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छत्तीसगढ़नारायणपुर

Chhattisgarh : बस्तर में विश्वास का नया बीज, पुनर्वासित माओवादी कैडरों द्वारा ‘वायान वाटिका’ में पौधारोपण

 

 जिला नारायणपुर में स्थानीय समुदाय के वरिष्ठजनों की उपस्थिति में पुनर्वासित माओवादी कैडरों द्वारा किए गए पौधारोपण ने आशा और शांतिपूर्ण भविष्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का एक सशक्त प्रतीक प्रस्तुत किया।

नारायणपुर जिला मुख्यालय स्थित पुनर्वास केंद्र के पौधरोपण स्थल का नाम “वायान वाटिका” रखा गया है, जिसका अर्थ स्थानीय आदिवासी गोंडी भाषा में “आशा और भविष्य की बगिया” होता है।

 

वायान वाटिका में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम नारायणपुर और अबुझमाड़ जैसे क्षेत्रों में—जो लंबे समय तक अनिश्चितता से प्रभावित रहे—विश्वास-निर्माण प्रक्रियाओं के गहराते स्वरूप को प्रतिबिंबित करता है।

 

स्थानीय समुदाय के वरिष्ठजनों की क्षेत्र की सुरक्षा, न्याय और सेवा हेतु बढ़ती सक्रिय भागीदारी बस्तर में सामाजिक पुनर्समावेशन और समावेशी विकास के लिए एक परिवर्तनकारी मार्ग को दर्शाती है।

 

“पूना मारगम: पुनर्वास से सामाजिक पुनर्समावेशन” पहल के तहत आज वायान वाटिका, नारायणपुर में एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 25 नवंबर को मुख्यधारा में शामिल हुए 28 माओवादी कैडरों ने वे पौधे रोपे, जिन्हें समुदाय के वरिष्ठजनों ने पुनर्समावेशन के प्रतीक के रूप में उन्हें प्रदान किया था।

 

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक, श्री सुन्दरराज पट्टलिंगम ने बताया कि आज का पौधारोपण कार्यक्रम केवल एक प्रतीकात्मक गतिविधि नहीं है बल्कि आशा और स्थायी शांति के रोपण की प्रक्रिया को दर्शाता है—उन लोगों के लिए जिन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़ा है और उन समुदायों के लिए जो विश्वास और अपनत्व के साथ उन्हें स्वीकार कर रहे हैं।

 

बस्तर रेंज IGP ने आगे कहा कि समुदाय के वरिष्ठजनों की सक्रिय भागीदारी—25 नवंबर को हिंसा का मार्ग छोड़ चुके 28 माओवादी कैडरों के स्वागत से लेकर आज के पौधारोपण तक—सामाजिक सौहार्द की मजबूती और आपसी विश्वास के पुनर्निर्माण का संकेत है। आज रोपा गया प्रत्येक पौधा एक ऐसे जीवन का प्रतीक है जो अतिवाद से लौटकर शांति, सम्मान और रचनात्मक प्रगति की ओर अग्रसर हुआ है।

 

नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक, श्री रॉबिनसन गुरिया ने कहा कि यह पौधारोपण कार्यक्रम नारायणपुर जिले, विशेषकर अबुझमाड़ जैसे भीतरी इलाकों में—जो कभी अनिश्चितता और कठिनाइयों से प्रभावित थे—विश्वास-निर्माण प्रक्रियाओं की मजबूत होती गति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सतत् शांति विश्वसनीय सुरक्षा उपायों और साझा जिम्मेदारी पर आधारित सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से ही संभव हो पा रही है।

 

आज का कार्यक्रम “पूना मारगम: पुनर्वास से सामाजिक पुनर्समावेशन” पहल के बढ़ते प्रभाव को और सुदृढ़ करता है तथा दर्शाता है कि बस्तर स्थायी शांति और समावेशी विकास की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है।

Bindesh Patra

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