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CG: नक्सल हिंसा से पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे मां मातंगी धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमसाईं

दंडवन, छिनारी और कलेपाल में हिंसा में मारे गए ग्रामीणों के परिजनों से मिले, आर्थिक सहायता के साथ राशन और वस्त्र देकर बढ़ाया हौसला

नक्सल हिंसा से पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे मां मातंगी धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमसाईं

 

दंडवन, छिनारी और कलेपाल में हिंसा में मारे गए ग्रामीणों के परिजनों से मिले, आर्थिक सहायता के साथ राशन और वस्त्र देकर बढ़ाया हौसला

नारायणपुर ब्यूरो। अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के बीच सेवा और संवेदना की पहल देखने को मिली। मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर परम पूज्य डॉ. प्रेमसाईं महाराज ने नारायणपुर प्रवास के दौरान दंडवन, छिनारी और कलेपाल पहुंचकर नक्सल हिंसा में अपने परिजनों को खो चुके परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने परिवारों की स्थिति जानी और आर्थिक सहायता के साथ राशन सामग्री एवं वस्त्र उपलब्ध कराकर उनके साथ खड़े रहने का संदेश दिया।

 

पीड़ित परिवारों से मिले, आर्थिक सहायता दी

 

डॉ. प्रेमसाईं महाराज दंडवन में पंचम दास मानिकपुरी, छिनारी में सुखलाल गावड़े और कलेपाल में मानकु पोटाई के परिजनों से मिले। उन्होंने परिवारों की पीड़ा सुनी और उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी ली।

 

इस दौरान पंचम दास मानिकपुरी और सुखलाल गावड़े के परिजनों को 31-31 हजार रुपये तथा मानकु पोटाई के परिजनों को 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। इसके अलावा जरूरत के अनुसार राशन सामग्री और वस्त्र भी उपलब्ध कराए गए।

 

बोले, अपनों को खोने का दर्द कोई सहायता पूरी नहीं कर सकती

 

डॉ. प्रेमसाईं महाराज ने कहा कि परिवार के किसी सदस्य को खोने के बाद पैदा हुई कमी को दुनिया का कोई भी सहयोग पूरा नहीं कर सकता। सहायता का उद्देश्य किसी तरह का प्रदर्शन नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर उन्हें यह भरोसा दिलाना है कि वे अकेले नहीं हैं।

 

उन्होंने कहा कि इन परिवारों की वास्तविक समस्याओं और जरूरतों को समझना जरूरी है। उनकी समस्याओं को शासन और प्रशासन तक पहुंचाकर हरसंभव सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

 

नक्सल हिंसा में मारे गए ग्रामीणों को भी मिले सम्मान

 

डॉ. प्रेमसाईं महाराज ने कहा कि देश और क्षेत्र की सुरक्षा में तैनात जवानों के शहीद होने पर समाज और शासन उनके परिवारों के साथ खड़ा होता है। इसी तरह नक्सल हिंसा में मारे गए निर्दोष ग्रामीणों और उनके परिवारों की पीड़ा को भी समझने की आवश्यकता है।

 

उन्होंने कहा कि हिंसा में जान गंवाने वाले ग्रामीणों के परिवारों का सम्मान और सहयोग समाज की जिम्मेदारी है।

 

ग्रामीणों से आत्मीय संवाद

 

अपने बीच डॉ. प्रेमसाईं महाराज को देखकर ग्रामीणों में उत्साह और भावुकता का माहौल रहा। उन्होंने परिवारों से आत्मीय संवाद किया और उन्हें दर्द निवारक तेल तथा मां बगलामुखी माता के यज्ञ की भभूत प्रदान की।

 

दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचकर की गई इस पहल से ग्रामीणों को यह भरोसा मिला कि उनकी समस्याओं और पीड़ा को सुनने तथा समझने वाले लोग उनके साथ हैं।

 

शिक्षा को बदलाव का माध्यम बनाने पर जोर

 

डॉ. प्रेमसाईं महाराज का सेवा कार्य केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। नक्सलवाद के कारण लंबे समय तक शिक्षा से प्रभावित रहे क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने का भी प्रयास किया जा रहा है।

 

जरूरतमंद बच्चों को किताबें, स्कूल बैग, चप्पल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। उनका कहना है कि अब हालात बदल रहे हैं। बच्चे नियमित रूप से स्कूल जाएं, शिक्षा हासिल करें और अपने क्षेत्र का नाम रोशन करें।

 

गढ़बेंगाल राम मंदिर निर्माण समिति को 50 हजार रुपये की सहायता

 

नारायणपुर प्रवास के दौरान डॉ. प्रेमसाईं महाराज गढ़बेंगाल स्थित राम मंदिर भी पहुंचे। उन्होंने मंदिर निर्माण समिति के सदस्यों और श्रद्धालुओं से मुलाकात की तथा मंदिर निर्माण के लिए 50 हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान की। उन्होंने शीघ्र ही 50 हजार रुपये और सहयोग देने का आश्वासन दिया।

 

सेवा को बनाया साधना का माध्यम

 

अबूझमाड़ और बस्तर के दुर्गम क्षेत्रों में जरूरतमंदों के बीच पहुंचकर सेवा करने वाले डॉ. प्रेमसाईं महाराज का कहना है कि दीन दुखियों की सहायता करना उनकी साधना का हिस्सा है। शिक्षा, जरूरतमंद परिवारों की सहायता और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से वे ग्रामीणों के बीच सकारात्मकता और विश्वास का संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

 

बीहड़ों तक पहुंच रही संवेदना

 

अबूझमाड़ के जिन इलाकों में लंबे समय तक हिंसा और भय का असर रहा, वहां सेवा और संवेदना की पहल बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत कर रही है। नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी पीड़ा सुनना, उन्हें सम्मान देना और जरूरत के समय सहयोग करना उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

 

ये रहे मौजूद

 

इस दौरान नारायणपुर के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अभिषेक बैनर्जी, पत्रकार राजमन कश्यप, सूरज सरकार, दिनेश रजक और अनुज जोशी मौजूद रहे।

 

दंडकारण्य दर्पण

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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