
खरीफ सीजन 2026 की तैयारी तेज
सहकारी समितियों में खाद और बीज का पर्याप्त भंडारण, किसानों से जैविक खेती अपनाने की अपील
नारायणपुर। आगामी खरीफ सीजन 2026 को लेकर जिले में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। राज्य शासन की मंशानुरूप और कलेक्टर के मार्गदर्शन में किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए सहकारी समितियों में बड़े पैमाने पर उर्वरक और बीज का भंडारण किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को जैविक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अपील भी की गई है।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले को कुल 4645 मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसमें यूरिया 1545 मीट्रिक टन, डीएपी 800 मीट्रिक टन, सुपर फास्फेट 300 मीट्रिक टन, पोटाश 500 मीट्रिक टन और एनपीके 1500 मीट्रिक टन शामिल है। इसके विरुद्ध अब तक कुल 1569 मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है। इसमें यूरिया 1059 मीट्रिक टन, डीएपी 280 मीट्रिक टन, पोटाश 33 मीट्रिक टन, एसएसपी 15 मीट्रिक टन तथा एनपीके 182 मीट्रिक टन शामिल हैं।
किसानों द्वारा अग्रिम उठाव भी शुरू हो चुका है। अब तक कृषकों ने कुल 185 मीट्रिक टन उर्वरक का उठाव किया है। इसमें यूरिया 82 मीट्रिक टन, डीएपी 67 मीट्रिक टन, एमओपी 3 मीट्रिक टन और एनपीके 33 मीट्रिक टन शामिल हैं।
धान बीज भंडारण के लिए जिले में 1950 क्विंटल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध 748.20 क्विंटल धान बीज सहकारी समितियों में उपलब्ध कराया जा चुका है। किसानों द्वारा अब तक 7.20 क्विंटल धान बीज का उठाव भी किया गया है।
हरी खाद को बढ़ावा देने के लिए ढैंचा 52 क्विंटल और मूंग 26 क्विंटल का भंडारण भी किया गया है। कृषि विभाग ने बताया कि उर्वरक और बीज भंडारण का कार्य लगातार जारी है ताकि खरीफ सीजन में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
कृषि विभाग ने किसानों से प्राकृतिक अपशिष्टों से तैयार होने वाली जैविक खाद का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है। गोबर, गोमूत्र, हरी पत्तियां, फसल अवशेष और केंचुओं की सहायता से तैयार जैविक खाद खेती के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराती है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।
विभाग के अनुसार लगातार रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक क्षमता प्रभावित होती है, जबकि जैविक खाद मिट्टी की संरचना सुधारने, नमी बनाए रखने और सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ाने में सहायक होती है। इससे भूमि लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
कृषि विभाग ने किसानों से वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, घनजीवामृत और अन्य जैविक खादों के उपयोग को बढ़ाने की अपील की है। विभाग का कहना है कि जैविक खेती अपनाकर किसान खेती की लागत कम करने के साथ सुरक्षित और गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं तथा पर्यावरण और स्वास्थ्य संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।




