
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन पूरी, लेकिन जमीनी हकीकत क्या कहती है?
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर तय की गई समय-सीमा आज समाप्त हो गई है। सरकार की ओर से नक्सल मुक्त राज्य के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अब भी पूरी तरह साफ नहीं दिखती।
इसी बीच कांकेर जिले से एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस के अनुसार, दो नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान हिड़मे और शंकर के रूप में बताई जा रही है। खास बात यह है कि इनमें से एक नक्सली अपने साथ एके-47 जैसे आधुनिक हथियार के साथ पुलिस के पास पहुंचा।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी अभियान की सफलता को दर्शाता है और इससे अन्य नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक कांकेर के जंगलों में अभी भी करीब 15 नक्सलियों के सक्रिय होने की जानकारी है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो पाया है या अभी भी कुछ इलाकों में इसका असर बाकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलवाद सिर्फ सुरक्षा कार्रवाई से नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और स्थानीय लोगों के सहयोग से ही पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में कई पहल की हैं, जिनका असर भी धीरे-धीरे दिख रहा है।
फिलहाल, डेडलाइन पूरी होने के बावजूद छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के पूरी तरह खत्म होने के दावे और जमीनी हकीकत के बीच एक अंतर साफ नजर आता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस चुनौती से कैसे निपटती है और क्या राज्य वास्तव में नक्सल मुक्त हो पाता है।




