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CG: रेलवे में बच्चों की तस्करी का बदला तरीका, अब AC और स्लीपर कोच पर तस्करों की नजर

2-3 बच्चों के छोटे समूह बनाकर अलग-अलग ट्रेनों से भेजने का तरीका, रोजगार का झांसा देकर दूसरे राज्यों और महानगरों तक पहुंचाने की आशंका

रेलवे में बच्चों की तस्करी का बदला तरीका, अब AC और स्लीपर कोच पर तस्करों की नजर

 

2-3 बच्चों के छोटे समूह बनाकर अलग-अलग ट्रेनों से भेजने का तरीका, रोजगार का झांसा देकर दूसरे राज्यों और महानगरों तक पहुंचाने की आशंका

 

रायपुर। रेलवे के जरिए बच्चों की तस्करी के मामलों में तस्करों ने अपना तरीका बदल दिया है। पहले जहां बच्चों को बड़ी संख्या में जनरल कोच में ले जाने की कोशिश की जाती थी, वहीं अब तस्कर जांच से बचने के लिए बच्चों को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर AC और स्लीपर कोच से यात्रा करा रहे हैं।

रेलवे स्टेशन पर बच्चों की तस्करी रोकने के लिए जांच करती सुरक्षा टीम
रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में बच्चों की तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी जारी।

जानकारी के अनुसार अब एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों को किसी एक ट्रेन में ले जाने से बचा जा रहा है। इसके बजाय 2 से 3 बच्चों के छोटे समूह बनाए जाते हैं और उन्हें अलग-अलग ट्रेनों के जरिए गंतव्य तक भेजने की कोशिश की जाती है। कई मामलों में पूरी यात्रा एक ही ट्रेन से नहीं कराई जाती, बल्कि अलग-अलग रेलवे रूट का इस्तेमाल किया जाता है।

 

रोजगार का झांसा देकर महानगरों तक ले जाने के मामले

 

बच्चों को रोजगार, बेहतर मजदूरी और अच्छे भविष्य का झांसा देकर दूसरे राज्यों और महानगरों तक ले जाने के मामले सामने आते रहे हैं। विशेष रूप से झारखंड और पश्चिम बंगाल से आने वाले बच्चों को लेकर रेलवे सुरक्षा एजेंसियां सतर्कता बरत रही हैं।

 

रेलवे चाइल्ड हेल्पलाइन, रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेलवे पुलिस की टीमें रेलवे स्टेशनों तथा ट्रेनों में लगातार निगरानी और जांच अभियान चला रही हैं। संदेह होने पर बच्चों से बातचीत कर उनकी यात्रा, गंतव्य, परिवार और उनके साथ मौजूद व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

 

अब कपड़ों से नहीं, बातचीत से पहचानने की कोशिश

 

तस्करी के बदलते तरीकों के बीच निगरानी का तरीका भी बदला गया है। अब केवल बच्चों के पहनावे या उनके साथ मौजूद व्यक्ति को देखकर ही संदेह नहीं किया जा रहा है। सुरक्षा टीमें बच्चों से सामान्य बातचीत कर यह जानने का प्रयास करती हैं कि वे कहां से आए हैं, कहां जा रहे हैं, उनके साथ कौन है और यात्रा का उद्देश्य क्या है।

 

इस दौरान बच्चों के जवाबों में विरोधाभास या उनके साथ मौजूद व्यक्ति की जानकारी संदिग्ध पाए जाने पर टीम आगे पूछताछ करती है और जरूरत पड़ने पर बच्चे को सुरक्षित संरक्षण में लेकर संबंधित प्रक्रिया पूरी करती है।

 

एक साल में करीब 270 बच्चों को सुरक्षित बचाया गया

 

रेलवे सुरक्षा से जुड़ी टीमों की कार्रवाई के दौरान पिछले एक साल में रेलवे स्टेशन और ट्रेनों से करीब 270 बच्चों को सुरक्षित बचाए जाने की जानकारी सामने आई है। इन मामलों में बच्चों की पहचान और उनके परिवार से संपर्क की प्रक्रिया के साथ उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

 

रेलवे अधिकारियों और बाल संरक्षण से जुड़ी टीमों का कहना है कि बच्चों की तस्करी रोकने के लिए लगातार निगरानी के साथ यात्रियों की जागरूकता भी जरूरी है। यदि किसी यात्री को ट्रेन या स्टेशन पर कोई बच्चा संदिग्ध परिस्थितियों में किसी व्यक्ति के साथ दिखाई देता है, तो तत्काल रेलवे सुरक्षा कर्मियों या चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी जा सकती है।

 

बदलते तौर-तरीकों के बीच रेलवे सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती यह है कि तस्करों द्वारा अपनाए जा रहे नए तरीकों की पहचान कर बच्चों को समय रहते सुरक्षित किया जाए।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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