
नक्सलवाद के ढहते गढ़, लाल सलाम की कमर अब टूट रही ,140 से ज्यादा नक्सली करेंगे सरेंडर ,नक्सलियों का रेड कार्पेट बिछाकर करेंगे स्वागत…
गढ़चिरौली से सुकमा तक नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है। बसवराज की मौत और भूपति का आत्मसमर्पण इस सशस्त्र आतंकवाद की अंतिम घड़ी साबित हो रही है ।भारत सरकार की बहुआयामी दंडनीति, सुरक्षा, विकास और पुनर्वास ने जंगलों की बंदूकें झुकवा दी हैं। यह भारत के भीतर की सबसे बड़ी जंग की निर्णायक जीत है लाल सलाम की कमर अब टूट रही ।
गढ़चिरौली के घने जंगलों में जब मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति उर्फ सोनू दादा ने 60 साथियों के साथ सरकार के समक्ष अपने हथियार रखे, तो यह केवल एक आत्मसमर्पण नहीं था, यह एक विचारधारा के अंत का आरंभ था ।
भूपति वही माओवादी था जो चार दशकों से देश के सबसे घातक माओवादी अभियानों का हिस्सा रहा, जिसने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के जंगलों में आतंक फैलाया था , अब उसी राज्य की पुनर्वास नीति के सामने नतमस्तक हुआ है ।
इस दृश्य ने भारत के सबसे लंबे सशस्त्र विद्रोह नक्सलवाद के अंत की शुरुआत को प्रतीकात्मक रूप में दर्ज किया।
गृह मंत्रालय के अनुसार, 2025 में 312 माओवादियों को मारा गया, 836 गिरफ्तार किए गए और 1,639 ने आत्मसमर्पण किया। यह आँकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि लाल गलियारा अब सिकुड़कर कुछ जिलों तक सीमित रह गया है।
छत्तीसगढ़ में केवल बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर ही “अत्यधिक प्रभावित” जिलों की श्रेणी में बचे हैं। 2013 में जहाँ 126 जिले नक्सल हिंसा की चपेट में थे, 2025 में वह संख्या घटकर 18 और अब मात्र 11 रह गई है।
नक्सली नेता रूपेश के नेतृत्व में नक्सली करेंगे सरेंडर100 से अधिक हथियारों के साथ करेंगे सरेंडर
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा – बड़ी संख्या में नक्सली सरेंडर करने को तैयार हैं ।हम नक्सलियों का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करेंगे।




