
संवाददाता- दीपक गोटा
झीरम हत्याकांड का मास्टरमाइंड DKSZC का वरिष्ठ सदस्य चैतू उर्फ श्याम दादा समेत 10 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण- 65 लाख के इनामी नक्सली शामिल
छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता है DKSZC (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) का कुख्यात और वरिष्ठ सदस्य चैतू उर्फ श्याम दादा जो कि झीरम घाटी हमले के कथित मास्टरमाइंड था वह अपने कुल 10 माओवादी कैडरों के साथ बस्तर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया
यह आत्मसमर्पण बस्तर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान का परिणाम है जिसका उद्देश्य माओवादी कैडरों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है
10 माओवादी कैडरों ने छत्तीसगढ़ में मुख्यधारा में आत्मसमर्पण किया है।
चैतू उर्फ श्याम दादा-(DKSZC)के वरिष्ठ सदस्य जिन पर ₹25 लाख का इनाम था
सरोज- DVCM सदस्य जिन पर ₹8 लाख का इनामी है
एरिया कमेटी सदस्य (ACM)- भूपेश उर्फ सहायक राम- प्रकाश- कमलेश उर्फ झितरू” जननी उर्फ रयमती कश्यप” संतोष उर्फ सन्नू और नवीन ने भी आत्मसमर्पण किया -प्रोटेक्शन मिलिशिया (PM)रमशीला और जयती कश्यप ने भी हथियार छोड़ दिए है-इन सभी 10 कैडरों पर कुल मिलाकर ₹65 लाख का इनाम घोषित था
बस्तर के शौर्य भवन- पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर लालबाग में आज आत्मसमर्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया -कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ जन परिवारजन- IGP बस्तर- SP बस्तर- जिला पुलिस प्रशासन और केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने मुख्यधारा में लौटने वाले नक्सलियों का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत किया और उन्हें संविधान की पुस्तक और गुलदस्ता भेंट भी किया गया
चैतू उर्फ श्याम दादा- जिसका पूरा नाम गिरी रेड्डी पवन दा रेड्डी है वह नक्सल संगठन का अत्यंत महत्वपूर्ण कैडर माना जाता है लगभग 60 वर्षीय यह कैडर मूलत ग्राम तुलसापुर- मंडल रघुनंदापल्ली -जिला वारंगल का रहने वाला है वह DKSZC का वरिष्ठ सदस्य और दरभा डिवीजन का इंचार्ज था उसके खिलाफ छत्तीसगढ़ में कल 25 लाख रूपये का इनाम घोषित था आत्मसमर्पण के दौरान चैतू ने अपने पास रखी AK-47 रायफल को पुलिस के समस्त रख कर सलेंडर किया हैं
चैतू उर्फ श्याम दादा- के पास आधुनिक तकनीक का उपयोग करने की क्षमता थी जिसमें टैबलेट- लैपटॉप- सोलर पैनल व बैटरी- टचस्क्रीन मोबाइल- वॉकी-टॉकी और रेडियो जैसे संसाधन शामिल और वह सोलर पैनल और बैटरी की मदद से वह इन उपकरणों को कहीं भी बिजली की उपलब्धता के बिना भी इस्तेमाल करता था
नक्सल मुक्त अभियानों से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को गरिमा- सुरक्षा- और आजीविका के अवसर प्रदान करके उनके पुनर्वास और सामाजिक पुनर्मिलन को सुनिश्चित करता है




