
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से बदली मासूम जीविका की जिंदगी, एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इम्प्लांट
रायपुर, 3 अगस्त 2026। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) की पहल से राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम डुंडेरा की नन्हीं जीविका के जीवन में नई उम्मीद जगी है। जन्मजात श्रवण बाधिता से पीड़ित जीविका अब आधुनिक चिकित्सा और समय पर मिले उपचार की बदौलत सुनने की नई दुनिया में कदम रख रही है। एम्स रायपुर में उसका सफल कॉक्लियर इम्प्लांट किया गया है, जिससे आने वाले समय में वह सामान्य बच्चों की तरह सुनने और बोलने की दिशा में आगे बढ़ सकेगी।
जानकारी के अनुसार जीविका की समस्या का पता आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-1, डुंडेरा में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चला। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत आरबीएसके टीम-ए, डोंगरगढ़ ने बच्ची की प्रारंभिक जांच कर उसकी श्रवण संबंधी समस्या की पहचान की। इसके बाद आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण कराते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लिया गया और आगे के उपचार के लिए उसे एम्स रायपुर रेफर किया गया।
एम्स रायपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सफलतापूर्वक कॉक्लियर इम्प्लांट की प्रक्रिया पूरी की। चिकित्सकों के अनुसार अब नियमित स्पीच थेरेपी और पुनर्वास कार्यक्रम के माध्यम से जीविका धीरे-धीरे ध्वनियों को पहचानना सीखेगी और भविष्य में सामान्य बच्चों की तरह बोलने में भी सक्षम हो सकेगी।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात विकार, पोषण संबंधी समस्याओं, विकास संबंधी देरी और गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान कर उन्हें निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराना है। आवश्यकता होने पर बच्चों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर कर आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलती है।
जीविका की सफलता की यह कहानी बताती है कि समय पर बीमारी की पहचान, प्रभावी स्वास्थ्य व्यवस्था और समर्पित चिकित्सा टीम के प्रयास किसी भी बच्चे का भविष्य बदल सकते हैं। डोंगरगढ़ की आरबीएसके टीम की सतर्कता और समन्वित कार्यशैली ने एक मासूम बच्ची को नई उम्मीद दी है। अब उसके जीवन में केवल मुस्कान ही नहीं, बल्कि आवाजों से भरी एक नई दुनिया भी दस्तक दे रही है।




