
छोटेडोंगर में आवारा पशुओं का कहर, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
फसलें बर्बाद, जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता पर ग्रामीणों में आक्रोश
दंडकारण्य दर्पण
नारायणपुर/छोटेडोंगर | संवाददाता : बोधन नाग
मानसून की शुरुआत के साथ ही नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर और आसपास के गांवों में आवारा पशुओं का आतंक किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। खेतों में रोपी गई धान की फसल पर रोजाना गाय और बैलों के झुंड धावा बोल रहे हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में बर्बाद हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पशुपालन विभाग और संबंधित ग्राम पंचायतें इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा रही हैं।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत की ओर से कोटवार के माध्यम से कई बार मुनादी कर पशुपालकों से अपने मवेशियों को बांधकर रखने की अपील की गई, लेकिन इसका कोई असर दिखाई नहीं दिया। खुले में छोड़े गए पशु लगातार खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
हाल ही में छोटेडोंगर निवासी किसान श्रवण कुमार नाग की धान की फसल आवारा पशुओं ने पूरी तरह रौंद दी। श्रवण कुमार नाग, पिता बरातू राम नाग ने बताया कि उन्होंने करीब 16 हजार रुपये खर्च कर धान का बीज खरीदा और खेत में रोपा लगाया था, लेकिन कुछ ही दिनों में आवारा पशुओं ने पूरी फसल चौपट कर दी। उनका कहना है कि अब उन्हें दोबारा खेती करने के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा।
पिछले तीन से चार दिनों के दौरान क्षेत्र के कई किसानों ने मीडिया को फोटो और वीडियो भेजकर अपनी पीड़ा साझा की है। तस्वीरों में खेतों के भीतर दर्जनों आवारा पशु फसल चरते हुए दिखाई दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो इस वर्ष उनकी खेती पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी।
ग्रामीणों ने बताया कि महंगे बीज, खाद और खेती के अन्य खर्चों के लिए कई किसानों ने कर्ज लिया है। दिनभर खेतों में काम करने और रात में रखवाली करने के बावजूद थोड़ी सी चूक होने पर आवारा पशु पूरी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। कई किसानों का दावा है कि उनकी 40 से 50 प्रतिशत तक फसल खराब हो चुकी है।
किसानों का आरोप है कि आवारा पशुओं को पकड़कर गौठान में रखने, पशु मालिकों पर जुर्माना लगाने और नियमित निगरानी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। यही कारण है कि क्षेत्र में आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से तत्काल विशेष अभियान चलाकर आवारा पशुओं को पकड़ने, प्रत्येक पंचायत में अस्थायी गौठान की व्यवस्था करने, रात्रिकालीन निगरानी बढ़ाने तथा लापरवाह पशु मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो खरीफ सीजन में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।





