
फरसगांव उपचुनाव में बढ़ी चुनावी गर्मी
वार्ड क्रमांक 12 में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर, नया चेहरा बनाम अनुभव की लड़ाई बनी चर्चा का केंद्र
Kondagaon। नगर पंचायत फरसगांव के वार्ड क्रमांक 12 में होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। शनिवार से प्रत्याशी लगातार घर-घर पहुंचकर मतदाताओं से संपर्क साध रहे हैं और अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। पूरे वार्ड में चुनावी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है और दोनों दल जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंकते नजर आ रहे हैं।
एक ओर ट्रिपल इंजन सरकार का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव को अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी अपने पारंपरिक जनाधार को बचाए रखने के लिए मजबूती से मैदान में डटी हुई है। ऐसे में वार्ड क्रमांक 12 का मुकाबला अब केवल एक उपचुनाव नहीं, बल्कि दोनों दलों की साख की लड़ाई बनता दिखाई दे रहा है।
भाजपा ने इस चुनाव में सुश्री छबीला नेताम को प्रत्याशी बनाकर नया दांव खेला है। राजनीति में उनकी एंट्री अचानक चर्चा का विषय बन गई है। लंबे राजनीतिक अनुभव और मजबूत संगठनात्मक पकड़ के अभाव के बावजूद भाजपा संगठन नए चेहरे के सहारे जनता के बीच बदलाव और नई राजनीति का संदेश देने की कोशिश कर रहा है। भाजपा कार्यकर्ता इसे युवा सोच और नई ऊर्जा का प्रतीक बता रहे हैं।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा प्रत्याशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता के बीच मजबूत संवाद स्थापित करने की होगी। यदि वे चुनाव जीतने में सफल होती हैं, तो उनके सामने वार्डवासियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और क्षेत्र की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाने की जिम्मेदारी भी होगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा का नया प्रयोग जनता को कितना प्रभावित कर पाता है।
वहीं कांग्रेस ने अनुभवी चेहरा सावित्री मरकाम को मैदान में उतारकर मुकाबले को और अधिक रोचक बना दिया है। वार्ड क्रमांक 12 लंबे समय से कांग्रेस का मजबूत क्षेत्र माना जाता रहा है। सावित्री मरकाम वर्ष 2009 में पार्षद चुनाव जीत चुकी हैं, जबकि उनके पति रामलाल मरकाम भी पूर्व में पार्षद रह चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस इस चुनाव में अनुभव, मजबूत जनसंपर्क और स्थानीय पकड़ के सहारे मैदान में उतर रही है।
स्थानीय राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस उपचुनाव में मुकाबला काफी करीबी हो सकता है। एक तरफ भाजपा बदलाव और नए चेहरे के सहारे जनता का विश्वास जीतने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस अनुभव और पुराने जनाधार के दम पर अपनी पकड़ बनाए रखने में जुटी हुई है।
अब पूरे फरसगांव की नजर 1 जून को होने वाले मतदान और 4 जून को आने वाले परिणाम पर टिकी हुई है। चुनावी माहौल को देखते हुए वार्ड क्रमांक 12 का यह उपचुनाव क्षेत्र की राजनीति का सबसे चर्चित और प्रतिष्ठापूर्ण मुकाबला बन चुका है।




