमित कांबले- एसपी राबिनसन गुड़िया सहित बीएसएफ व डीआरजी के अधिकारी उपस्थित थे- स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि अब वे खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और कई नक्सल समर्थक आत्मसमर्पण की इच्छा जता रहे हैं
यह अभियान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा देश को 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त करने के लक्ष्य के तहत चलाया जा रहा है- जिसमें सुरक्षा बल अब मानसून के दौरान भी अपने अभियान जारी रखे हुए हैं।
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