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National News: ‘मन की बात’ में गूंजा छत्तीसगढ़ का वन्यजीव संरक्षण मॉडल

बरनवापारा अभयारण्य में काले हिरणों की वापसी बनी सफलता की मिसाल

दंडकारण्य दर्पण | विशेष खबर

 

 

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले स्थित बरनवापारा वन्यजीव अभयारण्य आज काले हिरणों के पुनर्जीवन का मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस प्रयास का उल्लेख करते हुए राज्य की सराहना की है, जिसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।

 

 

पूरी तरह समाप्त हो चुके थे काले हिरण

 

करीब 245 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य में एक समय काले हिरण पूरी तरह खत्म हो चुके थे। लेकिन अब योजनाबद्ध प्रयासों, वैज्ञानिक प्रबंधन और सतत निगरानी के चलते यहां इनकी संख्या बढ़कर लगभग 200 तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि अगर सही दिशा में प्रयास किए जाएं तो विलुप्त होती प्रजातियों को फिर से जीवित किया जा सकता है।

वैज्ञानिक प्रबंधन से मिली सफलता

 

वन विभाग द्वारा काले हिरणों के संरक्षण के लिए विशेष रणनीति अपनाई गई। खुले घास के मैदानों का विकास, जल निकासी की बेहतर व्यवस्था और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसे कदम उठाए गए। इसके साथ ही अभयारण्य में लगातार निगरानी भी सुनिश्चित की गई, जिससे इनकी सुरक्षा और अनुकूल वातावरण बना रहा।

 

शुरुआती चुनौतियों के बाद मिली कामयाबी

 

संरक्षण के शुरुआती दौर में कई चुनौतियां सामने आईं। बीमारी के कारण कुछ काले हिरणों की मौत भी हुई, लेकिन वन विभाग ने इन समस्याओं से सीख लेते हुए व्यवस्थाओं में सुधार किया। बेहतर चिकित्सकीय सुविधाओं और देखभाल के चलते अब स्थिति काफी बेहतर हो गई है।

 

भविष्य में खुले जंगल में छोड़े जाने की तैयारी

 

काले हिरणों की लगातार बढ़ती संख्या अब इस दिशा में संकेत दे रही है कि आने वाले समय में इन्हें खुले जंगल में छोड़ने की योजना को भी अमलीजामा पहनाया जा सकता है। यह न केवल जैव विविधता को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

 

 

 

राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

 

‘मन की बात’ में इस पहल का जिक्र होने के बाद छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए वन विभाग और संबंधित टीमों के प्रयासों की सराहना की है।

 

छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अब देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संदेश देता है।

Bindesh Patra

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