CG: कमरछठ पर माताओं ने रखा निर्जला व्रत, संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना
सगरी पूजन कर माताओं ने की शिव-पार्वती और गणेश की आराधना, पसहर चावल और छह भाजियों की रही विशेष मान्यता

कमरछठ पर माताओं ने रखा निर्जला व्रत, संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना
सगरी पूजन कर माताओं ने की शिव-पार्वती और गणेश की आराधना, पसहर चावल और छह भाजियों की रही विशेष मान्यता
दंडकारण्य दर्पण | नारायणपुर
रिपोर्टर बोधन नाग
नारायणपुर जिले में बुधवार को लोक आस्था का पर्व कमरछठ श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कमरछठ को हलषष्ठी और खमरछठ के नाम से भी जाना जाता है। संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर माताओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखा। सुबह से ही शहर के विभिन्न मोहल्लों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सगरी पूजन का सिलसिला शुरू हो गया था।
व्रती माताओं ने सुबह महुए की दातुन कर व्रत का संकल्प लिया। इसके बाद मिट्टी से बनाई गई सगरी यानी छोटे तालाब में दूध, दही, फूल और बेलपत्र अर्पित किए गए। महिलाओं ने भगवान शिव-पार्वती और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपनी संतानों की खुशहाली और दीर्घायु की कामना की।
छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा और आस्था से जुड़ा पर्व
कमरछठ छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संस्कृति और धार्मिक आस्था से जुड़ा प्रमुख पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पर्व का संबंध भगवान बलराम से माना जाता है। मान्यता है कि भगवान बलराम का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हुआ था। इसी कारण इस दिन व्रत और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
पसहर चावल और छह भाजियों की परंपरा
कमरछठ पर्व की अपनी विशिष्ट खान-पान परंपरा है। इस दिन हल से जुती हुई जमीन से प्राप्त अनाज या ऐसी सामग्री का सेवन नहीं किया जाता। व्रती महिलाएं प्राकृतिक रूप से तालाब और आसपास के क्षेत्रों में उगने वाले पसहर चावल तथा छह प्रकार की भाजियों का उपयोग करती हैं।
पसहर चावल और छह भाजियों को काली मिर्च तथा पानी के साथ पकाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है। इसके साथ भैंस के दूध, दही और घी का भी पर्व में विशेष महत्व माना जाता है।
कथा श्रवण के साथ संतान की खुशहाली की प्रार्थना
पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने समूह में बैठकर कमरछठ की कथा सुनी। इस दौरान परिवार की सुख-शांति और संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की गई।
पर्व को लेकर नारायणपुर के बाजारों में भी दिनभर रौनक बनी रही। पूजा सामग्री, पसहर चावल और विभिन्न प्रकार की भाजियों की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ नजर आई। शाम को पूजा-अर्चना पूर्ण करने के बाद व्रती माताओं ने व्रत का पारण किया।
कमरछठ पर्व ने एक बार फिर नारायणपुर में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा, आस्था और मातृत्व की भावना को जीवंत कर दिया।




