दंडकारण्य कृषि संदेश : किसानों के लिए फसल की नई राह ! खेती के साथ मछली पालन बढ़ाएगा घर की आमदनी ,जाने मत्स्य पालन के व्यापार की पूर्ण जानकारी

किसानों के लिए फसल की नई राह ! खेती के साथ मछली पालन बढ़ाएगा घर की आमदनी ,जाने मत्स्य पालन के व्यापार की पूर्ण जानकारी
संवाददाता- दीपक गोटा
1.मछली पालन परिचय (Machhali Palan)
भारत सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ-साथ मछली पालन जैसे छोटे उद्योगों को बढ़ावा दे रही है जिसके लिए सब्सिडी भी दी जाती है मछली पालन किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है क्योंकि यह खेती के अलावा आय का एक अतिरिक्त और लाभकारी स्रोत प्रदान करता है और
सरकार की विभिन्न योजनाओं- जैसे कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना- और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) का उद्देश्य किसानों को वित्तीय सहायता और अन्य संसाधन प्रदान करना- ताकि वे अपनी आय बढ़ा सकें
आय वृद्धि – मछली पालन एक अतिरिक्त आय का स्रोत प्रदान करता है जो कि किसानों को खेती के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनाने में मदद करता
सरकारी सब्सिडी – छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार सब्सिडी प्रदान करती और जिससे किसानों को मछली पालन जैसे व्यवसाय शुरू करने में वित्तीय सहायता मिलता है
सरकारी योजनाएं- सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाएं- जैसे कि पीएम-किसान पीएमएफबीवाई- और एआईएफ- किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान कर और उन्हें विभिन्न कृषि और संबद्ध गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है
लोकप्रियता- मछली पालन की अपार संभावनाओं और लाभों के कारण यह किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है
मछली पालन के लिए तालाब तैयार करना-
मछलियों के बीज डालना और फिर उनकी सही देखभाल और भोजन का प्रबंधन करना आवश्यक है- तालाब के लिए अच्छी मिट्टी वाली जगह चुनें, साल भर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करें और तालाब को साफ-सुथरा रखें। मछलियों को प्राकृतिक और कृत्रिम भोजन दोनों प्रदान करें और समय-समय पर खाद डालें
1. तालाब निर्माण और तैयारी
जगह का चुनावः ऐसी जगह चुनें जहाँ अच्छी मिट्टी हो, पानी की उपलब्धता हो और कुछ गड्डा हो जिससे लागत कम हो
तालाब की तैयारी
पहले तालाब को पूरी तरह सुखा लें
तालाब से सभी खरपतवार, जलीय पौधे और अवांछित जीवों को हटा दें
तालाब को साफ और स्वच्छ रखने के लिए चूना और गोबर की खाद का उपयोग करें
2.मछली के बाजार भाव के आधार पर
मछली पालन में सबसे पहले वातावरण के अनुसार मछली का चयन करना चाहिए और उसके बाद बाज़ार में उसकी माँग और कीमत के आधार पर निर्णय लेना चाहिए- किसी भी मछली पालन व्यवसाय में मुनाफा कमाने के लिए उन मछलियों का चयन करना सबसे अच्छा होता है जो बाज़ार में महंगी बिकती और जिन्हें कम लागत में तैयार भी किया जा सकें
बाज़ार भाव – व्यापार के दृष्टिकोण से अधिक मुनाफा कमाना महत्वपूर्ण होता और इसलिए उन मछलियों का चयन करें जो बाज़ार में अधिक कीमत पर बिकता है
कम लागत- ऐसी मछलियों का चयन करें जिन्हें पालने और लागत कम में आती हो ताकि मुनाफा अधिकतम हो सकें
बाज़ार की माँग – ऐसी मछली चुनें जिसकी बाज़ार में लगातार माँग हो और वह आसानी से भी बिक जाना चाहिए
निष्कर्ष – इन दोनों कारकों को ध्यान में रखकर, आप अपने मछली पालन व्यवसाय को अधिक लाभदायक बना सकेंगे
3.प्रजाति के आधार पर मछली पालन
प्रजाति के आधार पर मछली का चयन करने के दौरान इसकी सबसे उन्नत प्रजातियों का ही चयन करना चाहिए- वैसे तो मछली की बहुत सारी प्रजाति होते हैं लेकिन खाने योग्य कुछ ही प्रजाति है जिन्हें सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है
देशी प्रजाति की मछलियाँ
ताज़े पानी की मछलियाँ (Freshwater Fishes)
ये प्रजातियाँ नदियों झीलों और तालाबों में पाई जाती और भारतीय व्यंजनों- खासकर पूर्वी और उत्तरी भारत में इनका प्रमुख स्थान होते हैं
रोहू (Rohu / Labeo rohita)
यह कार्प परिवार की सबसे लोकप्रिय मछलियों में से एक होते हैं इसका स्वाद हल्का होता है, मांस नरम होता और यह ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होती है- यह करी और तलने के लिए बहुत अच्छी माने जाने वाली मछली है
कतला (Catla / Indian Carp
यह भारतीय कार्प प्रजातियों में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली मछली हैं जो इसका मांस नरम और रसदार होता है जो इसे करी के लिए आदर्श बनाता है- यह प्रोटीन और आवश्यक फैटी एसिड से भरपूर होती है
मृगल(Mrigal / Cirrhinus mrigala
यह भी एक प्रमुख भारतीय कार्प है जिसे अक्सर मिश्रित मछली पालन प्रणाली में पाला जाता है इसका स्वाद अच्छा होता है और यह भारतीय घरों में आम तौर पर खाई जाती है
तिलपिया (Tilapia
यह मछली अपनी कठोरता, तेज़ी से विकास और हल्के स्वाद के कारण लोकप्रिय है- यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं को पसंद आती है और इसमें उच्च प्रोटीन पाये जाते हैं
मांगुर (Catfish / Clarias batrachus
यह अपनी अनूठी मूंछों और अलग स्वाद के लिए माना जाता है- यह प्रोटीन से भरपूर होती है और भारत के कुछ राज्यों में इसे एक स्वादिष्ट व्यंजन माना जाता है
खारे पानी की मछलियाँ (Saltwater/Marine Fishes)
ये मछलियाँ समुद्र में पाई जाती और तटीय क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय होते हैं
इंडियन सैल्मन (Indian Salmon / Rawas
इसे भारत में सबसे अच्छी और स्वास्थ्यप्रद मछलियों में से एक माना जाता है- इसका स्वाद हल्का होता है और मांस दृढ़ होता है और यह ओमेगा-3 विटामिन A और D से भरपूर होते है। इसे ग्रिल बेक या तंदूरी के रूप में बनाना पसंद करते हैं
सुरमई (Seer Fish / Kingfish
इसे किंग फिश भी कहा जाता है इसका मांस चिकना, रसदार और दृढ़ होती है जो यह ओमेगा-3 और प्रोटीन से भरपूर है और तलने या ग्रिल करने के लिए बेहतरीन होती है
पॉम्फ्रेट (Pomfret / Paplet – यह एक महंगी और लोकप्रिय मछली है जो अपने सफेद- स्वादिष्ट और परतदार मांस के लिए जानी जाती है।जो अपने सफेद और काली पॉम्फ्रेट सबसे आम किस्में हैं
हिल्सा Hilsa / Ilish –
यह पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बहुत लोकप्रिय है और अपने नाजुक, तेल-युक्त मांस के लिए बड़ा माना जाता है
मैकरेल Mackerel / Bangda
यह एक तैलीय मछली है जो ओमेगा-3 फैटी एसिड और प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत है यह तटीय क्षेत्रों में मुख्य भोजन हैं
इन प्रजातियों का चयन करते समय- यह सुनिश्चित करें कि आप ताज़ी और अच्छी गुणवत्ता वाली मछली खरीदें और क्योंकि यह उनके पोषण मूल्य और स्वाद के लिए महत्वपूर्ण होती है
4.मछली उत्पादन के दौरान सावधानी
मछली उत्पादन के दौरान काफी सावधानियां रखना बहुत आवश्यक है- जिन्हें अगर नही रखा जाए तो इसमें काफी नुक्सान पहुँचता होंगे
1. मछली पालन के लिए टैंको का निर्माण खुली जगह में करवाना चाहिए और जहाँ सूर्य की धूप सीधी पड़ती हो और साथ ही टैंको को बारिश और सर्दी से बचाने की व्यवस्था भी कर लेनी चाहिए
2. पानी में सीप-घोंघे और अन्य कीट को टैंकों में पैदा ना होने दें
3. मछलियों को खाने वाले मासाहारी जीवों से टैंको की सुरक्षा करनी चाहिए- इसके लिए पानी में जाल बिछा दें
4. पानी में ऑक्सीजन की मात्रा को बनाए रखे इसके लिए समय समय पर टैंक की जांच करते रहेना और पानी को बदल देंते रहे
5. मछलियों में बीमारी सर्दी के मौसम में अधिक दिखाई देती है-इसलिए इस दौरान ख़ास ध्यान रखना चाहिए
6. मछली की वातावरण और मुनाफे के आधार पर उन्नत नस्ल का ही चयन करें
मछलियों को बीमारि से बचाव
सर्दी के मौसम में मछलियों में बीमारियाँ में अधिक दिखाई देती हैं, और इस दौरान विशेष ध्यान रखना चाहिए- तापमान में गिरावट और मौसम में बदलाव मछलियों के स्वास्थ्य और जलीय पर्यावरण को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं
यहाँ कुछ कारण दिए गए हैं कि सर्दियों में मछलियाँ अधिक बीमार क्यों होती हैं और आपको क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए
1.सर्दियों में मछलियों के बीमार होने के कारण
1.कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (Weakened Immune System)
ठंडे पानी में मछलियों का मेटाबोलिज्म (चयापचय) धीमा हो जाता और उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है जिससे वे बैक्टीरिया- फंगस और परजीवियों के हमलों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं
2.(परजीवियों और बैक्टीरिया का पनपना)
कुछ हानिकारक परजीवी और बैक्टीरिया ठंडे पानी में भी सक्रिय रहते हैं और कमजोर मछलियों को आसानी से संक्रमित कर देती है
3.ऑक्सीजन का स्तर
हालांकि ठंडा पानी अधिक ऑक्सीजन धारण कर सकता है लेकिन अगर तालाब या टैंक में सतह पर बर्फ जम जाए या पानी का बहाव कम हो-तो ऑक्सीजन की कमी हो सकती है
4.तनाव (Stress)
तापमान में अचानक परिवर्तन मछलियों के लिए तनावपूर्ण होता है जिसे उनका स्वास्थ्य और बिगड़ जाता है
2.बीमारियों और परजीवियों से होने वाले नुकसान
(रोग)- एपीज़ोटीक अल्सरेटिव सिंड्रोम (EUS) जैसे रोग हो सकते हैं, जिनमें मछलियों के शरीर पर लाल धब्बे वाले घाव हो जाते हैं
(परजीवी)- आरगुलस जैसे परजीवी त्वचा पर गहरे घाव कर सकते हैं, जिससे फफूंद और जीवाणु संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है
फंगल संक्रमण)इक्थियोफोनस कवक प्रणालीगत संक्रमण पैदा कर सकता है, जिससे मछलियां कमजोर हो जाती हैं
7.सर्दियों में बरती जाने वाली सावधानियाँ
तापमान नियंत्रण- यदि संभव हो, तो एक्वेरियम (Aquarium) या नियंत्रित टैंकों में पानी के तापमान को स्थिर बनाए रखने के लिए हीटर का उपयोग करें
संतुलित आहार- ठंडे पानी में मछलियाँ कम सक्रिय होती हैं और उन्हें कम भोजन की आवश्यकता होती और उन्हें आसानी से पचने वाला और कम मात्रा में भोजन दें अतिरिक्त भोजन पानी को दूषित कर सकता है
पानी की गुणवत्ता – नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता (अमोनिया, नाइट्राइट स्तर) की जाँच करें और पानी बदलें- स्वच्छ पानी बीमारी को रोकने में मदद करता है
निगरानी – मछलियों के व्यवहार, शरीर पर सफेद धब्बे, घाव या असामान्य तैराकी के पैटर्न पर नज़र रखें ताकि बीमारी के लक्षण दिखते ही तुरंत उपचार शुरू किया जाएगा
दवाएँ और उपचार – मछली पालकों को सर्दियों के महीनों से पहले कुछ सामान्य दवाओं (जैसे एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल उपचार) को स्टॉक करके रखना चाहिए- ताकि वे ज़रूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके
8.मछली का बाजार भाव विभिन्न प्रकार और क्षेत्रों के अनुसार अलग-अलग होता है। उदाहरण
दिल्ली में मछली की औसत कीमत ₹214.3/ किग्रा है इसी तरह, एक सामान्य मछली के लिए ₹250.44/किग्रा- बासा मछली के लिए ₹260/किग्रा और क्रोकर मछली के लिए ₹230/किग्रा दरें हो सकती हैं
यहाँ कुछ अलग-अलग मछलियों के अनुमानित बाज़ार भाव हैं
बासा मछली- ₹260 प्रति किग्रा
क्रोकर मछली- ₹230 प्रति किग्रा
सार्डिन मछली- ₹280 प्रति किग्रा
रोहू मछली- ₹150 से ₹495 प्रति किग्रा तक
पंगेशियस मछली- ₹110 से ₹120 प्रति किग्रा (यह 5-6 महीने में तैयार हो जाती है)
9 मछली पालन से कमाई और फायदे
( income aur fayde)
मछली पालन से अच्छी आय हो सकती है, जो एक एकड़ में ₹5 लाख तक भी जा सकती है, लेकिन यह कई कारकों पर निर्भर करता है। इसके फायदों में अच्छी आय के साथ-साथ यह एक स्थायी व्यवसाय है, क्योंकि मछली के लिए पानी का उपयोग नहीं होता है
1.मछली पालन से कमाई
(उच्च लाभ)सही तकनीक और सरकारी योजनाओं के साथ मछली पालन से अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है।
(उदाहरण)- एक एकड़ तालाब से सालाना ₹5 लाख तक की कमाई संभव है- और कुछ सफल किसान प्रति एकड़ से ₹20 लाख तक की कमाई कर चुके हैं
(सरकारी योजनाएं)- सरकार मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी देती है, जैसे कि मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना।
2.मछली पालन के फायदे
(स्थायी आजीविका)- यह एक ऐसा व्यवसाय है जो लगातार आय प्रदान करता है- खासकर जब तक मछली का उत्पादन हो रहा है
(रोजगार के अवसर)- यह ग्रामीण क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत है और रोजगार पैदा करता है
(अतिरिक्त आय)- यह कृषि के साथ-साथ किया जा सकता है जिससे किसानों को अतिरिक्त आय मिलते है
(पोषण)- मछली ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन से भरपूर होती है- जो इसे एक स्वस्थ आहार का हिस्सा बनती है
3.ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें
(तकनीक और प्रबंधन)- सफलता के लिए सही तकनीक और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन बहुत जरूरी है क्योंकि छोटी सी चूक भी बड़ा नुकसान भी हो सकते हैं
(सरकारी योजनाओं का लाभ)- मछली पालक अपनी आय बढ़ाने के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाए जा सकते हैं- जैसे कि मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना से
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