
राष्ट्रीय मंच पर चमका नारायणपुर, पर्यावरण चैंपियन अवार्ड 2026 से सम्मानित हुआ लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय
देशभर की 100 से अधिक संस्थाओं के बीच बनाई जगह, पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बस्तर की उपलब्धि को मिला राष्ट्रीय सम्मान
देहरादून/नारायणपुर। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए नारायणपुर का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हुआ है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधीन संचालित लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, नारायणपुर को प्रतिष्ठित “पर्यावरण चैंपियन अवार्ड 2026” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन, जैव विविधता संरक्षण, जैविक खेती, वृक्षारोपण, नशामुक्ति जागरूकता और जनसहभागिता आधारित अभियानों में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया।
यह राष्ट्रीय सम्मान भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित नमामि गंगे परियोजना तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में दिया गया। देशभर से प्राप्त 100 से अधिक नामांकनों में से कठोर मूल्यांकन और बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद केवल 9 संस्थाओं का चयन किया गया, जिनमें एक विश्वविद्यालय, पांच विद्यालय और तीन महाविद्यालय शामिल रहे। इनमें नारायणपुर का लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में सफल रहा।
राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित मंच पर बिहार, झारखंड, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ की संस्थाओं को सम्मानित किया गया। चयनित संस्थाओं में उत्तराखंड का प्रसिद्ध सामुदायिक रेडियो “रेडियो केदार” भी शामिल रहा। ऐसे प्रतिस्पर्धी माहौल में नारायणपुर की संस्था का चयन क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
समारोह के दौरान सभी चयनित संस्थाओं द्वारा पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता से जुड़े कार्यों की प्रस्तुति दी गई। लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय द्वारा प्रस्तुत गतिविधियों और उपलब्धियों को विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और उपस्थित प्रतिभागियों ने विशेष सराहना दी। संस्था को ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और सम्मान स्वरूप शॉल प्रदान किया गया।
यह सम्मान पद्मश्री कल्याण सिंह रावत और पद्मश्री मधुरी बर्थवाल के करकमलों से प्रदान किया गया। कार्यक्रम में भारतीय वन्यजीव संस्थान की डीन एवं नमामि गंगे परियोजना की नोडल अधिकारी डॉ. रुचि बडोला भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
अपने संबोधन में पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने कहा कि जल, जंगल और जैव विविधता का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने सामुदायिक भागीदारी को पर्यावरण संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। वहीं पद्मश्री मधुरी बर्थवाल ने लोकसंस्कृति और प्रकृति के गहरे संबंधों को रेखांकित करते हुए प्रकृति संरक्षण की भारतीय परंपरा पर प्रकाश डाला।
डॉ. रुचि बडोला ने नदियों, जल स्रोतों और जैव विविधता के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए युवाओं से पर्यावरणीय अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम की समन्वयक एवं मुख्य अन्वेषक संगीता अंगोम ने नमामि गंगे परियोजना के उद्देश्यों और जनभागीदारी आधारित पर्यावरणीय पहलों की महत्ता पर विस्तार से जानकारी दी।
उल्लेखनीय है कि लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय द्वारा पिछले कई वर्षों से जैविक खेती को बढ़ावा देने, वृक्षारोपण अभियान चलाने, जल संरक्षण गतिविधियों के संचालन, नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रमों, किसानों और विद्यार्थियों के प्रशिक्षण तथा जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में लगातार कार्य किया जा रहा है। इन्हीं प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देते हुए संस्था को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।
यह उपलब्धि केवल एक शैक्षणिक संस्थान की सफलता नहीं है, बल्कि पूरे बस्तर संभाग और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। दूरस्थ आदिवासी अंचल में स्थित एक संस्था का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना इस बात का प्रमाण है कि समर्पण, नवाचार और जनसहभागिता के बल पर स्थानीय प्रयास भी राष्ट्रीय पहचान हासिल कर सकते हैं।
दंडकारण्य दर्पण विशेष
नारायणपुर की धरती से शुरू हुई पर्यावरण संरक्षण की यह पहल अब राष्ट्रीय प्रेरणा बन चुकी है। यह सम्मान बताता है कि जब शिक्षा, समाज और प्रकृति संरक्षण का संकल्प एक साथ आगे बढ़ता है, तब विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की नई मिसाल स्थापित होती है। बस्तर की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करने का कार्य करेगी।




