
सुप्रीम कोर्ट के अंदर भरी अदालत में चीफ़ जस्टिस पर हमला, आखिर कोर्ट के अंदर हुआ क्या था..
सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस बीआर गवई के पर सोमवार को हमले की कोशिश की गई आज सुप्रीम कोर्ट में उस समय थोड़ी देर के लिए अफ़रा-तफ़री मच गई जब एक वकील ने अपनी जूते से चीफ़ जस्टिस पर हमला करने की कोशिश की ।
इसके बाद हमला करने वाले वकील कोर्ट के बाहर निकाले जाने पर चीख चीख के कह रहे थे कि – सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान
इस घटनाक्रम के दौरान जस्टिस गवई शांत रहे और सुनवाई जारी रखी, सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीओएआरए) और कांग्रेस पार्टी ने हमले की निंदा की है
कोर्ट के अंदर क्या हुआ?
यह घटना उस समय हुई जब मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ मामलों की सुनवाई कर रही थी. तभी, वकील मंच के पास गया और अपना जूता निकाल कर न्यायाधीश पर फेंकने की कोशिश की. हालांकि, अदालत में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने समय रहते हस्तक्षेप किया और वकील को बाहर निकाल दिया
लाइव लॉ का कहना है कि कुछ चश्मदीदों का कहना है कि जूता फेंका गया जबकि कुछ लोगों का कहना है कि पेपर रोल फेंका गया
राकेश किशोर नामक वकील ने कोर्ट नंबर 1 में कार्यवाही के दौरान सुबह करीब 11:35 बजे अपने स्पोर्ट्स शूज़ निकाले और सीजेआई गवई पर फेंक दिए.
रोहित पांडेय सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व कार्यवाहक सचिव हैं
समाचार (डिडिन) से बात करते हुए रोहित पांडेय ने कहा, यह बहुत ही दुखद घटना है. हमला करने वाले वकील 2011 से सुप्रीम कोर्ट बार के सदस्य हैं. बताया जा रहा है कि सीजेआई की ओर से भगवान विष्णु पर किए गए कमेंट से आहत होकर उन्होंने इस घटना को अंजाम दिया है
सभी धर्मों का सम्मान करता हूं: सीजेआई
16 सितंबर को सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने मध्य प्रदेश में स्थित खजुराहो के एक मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की मरम्मत और रखरखाव का आदेश देने से जुड़ी अर्जी खारिज कर दी थी
बेंच ने कहा था कि यह अदालत नहीं बल्कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
के अधीन आता है. बेंच ने इसे ‘पब्लिसिटी के लिए दायर याचिका’ बताते हुए याचिकाकर्ता से ये कहा था कि ‘वह भगवान विष्णु के बड़े भक्त हैं तो फिर उन्हीं से प्रार्थना करें और थोड़ा ध्यान लगाएं
सीजेआई की इस टिप्पणी के बाद विवाद हो गया था. विश्व हिंदू परिषद ने सीजेआई को नसीहत दी थी कि उन्हें अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए
इसके बाद भगवान विष्णु की मूर्ति की मरम्मत की मांग वाली याचिका की सुनवाई में अपनी टिप्पणियों का हवाला देते हुए सीजेआई ने कोर्ट में कहा सोशल मीडिया पर तो आजकल कुछ भी चल सकता है. परसों किसी ने मुझे बताया कि आपने कुछ अपमानजनक कहा है
उन्होंने कहा, मैं सभी धर्मों में विश्वास रखता हूं और सभी धर्मों का सम्मान करता हूं
इस पर सॉलिसिटर जनरल ने तुषार मेहता ने भी कहा, “मैं सीजेआई को पिछले 10 सालों से जानता हूं. वे सभी धर्मों के मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर पूरी श्रद्धा के साथ जाते हैं
इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां केवल इस संदर्भ में थीं कि मंदिर एएसआई के अधिकार क्षेत्र में आता है
जस्टिस गवई भारत के 52वें सीजेआई (मुख्य न्यायधीश) हैं
हमले की घोर निंदा
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन ने अपने बयान में कहा,हम सर्वसम्मति से हाल ही में एक अधिवक्ता की ओर से किए गए उस अनुचित और असंयमित व्यवहार पर गहरी पीड़ा और असहमति व्यक्त करते हैं, जिसमें उन्होंने भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश और उनके साथी न्यायाधीशों के पद और अधिकार का अपमान करने का प्रयास किया ।
एससीओएआरए ने आगे कहा कि उसका यह मत है कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय इस घटना का स्वत संज्ञान लेकर अवमानना की कार्यवाही शुरू करे, क्योंकि यह सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने और उसकी प्रतिष्ठा को जनता की नज़र में कम करने का एक सोचा-समझा प्रयास है
कांग्रेस का कहना है कि न्याय के मंदिर में ऐसी घटना होना शर्मनाक है
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने एएनआई से कहा, “सर्वोच्च न्यायालय को लोग न्याय का मंदिर मानते हैं और वहां पर ऐसी घटना होना शर्म का विषय है. कुछ दिन पहले ही चीफ़ जस्टिस ने कहा था कि ये देश बुलडोज़र से नहीं क़ानून से चलेगा. तो मैं समझता हूं
कि यह पूरी न्यायपालिका के अपमान का विषय है।




