जनजातियों ने बनाया अपना सुरक्षा मंच, धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करने की किया मांग

जनजातियों ने बनाया अपना सुरक्षा मंच, धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करने की किया मांग

नारायणपुर -धर्मांतरण के विषय में उक्त विसंगति के कारण अपने हाथों से वंचित जनजातियों ने आज नारायणपुर में जनजाति सुरक्षा मंच का विशाल भव्य आयोजन किया। इस अवसर पर प्रदेश सहित झारखंड से भी वक्ता नारायणपुर पहुंचे ।
इस अवसर पर भोजराज नाग जनजाति सुरक्षा मंच प्रदेश संयोजक , विकास मरकाम अनुसूचित जनजाति प्रदेश अध्यक्ष, केदार कश्यप पूर्व कैबिनेट मंत्री सहित हजारों की संख्या में आदिवासियों ने जनजातीय प्रतिनिधियों ने हिस्सेदारी की। इस मंच का एकमात्र उद्देश्य जनजातियां समाज में से धर्मांतरण होकर अपने पूर्वजों (परंपरागत -सनातन) धर्म को छोड़कर ईसाई या मुस्लिम बनकर आरक्षण का लाभ उठाने के विरुद्ध आवाज उठाना है और असली जनजाति समाज को उसका हक दिलाना है।
संविधान की इस भयानक विसंगति को लेकर 1966- 67 में बिहार के विख्यात जनजाति राजनेता स्वर्गीय श्री कार्तिक उराव ने 15 जून को तत्कालीन प्रधानमंत्री को ज्ञापन दिया, जिसमें 235 सांसदों के हस्ताक्षर थे । उन्होंने जापान मैं कहां की इस संबंध में संवैधानिक प्रावधान किया जाए की जो लोग धर्म परिवर्तन कर जनजाति सदस्यों का हक छीन रहे हैं, उन्हें जनजाति सदस्य नहीं माना जाए। सरकार द्वारा गठित संयुक्त संसदीय समिति ने भी यही सिफारिश की थी। स्वर्गीय श्री कार्तिक उराव ने अपनी इसी मांग को पुनः 10 नवंबर 1970 को उठाया और फिर प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा जिसमें हस्ताक्षर करने वाले सांसदों के इतने प्रबल समर्थन और जनजाति समाज के आक्रोश को देखकर तत्काल प्रधानमंत्री ने जनजाति समाज को भरोसा दिलाया था की, सरकार इस पर समुचित कार्यवाही कर जनजातियों के साथ हो रहे अन्याय को दूर करेगी। परंतु अभी तक ऐसा नहीं हुआ



