
नारायणपुर। कभी पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने वाले नारायणपुर जिले के ग्राम करलखा निवासी सुरेन्द्र नाग आज प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की बदौलत आत्मनिर्भर किसान बन चुके हैं। सरकारी योजना का लाभ उठाकर उन्होंने अपनी निजी भूमि पर आधुनिक तालाब का निर्माण कराया और अब मछली, झींगा तथा मुर्गी पालन के माध्यम से हर वर्ष लाखों रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता आज जिले के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
वर्ष 2022-23 में सुरेन्द्र नाग ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अपनी एक हेक्टेयर भूमि पर लगभग सात लाख रुपये की लागत से तालाब का निर्माण कराया। इस परियोजना में उन्हें 4.20 लाख रुपये का शासकीय अनुदान मिला, जबकि शेष 2.80 लाख रुपये उन्होंने स्वयं निवेश किए। शासन की सहायता और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने अपने जीवन की नई शुरुआत की।
तालाब तैयार होने के बाद मत्स्य विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण की मदद से उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन शुरू किया। वर्तमान में उनके तालाब से प्रतिवर्ष लगभग 1000 से 2000 किलोग्राम मछली और करीब 150 किलोग्राम झींगा का उत्पादन हो रहा है। इससे उन्हें हर साल लगभग 2.50 लाख से 3.50 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में संचालित योजनाओं का लाभ उन्हें लगातार मिलता रहा। वर्ष 2025-26 में मत्स्य विभाग ने झींगा सह मछली पालन योजना के तहत उन्हें गुणवत्तापूर्ण झींगा बीज उपलब्ध कराया, जिससे उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। अब सुरेन्द्र नाग मत्स्य पालन के साथ झींगा और मुर्गी पालन भी कर रहे हैं, जिससे उनकी आय के कई स्थायी स्रोत विकसित हो चुके हैं।
सुरेन्द्र नाग का कहना है कि यदि सरकारी योजनाओं का लाभ सही समय पर मिले और हितग्राही पूरी मेहनत और लगन से कार्य करें, तो आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करना कठिन नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है।
नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशन में जिले में हितग्राही मूलक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है। सुरेन्द्र नाग की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं और मेहनत का सही मेल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
आज सुरेन्द्र नाग की कहानी उन किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आधुनिक मत्स्य पालन और अन्य कृषि आधारित व्यवसायों के माध्यम से अपनी आय बढ़ाकर आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं।
दंडकारण्य दर्पण




