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Chhattisgarh: नारायणपुर के बालक छात्रावास में एक छात्र की संदिग्ध मौत, NSUI ने की है जांच की मांग

नारायणपुर के बालक छात्रावास में एक छात्र की संदिग्ध मौत, NSUI ने की है जांच की मांग

सरकारी स्कूल में कक्षा 8वीं के छात्र की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई नक्सल प्रभावित नारायणपुर से बड़ी खबर सामने आ रही है. यहां के बालक बुनियादी आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छात्रावास में आठवीं के एक छात्र ने जान दे दी. छात्र की मौत 13 सितंबर को हुई. अब इस घटना पर एनएसयूआई ने मोर्चा खोला दिया है। 14 सितंबर को एनएसयूआई की टीम ने बालक बुनियादी आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का जायजा लिया।

 

NSUI ने छात्रों और हॉस्टल पदाधिकारी से की पूछताछ

 

इस घटना के बाद 14 सितंबर को हॉस्टल पहुंची एनएसयूआई की टीम ने स्कूल के छात्रों से चर्चा की. उसके बाद उन्होंने हॉस्टल अधीक्षक से भी घटना की स्थिति को समझा।एनएसयूआई की तरफ से इस केस में मांग की गई कि आखिर हॉस्टल में मेडिकल विभाग का कोई कर्मचारी क्यों नहीं था. इसलिए उन्होंने जांच की मांग की है।

 

हॉस्टल अधीक्षक ने क्या कहा ?: छात्रावास अधीक्षक

 

हेमंत भूआर्य ने बताया कि छात्र सुबह तक बिल्कुल स्वस्थ था, लेकिन अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। साथी बच्चों ने सूचना दी तो हम मौके पर पहुंचे और छात्र को अचेत अवस्था में पाया, उसके मुंह से झाग निकल रहा था. तत्काल 108 एम्बुलेंस सेवा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर निजी वाहन से अस्पताल ले जाया गया. जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने छात्र को मृत घोषित कर दिया. पोस्टमार्टम कर शव को परिजनों को सौंप दिया गया है, रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट होगा।

 

मृत छात्र की कोई गंभीर मेडिकल हिस्ट्री नहीं थी 16 अगस्त को उसे चेचक के लक्षण हुए थे. जिसके बाद उसे परिजनों को सौंपा गया था. 3 सितम्बर को लौटने के बाद छात्र नियमित रूप से स्कूल आ रहा था और तबीयत खराब होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं की थी- हेमंत भूआर्य, छात्रावास अधीक्षक, बालक बुनियादी आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय

 

NSUI ने लगाए गंभीर आरोपः इस घटना की जांच के बाद NSUI जिला अध्यक्ष विजय सलाम ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि छात्रावास में मेडिकल स्टाफ न होना विभाग की बड़ी लापरवाही है. यदि समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होती तो छात्र की जान बच सकती थी. 108 एंबुलेंस सेवा इलाके में फेल है. इस केस में निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए

 

नारायणपुर में पहले भी हो चुकी है ऐसी कई घटनाएं :

 

नारायणपुर में इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी है. कुछ महीने पहले इसी स्कूल के छात्रावास में 11वीं कक्षा के एक छात्र ने जान दे दी थी. उस समय मामले के बाद तत्कालीन अधीक्षक को हटाया गया था. इस तरह की घटनाओं ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचालित सरकारी स्कूलों और हॉस्टल की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है ।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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