दंडकारण्य कृषि संदेश : गन्ने की खेती मिठास से भरा मुनाफे का सौदा

संवाददाता- दीपक गोटा
गन्ने के फसल की 13 बिंदुओं में महत्वपूर्ण जानकारी
1.गन्ने फसल का परिचय
गन्ना मुख्य रूप से दो मौसमों में बोया जाता है: शीत ऋतु (सितंबर-अक्टूबर) और वसंत ऋतु (फरवरी-मार्च)। बुवाई का सही समय क्षेत्र के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है लेकिन ये दो मुख्य समय हैं जब गन्ने की फसल लगाई जाती है
फसल की प्रकृति– यह बांस की जाति का एक उष्णकटिबंधीय (Tropical) तथा उप-उष्णकटिबंधीय (Sub-tropical) पौधा है
अवधि– यह एक लंबी अवधि की फसल है, जिसे परिपक्व होने में आमतौर पर 10 से 18 महीने का समय लगता है
खेत और मिट्टी की तैयारी (Land and Soil Preparation)
मिट्टी का चुनाव – अच्छे जल निकास वाली दोमट (Loamy) या हल्की चिकनी मिट्टी (Clay Loam) सबसे अच्छी होती है
जुताई– खेत की गहरी जुताई करें (मिट्टी पलटने वाले हल से 20-25 सेमी गहराई तक)। इसके बाद 2-3 बार कल्टीवेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बनाएं और ढेलों को तोड़ दें
समतलीकरण– अंत में पाटा (लेवलर) चलाकर खेत को समतल करें
खाद– अंतिम जुताई के समय गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट (लगभग 10-15 टन प्रति हेक्टेयर) मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें।
3.बुवाई का समय (Sowing Time)
गन्ने की बुवाई मुख्य रूप से दो समयों पर की जाती है
शरदकालीन बुवाई (सर्वोत्तम समय)- सितम्बर- अक्टूबर- नवंबर इससे जो उपज अधिक मिलती है और फसल को वृद्धि के लिए लंबा समय मिलता है
बसंत कालीन बुवाई– फरवरी – मार्च। यह मुख्य बुवाई का समय है
4. बीज (सेट्स) का चयन और उपचार (Seed Selection and Treatment)
किस्म– अपने क्षेत्र और जलवायु के अनुसार उन्नत और शीघ्र पकने वाली किस्मों (जैसे Co 0238, Co 86032, आदि) का चुनाव करें।
बीज काटना- गन्ने के तने को दो या तीन आँख वाले छोटे-छोटे टुकड़ों (सेट्स) में काटें। ध्यान रहे कि बीज स्वस्थ और रोग रहित हों।
बीज उपचार (सबसे महत्वपूर्ण)- बुवाई से पहले सेट्स को फफूंदनाशक (जैसे कार्बेंडाजिम) और कीटनाशक (जैसे क्लोरपाइरीफॉस) के घोल में डुबोकर उपचारित करें। इससे अंकुरण अच्छा होता है और शुरुआती रोगों/कीटों से बचाव होता है।
5. बुवाई की विधि और दूरी (Sowing Method and Spacing)
गन्ना मुख्यतः – नाली विधि (Trench Method) से बोया जाता है
नाली बनाना– रिजर (Riger) की सहायता से खेत में 90 से 120 सेंटीमीटर की दूरी पर 15-20 सेमी गहरी नालियाँ (Trenches) बनाएं।
सेट डालना– इन नालियों में गन्ने के उपचारित सेट्स को सिरे से सिरा मिलाकर क्षैतिज रूप से बिछा दें
मिट्टी से ढकना: सेट्स को लगभग 3-4 सेंटीमीटर मिट्टी की पतली परत से ढक दें
6. सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन (Irrigation and Fertilizer)
सिंचाई
बुवाई के तुरंत बाद पहली हल्की सिंचाई करें।
गन्ने को ग्रैंड ग्रोथ फेज (Grand Growth Phase) में सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है
गर्मियों में 8-12 दिन के अंतराल पर और सर्दियों में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें
उर्वरक– संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें
बुवाई के समय– फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा दें
शीर्ष ड्रेसिंग (Top Dressing)- नाइट्रोजन (यूरिया) की मात्रा को 2-3 बार में बांटकर अंकुरण के बाद और बढ़वार के समय डालें
7. फसल की देखभाल (Crop Management)
खरपतवार नियंत्रण- खरपतवार गन्ने की उपज को बहुत कम कर देते हैं। इसके लिए बुवाई के तुरंत बाद खरपतवारनाशक (Pre-emergence Herbicide) का छिड़काव करें और समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें।
मिट्टी चढ़ाना (Earthing-up)- जब गन्ना 90-120 सेमी का हो जाए (आमतौर पर जून-जुलाई में), तब तने के चारों ओर मिट्टी चढ़ाएं। इससे गन्ना गिरने से बचता है और जड़ों को मज़बूती मिलती है
बंधाई– तेज़ हवा और भारी बारिश से बचाने के लिए, गन्ने के थानों को आपस में बांधना (Binding) बहुत ज़रूरी है
8. कटाई (Harvesting)
गन्ने की फसल 10 से 18 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है
जब पत्तियाँ सूखने लगें और गन्ने की मोटाई स्थिर हो जाए, तो कटाई करें
सर्वोत्तम कटाई के लिए- गन्ने को जमीन की सतह से बिल्कुल सटाकर काटें ताकि पेड़ी फसल (Ratoon Crop) अच्छी मिल सके
9.कीटों से फसल मेंहोने वाला नुकसान
गन्ने को कई तरह के कीट नुकसान पहुंचाते हैं
अग्र तना छेदक (Early Shoot Borer) यह कीट गन्ने के छोटे पौधों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे ऊपरी हिस्सा सूख जाता है
पायरीला कीट (Pyrilla) यह रस चूसने वाला कीट है जो पौधों को कमजोर करता है
दीमक (Termite)- यह अंकुरण से लेकर फसल पकने तक हमला करती है, जिससे पौधे पीले पड़कर सूख जाते हैं।
चोटी वेधक कीट (Top Shoot Borer): इससे पत्तियों के बीच में लाल धारी बन जाती है और गन्ने के तने में छेद हो जाते हैं।
रोगों से होने वाला नुकसान
गन्ने में कई गंभीर रोग लगते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
लाल सड़न रोग (Red Rot): यह गन्ने का सबसे हानिकारक रोग है, जिसे गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है। इसमें गन्ना अंदर से लाल हो जाता है और उसमें खट्टी गंध आती है, जिससे वह चीनी बनाने के लिए अनुपयुक्त हो जाता है।
उकठा रोग (Wilt): इस रोग में गन्ने के पौधे पीले पड़कर सूख जाते हैं और अंदर से खोखले व लाल-भूरे रंग के हो जाते हैं।
कंडवा रोग (Smut): इसमें गन्ने के अग्रभाग पर चाबुक जैसी काली संरचना निकल आती है, जो फफूंदी के बीजाणुओं से भरी होती है।
पोक्का बोइंग रोग (Pokkah Boeng): इसमें ऊपरी पत्तियां आपस में उलझ जाती हैं और गोभ सड़ने लगती है
10.गन्ने की फसल के लिए प्रमुख खाद दवाईयां (Fertilizers)
गन्ने को मुख्य रूप से नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), और पोटेशियम (K) की आवश्यकता होती है।
बुवाई के समय (At Planting Time)-
डीएपी (DAP) या सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) – फॉस्फोरस की पूर्ति के लिए
यूरिया – नाइट्रोजन की शुरूआती खुराक के लिए।
पोटाश – मिट्टी की ज़रूरत के हिसाब से।
जिंक सल्फेट और सल्फर भी बुवाई के समय या बाद में ज़रूरी हो सकता है
11. ध्यान देने योग्य बातें
मिट्टी की जाँच: सबसे पहले मिट्टी की जांच कराएं।
सही समय- खाद और दवाई का इस्तेमाल सही समय पर करना बहुत ज़रूरी है।
पानी– खाद डालने के बाद खेत में पर्याप्त नमी/पानी देना आवश्यक है।
सुरक्षा– दवाई का छिड़काव करते समय हमेशा सुरक्षा उपकरण (मास्क, दस्ताने) पहनें
12.गन्ने से मुख्य रूप से बनने वाले पदार्थ इस प्रकार हैं
गुड़ (Jaggery)- यह गन्ने के रस को उबालकर और गाढ़ा करके बनाया जाता है। यह चीनी का एक प्राकृतिक और सेहतमंद विकल्प माना जाता है।
चीनी (Sugar)- सफेद चीनी गन्ने के रस को साफ करके और क्रिस्टलीकृत करके बनाई जाती है
गन्ने का रस (Sugarcane Juice) यह एक बहुत ही लोकप्रिय और ठंडा पेय है, खासकर गर्मियों में
राब (Rab)- यह गुड़ बनाने की प्रक्रिया में बनने वाला एक उप-उत्पाद है, जो सिरप जैसा होता है
खांड/शक्कर/बूरा/मिश्री- ये सभी चीनी के विभिन्न रूप हैं
काकवी (Kakvi) यह गन्ने के रस से बना एक मीठा-गाढ़ा सिरप होता है
सिरका (Vinegar)- गन्ने के रस से सिरका भी बनाया जाता है, जिसे गन्ने का सिरका कहते हैं
अल्कोहल/एथेनॉल (Alcohol/Ethanol)- गन्ने के उप-उत्पादों (जैसे शीरा या मोलासेस) का उपयोग करके इथेनॉल भी बनाया जाता है जिसका इस्तेमाल ईंधन और औद्योगिक उपयोगों में होता है
इसके अलावा, गन्ने के बचे हुए हिस्सों (जैसे अगोले) का उपयोग पशु चारे और छप्पर निर्माण में भी किया जाता है, और गन्ने की खोई (bagasse) का उपयोग ईंधन और कागज़ बनाने में भी होता है
13.आय और शुद्ध लाभ (Income & Net Profit) का अनुमान
शुद्ध मुनाफा = (उपज गन्ने का मूल्य) (लागत)
एक एकड़ गन्ने की फसल का एक सामान्य अनुमान (उत्तर प्रदेश में ₹400/क्विंटल मूल्य मानकर):
विवरण
राशि (रुपये में) कुल उपज (औसतन 350 क्विंटल)
कुल आय (350 क्विंटल x ₹400/क्विंटल)
₹1,40,000
कुल लागत (खाद, बीज, सिंचाई, मजदूरी, कटाई, परिवहन, आदि)₹70,000 से ₹80,000 का मुनाफा (प्रति एकड )
₹60.000 से ₹70.000
इनकम (Income)
उन्नत तकनीक का उपयोग करने वाले किसान, जो अधिक उपज (500 क्विंटल/एकड़) लेते हैं, वे प्रति एकड़ ₹1,00,000 या उससे अधिक का शुद्ध मुनाफा भी कमा सकते है




