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International: चीन से आया ग्लेशियर का सैलाब, नेपाल में भारी तबाही, 160 से ज्यादा मौतें

ग्लेशियर टूटने के बाद पानी और मलबे का सैलाब, नेपाल में भारी तबाही

चीन से आया ग्लेशियर का सैलाब, नेपाल में भारी तबाही, 160 से ज्यादा मौतें

दंडकारण्य दर्पण | विशेष रिपोर्ट

नेपाल और चीन की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों के अचानक खिसकने के बाद तेज बहाव ने नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी को उफान पर ला दिया। देखते ही देखते पानी और मलबे का सैलाब कई इलाकों में घुस गया और रास्ते में आने वाले घर, पुल, सड़कें तथा दूसरी महत्वपूर्ण संरचनाएं बह गईं।

 

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और चीन में इस आपदा से 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल में 157 से अधिक मौतों की पुष्टि हुई है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी तीन मौतों की सूचना है। सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

क्या यह GLOF था

इस घटना को शुरुआती रिपोर्टों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF से जोड़ा गया था। हालांकि उपलब्ध ताजा वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार तबाही की तत्काल वजह ग्लेशियर से जुड़े बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से का अचानक खिसकना यानी आइस रॉक एवलॉन्च और उसके बाद आया फ्लैश फ्लड बताई जा रही है। इसलिए इसे सीधे तौर पर GLOF कहना अभी पूरी तरह पुष्ट नहीं माना जा सकता।

GLOF की स्थिति में ग्लेशियर से बनी झील या प्राकृतिक बर्फ और मलबे की झील का बांध अचानक टूट जाता है। इसके बाद लाखों घन मीटर पानी बहुत तेज गति से नीचे की ओर आता है। पानी के साथ चट्टान, मिट्टी, पेड़ और अन्य मलबा आने से सामान्य बाढ़ की तुलना में तबाही कई गुना बढ़ जाती है।

सबसे ज्यादा असर कहां हुआ

नेपाल में सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका रसुवा जिला है। चीन सीमा के पास स्थित तिमुरे और रसुवागढ़ी क्षेत्र में भारी तबाही हुई है। इसके बाद बाढ़ और मलबे का असर भोटेकोशी तथा त्रिशूली नदी के रास्ते नीचे के क्षेत्रों तक पहुंचा।

रिपोर्टों में नुवाकोट और धादिंग जिलों में भी बड़े नुकसान की जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में गोरखा और चितवन तक नदी तंत्र के निचले इलाकों में अलर्ट और प्रभाव की बात कही गई है।

चीन की तरफ तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी और ग्यिरोंग पोर्ट क्षेत्र में भी भारी नुकसान हुआ है। यह क्षेत्र नेपाल और चीन के बीच व्यापार तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है।

सड़कें और पुल तबाह

बाढ़ की तेज धारा ने दर्जनों पुलों और सड़कों को नुकसान पहुंचाया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़क प्रभावित या नष्ट हुई है। कई स्थानों पर बिजली और संचार व्यवस्था भी बाधित हुई है।

जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ की चपेट में आने से कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं के संचालन और निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं, जिससे नेपाल के ऊर्जा ढांचे पर भी असर पड़ा है।

सैकड़ों लोग अब भी लापता

इस आपदा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ विदेशी नागरिक और कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले यात्री भी लापता बताए जा रहे हैं। भारत समेत अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अन्य देशों के नागरिकों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है।

नेपाल और चीन दोनों तरफ बड़े पैमाने पर हेलीकॉप्टर और बचाव दल लगाए गए हैं। खराब मौसम, टूटे रास्तों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण राहत और बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आ रही हैं।

कितना आर्थिक नुकसान हुआ

इस समय तक पूरे नुकसान का अंतिम आधिकारिक आर्थिक आकलन सामने नहीं आया है। इसलिए कुल आर्थिक नुकसान की कोई निश्चित रकम बताना जल्दबाजी होगी। लेकिन सड़क, पुल, बिजली, जलविद्युत परियोजनाओं, घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और सीमा क्षेत्र की सुविधाओं को हुए नुकसान को देखते हुए नुकसान काफी बड़ा और अरबों नेपाली रुपये में होने की आशंका है।

यह आपदा हिमालयी क्षेत्र में तेजी से बदलते ग्लेशियरों और उनसे जुड़े प्राकृतिक खतरों की गंभीर चेतावनी भी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालय में ग्लेशियरों की अस्थिरता बढ़ने के साथ ऐसे अचानक आने वाले बाढ़ और मलबे के सैलाब का खतरा भविष्य में और गंभीर हो सकता है।

 

नेपाल की तबाही के बाद भारत पर भी बाढ़ का खतरा

 

दंडकारण्य दर्पण | विशेष रिपोर्ट

 

नेपाल में ग्लेशियर और पहाड़ी क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ के बाद अब भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी चिंता बढ़ गई है। नेपाल से निकलने वाली नदियों में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में इसका असर भारत के मैदानी क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है।

 

सबसे ज्यादा निगाह बिहार पर है। नेपाल से आने वाली गंडक नदी के कारण पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। प्रशासन नदी के जलस्तर और बैराजों की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।

 

उत्तर प्रदेश में भी नेपाल से आने वाली नदियों के कारण महराजगंज और कुशीनगर समेत सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है। राप्ती और घाघरा नदी तंत्र में जलस्तर बढ़ने की स्थिति पर भी निगरानी रखी जा रही है।

 

संभावित खतरे को देखते हुए राहत और बचाव एजेंसियों को तैयार रखा गया है। हालांकि फिलहाल भारत में नेपाल जैसी व्यापक तबाही की स्थिति सामने नहीं आई है।

 

नेपाल की पहाड़ियों में शुरू हुआ यह सैलाब अब भारत के लिए भी चेतावनी बन गया है। आने वाले घंटों में नदियों के जलस्तर और नेपाल से आने वाले पानी की स्थिति पर सबकी नजर रहेगी।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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