header ads
छत्तीसगढ़नई दिल्लीप्राचीनमनोरंजनराष्ट्रीयरोजगारशिक्षा

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2026: ‘राम-नामी’ बनी सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री, छत्तीसगढ़ की संस्कृति को मिला राष्ट्रीय सम्मान

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में 'राम-नामी' बनी सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया प्रदेश के लिए गौरव का क्षण

 

रायपुर। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म का सम्मान मिलने पर पूरे प्रदेश में खुशी का माहौल है। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने इसे छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक अस्मिता के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए फिल्म के निर्देशक भरतबाला गणपति और पूरी निर्माण टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

संस्कृति मंत्री ने कहा कि यह सम्मान केवल एक डॉक्यूमेंट्री की सफलता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान है। उन्होंने कहा कि रामनामी समाज अपनी विशिष्ट परंपराओं, भगवान श्रीराम के प्रति अटूट आस्था, सादगीपूर्ण जीवन शैली और लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखता है।

 

उन्होंने कहा कि शरीर पर श्रीराम नाम अंकित कराने की अनूठी परंपरा, भक्ति, समरसता और आध्यात्मिक जीवन मूल्यों का संदेश देने वाला रामनामी समाज छत्तीसगढ़ की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ ने इस विरासत और समाज की जीवन शैली को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर देश-दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है।

 

राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह राष्ट्रीय सम्मान छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और सांस्कृतिक अस्मिता को नई प्रतिष्ठा दिलाएगा। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को नई गति मिलेगी तथा युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित होगी।

 

उन्होंने विश्वास जताया कि इस उपलब्धि के बाद देश और विदेश में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पारंपरिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति लोगों की रुचि बढ़ेगी। साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी और सांस्कृतिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

 

संस्कृति मंत्री ने निर्देशक भरतबाला गणपति और पूरी निर्माण टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली प्रेरणादायी उपलब्धि है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी प्रदेश की लोक संस्कृति और परंपराओं पर आधारित ऐसे रचनात्मक प्रयास लगातार होते रहेंगे।

 

दंडकारण्य दर्पण

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!