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अबूझमाड़धर्मबस्तर

Chhattisgarh: अबूझमाड़ की 170 फीट ऊंची पहाड़ी पर  रहस्यमय शिवलिंग नागपुष्प के साथ है स्थित  जहां नागपुष्प का अबूझमाड़ की पहाड़ी पर मिलना ही प्रकृति का एक रहस्य है ।

अबूझमाड़ की 170 फीट ऊंची पहाड़ी पर  रहस्यमय शिवलिंग नागपुष्प के साथ है स्थित  जहां नागपुष्प का अबूझमाड़ की पहाड़ी पर मिलना ही प्रकृति का एक रहस्य है ।

नारायणपुर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कड़ेनार ग्राम पंचायत के ग्राम कोहमेटा में मेन रोड से लगभग 500 मीटर की दूरी पर ऊंची पहाड़ी में भगवान शिव स्वयं विराजमान है। पगडंडी के रास्ते से होकर उस पहाड़ी में पहुंच सकते हैं जहां शिवलिंग नागपुष्प के साथ सुशोभित हैं। और यह किसी चमत्कार से कम नहीं नागपुष्प जिसकी खासियत ही यही है कि वो बहुत दुर्लभ पुष्प है जो खासतौर पर हिमालय में ही पे जाता है उस पुष्प का अबूझमाड़ की पहाड़ी पर मिला यह ईश्वर के चमत्कार जैसा ही है और ये पुष्प आसपास के किसी पहाड़ी में नहीं देखा गया है जो इस पहाड़ी मे शिव मूर्ति के साथ देखा गया है ।

 

गौरतलब है कि जिले का अबूझमाड़ क्षेत्र हमेशा से ही आस्था का बड़ा केंद्र रहा है। देवी देवताओं के वास के अनेक कारण हैं, जिनमें प्रकृति के प्रति आस्था, स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा और पारम्परिक धार्मिक प्रथाओं और जनजातीय वास के लिए यह क्षेत्र जाना जाता है। आदिवासी समुदाय प्रकृति से गहरे जुड़ाव के कारण पेड़, पौधे, पत्थरों और जलस्रोत को भी पवित्र मानकर उसमें देवी देवता का वास मानते हैं और इनके प्रति असीम आस्था प्रकट करते हैं।

 

लेकिन कोहमेटा के इस शिवलिंग से लोग कल तक अपरिचित थे लेकिन अब यह धीरे धीरे विख्याति प्राप्त कर रहा है ।

और कोहमेटा के रहस्यमय शिव लिंग के दर्शन के लिए शिव भक्तों की भीड़ बढ़ती ही जा रही है, यह नारायणपुर जिले से धौडाई और बारसूर के बीच स्थित है। धौडाई से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर बारसूर मार्ग पर बसा है कोहमेटा गांव।

4 – 5 साल पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण इस शिवलिंग के दर्शन करने कोई नहीं आता था शिवाय वह के स्थानीय लोगों के सिवा लेकिन अब नक्सलियों के भय को दर किनारा रख लोग यहां रहस्यमय चमत्कारी शिवलिंग के दर्शन के लिए दूर दूर से आ रहे हैं।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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