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Chhattisgarh: आतिशबाज़ी से जगमगा उठा आसामान नई पीढ़ी को परम्परा संस्कृति और सभ्यता से जोड़ने का उद्देश्य रावण दहन का किया गया आयोजन 

आतिशबाज़ी से जगमगा उठा आसामान नई पीढ़ी को परम्परा संस्कृति और सभ्यता से जोड़ने का उद्देश्य रावण दहन का किया गया आयोजन

श्री बाल समाज लीला मंडली, शीतला मंदिर कुम्हारपारा द्वारा रावण दहन कार्यक्रम का सफल आयोजन शीतला मंदिर कुम्हारपारा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर रावण भाटा में श्री बाल समाज लीला मंडली द्वारा परंपरागत उत्साह और श्रद्धा के साथ रावण दहन किया गया। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों की उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ धार्मिक अनुष्ठानों एवं श्रीराम-सीता की आरती के साथ किया गया तथा मंच पर कलाकारों ने रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का जीवंत मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा रावण वध की लीला प्रस्तुत की गई, जिसके उपरांत रावण के पुतले का दहन किया गया।

रावण दहन के साथ ही आकाश आतिशबाज़ी से जगमगा उठा और उपस्थित जनसमूह ने विजयादशमी के इस पर्व पर “सत्य की असत्य पर विजय” का संदेश आत्मसात किया।

यह उल्लेखनीय है कि श्री बाल समाज लीला मंडली का यह गौरवशाली इतिहास वर्ष 1979 से प्रारंभ हुआ, जब कुछ युवाओं ने मिलकर इस सांस्कृतिक परंपरा की नींव रखी थी। तब से लेकर अब तक यह मंडली लगातार रामलीला एवं रावण दहन के माध्यम से समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के संरक्षण एवं प्रसार का कार्य करती आ रही है। यह परंपरा अब नगर की पहचान बन चुकी है और प्रत्येक वर्ष विजयादशमी पर पूरे उत्साह के साथ मनाई जाती है।

श्री बाल समाज लीला मंडली के पदाधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को हमारी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है साथ ही उन्होंने सभी सहयोगियों, नगरवासियों एवं प्रशासन का आभार व्यक्त किया गया। से जगमगा उठा आसामान रावण दहन अपनी संस्कृति और सभ्यता को बचाने लिए इसका आयोजन

 

श्री बाल समाज लीला मंडली, शीतला मंदिर कुम्हारपारा द्वारा रावण दहन कार्यक्रम का सफल आयोजन शीतला मंदिर कुम्हारपारा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर रावण भाटा में श्री बाल समाज लीला मंडली द्वारा परंपरागत उत्साह और श्रद्धा के साथ रावण दहन किया गया। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों की उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ धार्मिक अनुष्ठानों एवं श्रीराम-सीता की आरती के साथ किया गया तथा मंच पर कलाकारों ने रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का जीवंत मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा रावण वध की लीला प्रस्तुत की गई, जिसके उपरांत रावण के पुतले का दहन किया गया।

रावण दहन के साथ ही आकाश आतिशबाज़ी से जगमगा उठा और उपस्थित जनसमूह ने विजयादशमी के इस पर्व पर “सत्य की असत्य पर विजय” का संदेश आत्मसात किया।

यह उल्लेखनीय है कि श्री बाल समाज लीला मंडली का यह गौरवशाली इतिहास वर्ष 1979 से प्रारंभ हुआ, जब कुछ युवाओं ने मिलकर इस सांस्कृतिक परंपरा की नींव रखी थी। तब से लेकर अब तक यह मंडली लगातार रामलीला एवं रावण दहन के माध्यम से समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के संरक्षण एवं प्रसार का कार्य करती आ रही है। यह परंपरा अब नगर की पहचान बन चुकी है और प्रत्येक वर्ष विजयादशमी पर पूरे उत्साह के साथ मनाई जाती है।

श्री बाल समाज लीला मंडली के पदाधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को हमारी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है साथ ही उन्होंने सभी सहयोगियों, नगरवासियों एवं प्रशासन का आभार व्यक्त किया गया।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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