
संकट की घड़ी में लोगों के बीच पहुंचे मंत्री केदार कश्यप, बाढ़ प्रभावित परिवारों को दिया भरोसा
नारायणपुर। अबूझमाड़ क्षेत्र में आई बाढ़ के बाद जनजीवन को सामान्य बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं। इस बीच वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा नारायणपुर विधायक केदार कश्यप ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने पालकी और दोण्डरीबेड़ा सहित प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
बताया गया कि क्षेत्र में बाढ़ के बाद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए थे और कई स्थानों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ था। इसके बावजूद मंत्री केदार कश्यप प्रभावित गांवों में पहुंचे और लोगों के बीच बैठकर उनकी परेशानियों को गंभीरता से सुना। उन्होंने राहत सामग्री वितरित करने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को सहायता राशि के चेक भी सौंपे।
दौरे के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों को नुकसान हुआ है, उन्हें शासन की सभी निर्धारित सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य, खाद्यान्न, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएं।
ग्रामीणों से बातचीत के दौरान मंत्री ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ी है। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि किसी भी प्रभावित परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और सभी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
स्थानीय लोगों ने भी मंत्री के दौरे को राहत और विश्वास का संदेश बताया। उनका कहना था कि संकट की घड़ी में जनप्रतिनिधि का गांव तक पहुंचना और सीधे संवाद करना लोगों का मनोबल बढ़ाता है। इससे प्रभावित परिवारों में यह विश्वास मजबूत होता है कि शासन और प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है।
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में बाढ़ के बाद मंत्री केदार कश्यप का प्रभावित गांवों तक पहुंचना राहत कार्यों के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं का भी उदाहरण माना जा रहा है। प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उन्होंने यह संदेश दिया कि जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं होती, बल्कि कठिन परिस्थितियों में लोगों के बीच उपस्थित रहकर उनका संबल बनना भी उतना ही आवश्यक है।




