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कृषिरोजगार

दण्डकारण्य कृषि संदेश : किसानों के लिए नवंबर महीने में फायदेमंद  5 प्रकार की महत्वपूर्ण फसलें जो किसानों को कम लागत में जायदा मुनाफा दे सकती है

संवाददाता- दीपक गोटा

 

किसानों के लिए फसल की परिचय

 

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए नवंबर का महीना सब्जियों की खेती के लिए सबसे अच्छा माना जाती है क्योंकि इस समय मौसम तेजी से फसलों को बढ़ने में मदद करता और विशेषज्ञों के अनुसार भिंडी- लौकी- करेला- मूली और बैंगन जैसी सब्जियां कम समय में किसानों को तगड़ी कमाई देती है

 

किसान भाइयों की सुविधा के लिए हम हर माह, महीने के हिसाब से फसलों की जानकारी देंगे जिससे आप सही समय पर फसल की बुवाई कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। इसी क्रम में आज हम नवंबर माह में बोई जाने वाली फसलों के बारे में जानकारी देंगे। इसी के साथ उनकी अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों के बारे में भी बताएंगे। आशा करते हैं हमारे द्वारा दी जा रही ये जानकारी किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी। तो आइए जानते हैं नवंबर माह में बोई जाने वाली फसलों के बारे में

 

1 फूलगोभी की फसल 

एक लोकप्रिय सब्जी है और क्रूसिफेरस परिवार से संबंधित है। इसकी अगेती किस्मों की रोपाई के लिए अच्छा समय जून-जुलाई का होता है। वहीं पिछेती किस्मों के लिए अगस्त से मध्य सितंबर और अक्टूबर से नवंबर का पहला सप्ताह रोपाई के लिए अच्छा रहता है। इसकी पूसा सनोबल, पूसा सनोबाल 1, पूसा सनोबाल के-1, स्नोबाल 16, पंत शुभ्रा, अर्ली कुंवारी, पूसा दीवाली प्रसिद्ध किस्में हैं जिनकी बुवाई कर अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है

 

फ़सल की अवधि

कुल समय

किस्म और मौसम के आधार पर, फूलगोभी की फ़सल तैयार होने में 60 से 120 दिनों तक का समय लग सकता है

अगेती किस्में

कुछ अगेती किस्मों में- नर्सरी में पौध तैयार होने और रोपाई के बाद यह फ़सल कटाई के लिए तैयार होने में लगभग 4 महीने (120 दिन) लग सकते हैं

सही देखभाल

उचित देखभाल के साथ- पौध रोपण के 35-40 दिनों के भीतर फूल आना शुरू हो जाते हैं और 60-65 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं

मुनाफ़ा और लागत

मुनाफ़ा- एक अनुमान के अनुसार, एक एकड़ फूलगोभी की खेती से ₹2 लाख तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है जिसमें खर्च को घटा दिया जाता है

लागत

प्रति एकड़ खेती की कुल लागत लगभग ₹50,000 हो सकता और जिसमें बीज- खाद-निराई-गुड़ाई और मजदूरी जैसे खर्चे शामिल हैं

बाज़ार भाव

बाज़ार में फूलगोभी का भाव बदलता रहता है अगेती फूलगोभी को अधिक कीमत मिल सकती है

 

2 पत्ता गोभी की फसल-

की खेती उचित समय सितंबर से अक्टूबर का होता है लेकिन नवंबर में भी इसकी खेती की जा सकती है आमतौर पर पत्ता गोभी फसल की अवधि 60-120 दिन होती है- औसत उत्पादन 200-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है

इसकी अगेती किस्मों में प्राइड ऑफ इण्डियागोल्डन एकर क्रांति एवं मित्रा (संकर) आदि प्रमुख हैं इनकी बुवाई का समय सितंबर माह हैं- इसकी मध्यम व पछेती किस्मों पूसा ड्रम हैड, लेट ड्रम हैड- कोपेनहेगेन मार्किट- सितम्बर अर्ली- मिडसीजन मार्किट- श्री गणेश गोल- क्विस्टो_ हरी रानी गोल- सलेक्शन 8- हाईब्रिड- 10 (संकर) आदि प्रमुख हैं, इनके बुवाई अक्टूबर व नवंबर में की जा सकती है

 

लगने वाला समय 

औसत समय

फसल को पकने में आमतौर पर \(60\) से \(120\) दिन लगते हैं

अगेती किस्में

अगर जून-जुलाई में बुवाई की जाए तो कुछ किस्में (70-80) दिनों में तैयार हो सकती हैं जिससे किसान को जल्दी बाजार में बेचने का मौका मिलता है

 

मुनाफे के मुख्य बिंदु

लागत और आमदनी

एक एकड़ में पत्ता गोभी की खेती करने पर लगभग ₹25,000 से ₹35,000 का खर्च आता है और ₹1 लाख से अधिक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है

उच्च उत्पादन- फूल गोभी की तुलना में पत्ता गोभी का उत्पादन अधिक होता है

लगातार मांग- फास्ट फूड में इसके उपयोग और सलाद के रूप में इसके कच्चे सेवन के कारण इसकी मांग हमेशा बनी रहती है

 

टमाटर की फसल

भारत में बड़े पैमाने पर की जाती है और यह एक लोकप्रिय फसल है उत्तरी मैदानों में इसकी दो फसलें होती हैं

जबकि दक्षिणी भारत में तीन फसलें ली जाती हैं। टमाटर की प्रमुख किस्मों में पूसा शीतल-पूसा 120 पूसा रूबी और अर्का विकास जैसी देशी किस्में और ‘पूसा हाइब्रिड-1-पूसा हाइब्रिड-2 और रश्मि जैसी हाइब्रिड किस्में शामिल हैं-अर्का रक्षक’ किस्म को बंपर उत्पादन के लिए जाना जाता है

 

खेती का समय 

उत्तरी भारत

शरद ऋतु और बसंत ऋतु में दो फसलें ली जाती हैं।

 

दक्षिणी भारत-

जून-जुलाई, अक्टूबर-नवंबर, और जनवरी-फरवरी में तीन फसलें ली जाती हैं

पंजाब

बसंत से ग्रीष्म ऋतु में एक फसल ली जाती है

प्रमुख किस्में

देशी किस्में-

पूसा शीतल, पूसा 120, पूसा रूबी- पूसा गौरव- अर्का विकास अर्का सौरभ और सोनाली।

हाइब्रिड किस्में: पूसा हाइब्रिड-1, पूसा हाइब्रिड-2, पूसा हाइब्रिड-4, रश्मि और अविनाश-2।

 

बंपर उत्पादन वाली किस्म- अर्का रक्षक

अन्य जानकारी

टमाटर का उपयोग विभिन्न व्यंजनों जैसे सूप चटनी, सॉस और सलाद में होता है

टमाटर में कैंसर रोधी यौगिक लाइकोपीन और एंटीऑक्सीडेंट कैरोटीन पाया जाता है

 

फसल की अवधि

फल लगना शुरू

रोपाई के करीब 50 से 55 दिन बाद

कटाई के लिए तैयार

किस्म के अनुसार, 60 से 100 दिन या इससे भी अधिक समय लग सकता है

लंबे समय तक उपज

एक बार फसल शुरू होने के बाद, यह 2 से 3 महीने तक उत्पादन दे सकती है

मुनाफा

प्रति हेक्टेयर उपज- एक हेक्टेयर में औसतन 800-1200 क्विंटल तक की पैदावार हो सकती है।

 

संभावित आयआय

यदि टमाटर ₹10 प्रति किलो बिके, तो ₹1000 क्विंटल (100 टन) की पैदावार से ₹10 लाख तक की कमाई संभव है

उच्च मांग और कीमत

बाजार में टमाटर की मांग और कीमत में उतार-चढ़ाव होता है, जो मुनाफे को प्रभावित कर सकता है

 

4 चुकंदर की फसल

चुकंदर ठंडे मौसम में अच्छी तरह उगता है, इसलिए इसकी खेती के लिए सबसे अच्छा समय सर्दियाँ (अक्टूबर से नवंबर) महिनों में होते हैं इस मौसम में उगाने से इसकी जड़ें मजबूत बनती हैं और शर्करा की मात्रा अधिक होती – इसकी उन्नत किस्मों में डेट्रॉइट डार्क रेड- मिश्र की कॉस्बी- किमसन गलोब और अर्ली वंडर शामिल होती हैं

 

बुवाई का सर्वोत्तम समय-

अक्टूबर से नवंबर तक का समय उत्तरी भारत और मैदानी इलाकों में सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इससे बेहतर पैदावार होती है- हालाँकि इसे लगभग साल भर उगाया जा सकता है लेकिन ठंडे मौसम में इसकी गुणवत्ता सबसे अच्छी होती है

तापमान-

चुकंदर के लिए अनुकूलतम दिन का तापमान \(60-70\)°F और रात का तापमान \(50-60\)°F होता है।

उन्नत किस्में

डेट्रॉइट डार्क रेडमिश्र की कॉस्बीकिमसन

गलोबअर्ली वंडर

खेती की विधि

बीज बोने से पहले मिट्टी को अच्छी तरह तैयार कर लें और उसमें पर्याप्त खाद मिलाएं।बुवाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें और खेत में जलभराव न होने दें।

सिंचाई

ठंड के मौसम में \(12-15\) दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।गर्मी के मौसम में सिंचाई का अंतराल \(7-10\) दिन रखें

इसकी कुछ उन्नत किस्में, जैसा कि आपने बताया

डेट्रॉइट डार्क रेड- मिश्र की कॉस्बी (Cosby)-किमसन गलोब-अर्ली वंडर

ये किस्में अच्छी उपज और गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं

जल्दी तैयार होने वाली

कुछ किस्में 45-50 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं

सामान्य किस्में

औसतन, चुकंदर 55-85 दिनों में पक जाता है- और बाजार में अच्छी कीमत के लिए दिसंबर और जनवरी में कटाई की जाती है

बड़े आकार के चुकंदर

पूर्ण आकार के चुकंदर को तैयार होने में 90 दिन तक कंपलीट होता है

मुनाफा

अनुमानित लागत

एक एकड़ में चुकंदर की खेती की लागत औसतन ₹15-20 हजार हो सकती है

संभावित कमाई

यदि बाजार भाव ₹20 प्रति किलो है, तो एक एकड़ से ₹1.60 से ₹2 लाख तक की कमाई हो सकती है

संभावित लाभ

खर्च निकालने के बाद, ₹1 से ₹1.5 लाख तक का शुद्ध लाभ हो सकता है

शलगम की फसल

शलगम को शरद ऋतु में उगाया जाता है क्योंकि यह ठंड और पाले को सहन कर सकता है। इसकी उन्नत किस्मों में लाल-4 (60 दिनों में तैयार) और सफेद-4 (50-55 दिनों में तैयार) प्रमुख हैं, जिनके अलावा परपल-टोप, पूसा-स्वर्णिमा, और स्नोवाल जैसी अन्य किस्में भी हैं।

शलगम की खेती के बारे में जानकारी

खेती का समय- 

शरद ऋतु (अक्टूबर-नवंबर)

जलवायु

ठंडी जलवायु उपयुक्त होती है, जिसके लिए \(20-25\) डिग्री सेल्सियस का तापमान अच्छा होता और लाभदायक होती हैं

मिट्टी-दोमट मिट्टी, जिसमें जैविक तत्व ज़्यादा हों

किस्में

लाल4- यह शरद ऋतु में लगाई जाती है और इसके पौधे 60 दिनों में तैयार हो जाती हैं

सफेद4- यह बारिश के मौसम में उगाई जाती है और 50-55 दिनों में तैयार हो जाती है

अन्य किस्में

परपल-टोप- पूसा-स्वर्णिमा, पूसा-चन्द्रिमा- पूसा-कंचन- पूसा-स्वेती- स्नोवाल

खेती के लिए महत्वपूर्ण

बीजों को (1.5) सेमी की गहराई में बोएं-पंक्तियों के बीच (30-40) सेमी और पौधों के बीच (6-8)सेमी की दूरी रखें-बीजों का थीरम (3) ग्राम प्रति किलो से उपचार करें ताकि जड़ गलन से बचाया जा सकें

उपज

अच्छी कृषि पद्धतियों के साथ औसतन 250-400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (लगभग 100-160 क्विंटल प्रति एकड़) की उपज प्राप्त की जा सकती है

बाजार मूल्य 

शलजम का औसत बाजार मूल्य लगभग ₹1000-₹4400 प्रति क्विंटल के बीच रह सकता है, जो स्थान और मौसम के अनुसार बदलता रहता है

संभावित आय और लाभ (प्रति एकड़ अनुमान)

औसत उपज

लगभग 100-120 क्विंटल प्रति एकड़।

औसत बाजार मूल्य: लगभग ₹1000 – ₹1500 प्रति क्विंटल (यह मूल्य काफी उतार-चढ़ाव वाला हो सकता है

कुल आय- ₹1,00,000 से ₹1,80,000 तक

लागत-प्रति एकड़ कुल निवेश लगभग ₹15,000 – ₹49,000 तक हो सकता है जो बीजऔर जुताई-सिंचाई आदि पर निर्भर करता है

शुद्ध लाभ- लागत घटाने के बाद, किसान ₹1 लाख से ₹1.65 लाख तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं

 

5 मुली की फसल महत्वपूर्ण  

 

मूली की खेती मैदानी और पहाड़ी दोनों इलाकों में होती है- जिसमें मैदानी इलाकों के लिए सितंबर से जनवरी और पहाड़ी इलाकों के लिए अगस्त तक बुवाई की जाने वाली फसल है

मूली की कुछ लोकप्रिय किस्मों में जापानी सफेद- पूसा देशी- पूसा चेतकी-बॉम्बे रेड और पूसा रेशमी शामिल

ठंडे मौसम वाले क्षेत्रों के लिए रैपिड रेड ह्वाइट टिप्स- स्कारलेट ग्लोब और पूसा हिमानी जैसी किस्में उपयुक्त हैं

 बुवाई का समय

मैदानी इलाके- सितंबर से जनवरी तक

पहाड़ी इलाके- जुलाई से सितंबर तक

किस्में

मैदानी इलाकों के लिए

जापानी सफ़ेद पूसा देशी -पूसा चेतकी अर्का निशांत जौनपुरी- बॉम्बे रेड” पूसा रेशमी- पंजाब अगेती पंजाब सफ़ेद आई.एच. आर 1-1 और कल्याणपुर सफ़ेद

 

शीतोष्ण (ठंडे) प्रदेशों के लिए

रैपिड रेड, ह्वाइट टिप्स, स्कारलेट ग्लोब और पूसा हिमानी

मूली की फसल तैयार होने में लगने वाला समय

किस्म पर निर्भर: मूली की कटाई के लिए तैयार होने का समय उसकी किस्म पर निर्भर करता है, जो 25 से 60 दिनों तक हो सकता है।

औसतन: आमतौर पर, उन्नत किस्मों को तैयार होने में 40 से 50 दिन लगते हैं।

तेज वृद्धि वाली किस्में: कुछ किस्में, जैसे पूसा चेतकी, 30 दिनों में तैयार हो सकती हैं।

 

संभावित मुनाफा

उत्पादन- देसी किस्मों से 250-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और यूरोपीय किस्मों से 80-100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन हो सकता है

बाजार मूल्य

मूली का न्यूनतम मूल्य ₹500 से ₹1200 प्रति क्विंटल हो सकता है

 कमाई

इस हिसाब से एक हेक्टेयर खेत से किसान लगभग ₹1.5 लाख तक का मुनाफा कमाया जा सकता है।

 

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Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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